झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियों पर होगी सख्ती,हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आग्रह करेगी सरकार

राँची,19 अगस्त (युआईटीवी)- झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य में नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए राज्य सरकार हाईकोर्ट से आग्रह करेगी। परीक्षा सुधार को लेकर हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में लिए गए फैसलों से संबंधित अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है।

सरकार ने यह निर्णय ऐसे समय लिया है,जब राज्य में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। सरकार के अनुसार,राज्य में आयोजित कुल 45 नियुक्ति परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। इनमें से 22 परीक्षाओं को रद्द किया जा चुका है,जबकि छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा पहले आयोजित 17 परीक्षाओं की जांच कराने का निर्णय भी लिया गया है। इन परीक्षाओं की जाँच के संबंध में निर्णय अपराध अनुसंधान विभाग और विशेष जाँच दल की जाँच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।

सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है,क्योंकि इन परीक्षाओं के माध्यम से राज्य के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में युवाओं की नियुक्ति होती है। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता से न केवल योग्य अभ्यर्थियों के हित प्रभावित होते हैं,बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में सरकार ने पुरानी गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की जाँच और भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए एक साथ कई स्तरों पर सुधार करने का निर्णय लिया है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के लिए हाईकोर्ट से आग्रह करने का फैसला इसी व्यापक सुधार योजना का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और उनसे जुड़े कानूनी मामलों का तेजी से निपटारा होना जरूरी है। लंबे समय तक मामले अदालतों में लंबित रहने से अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होती है और परीक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। फास्ट ट्रैक व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

भविष्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी,निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत बदलाव करने का भी फैसला लिया है। इसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएँगे। ये प्रकोष्ठ दोनों आयोगों की परीक्षा प्रक्रिया और उससे संबंधित कार्यों पर लगातार निगरानी रखेंगे।

आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के अलग-अलग चरणों में संभावित अनियमितताओं की पहचान करना और उन्हें समय रहते रोकना होगा। सरकार की योजना केवल परीक्षा के दिन की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि पूरी प्रक्रिया को निगरानी के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे परीक्षा प्रक्रिया के हर महत्वपूर्ण चरण में जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परीक्षा एजेंसी के चयन से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने,उसकी छपाई,सुरक्षित परिवहन और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तक निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें दूर करना है,ताकि किसी भी स्तर पर अनधिकृत हस्तक्षेप या गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो सके।

राज्य सरकार ने दोनों आयोगों की पूरी परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का भी फैसला किया है। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे। समिति में राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी शामिल किया जाएगा। इससे समिति में प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

उच्चस्तरीय समिति झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की मौजूदा परीक्षा प्रणाली का विस्तृत अध्ययन करेगी। समिति परीक्षा आयोजित करने की मौजूदा प्रक्रिया,आयोगों की कार्यप्रणाली,तकनीकी व्यवस्था,प्रश्नपत्र की सुरक्षा,परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया सहित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसके बाद समिति परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को लेकर सरकार को अपनी सिफारिशें देगी।

सरकार ने समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का समय निर्धारित किया है। इस अवधि में समिति दोनों आयोगों की वर्तमान व्यवस्था का अध्ययन कर यह पता लगाएगी कि किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है। रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे परीक्षा प्रणाली में आवश्यक संस्थागत और प्रक्रियागत बदलाव लागू कर सकती है।

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ समय से अभ्यर्थियों का असंतोष लगातार सामने आता रहा है। परीक्षा रद्द होने या प्रक्रिया स्थगित होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य प्रभावित होता है। कई उम्मीदवार लंबे समय तक परीक्षा की तैयारी करते हैं और प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आने पर उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है। इससे समय और आर्थिक संसाधनों का नुकसान होने के साथ-साथ मानसिक दबाव भी बढ़ता है।

सरकार द्वारा 22 परीक्षाओं को रद्द करने और छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने का फैसला इस बात को दर्शाता है कि प्रशासन अब परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी संभावित गड़बड़ी को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाना चाहता है। वहीं,पहले आयोजित 17 परीक्षाओं की जाँच का फैसला यह संकेत देता है कि पुराने मामलों की भी जाँच कर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की जा रही है।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन घोषणाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी। आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन देना,परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करना,प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करना और जाँच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा,अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम करना भी सरकार और दोनों भर्ती आयोगों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

परीक्षा सुधार को लेकर कैबिनेट की विशेष बैठक में लिए गए फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार केवल किसी एक परीक्षा की समस्या का समाधान करने के बजाय पूरी भर्ती प्रणाली में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए हाईकोर्ट से आग्रह,आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठों का गठन और उच्चस्तरीय समिति की स्थापना इसी व्यापक योजना के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

अब सबकी नजर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर रहेगी। दो महीने में आने वाली रिपोर्ट में यदि ठोस और व्यावहारिक सुधारों की सिफारिशें सामने आती हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है,तो झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। साथ ही,गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहल से प्रभावित अभ्यर्थियों को भी जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।