नई दिल्ली,21 अगस्त (युआईटीवी)- जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और जापान के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति,स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के दौरान जुलाई 2026 में भारत में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन को याद किया। इस सम्मेलन के दौरान जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भारत आई थीं और दोनों देशों के बीच व्यापक स्तर पर बातचीत हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए भारत-जापान संबंधों में विशेष रूप से रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रधानमंत्री के अनुसार,भारत-जापान रक्षा सहयोग केवल दोनों देशों की सुरक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं है,बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के लिए भारतीय रक्षा क्षेत्र में मौजूद साझेदारी के अवसरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जापानी कंपनियों और भारतीय रक्षा उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जापानी कंपनियाँ भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
Pleased to receive Defence Minister of Japan Shinjiro Koizumi. Had an excellent conversation on deepening defence and security ties between India and Japan. Our Special Strategic and Global Partnership is an important anchor for peace, stability and prosperity in the Indo-Pacific… pic.twitter.com/jHbV6cd6fG
— Narendra Modi (@narendramodi) August 20, 2026
भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में जापान जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश के साथ रक्षा उपकरणों के निर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। सह-विकास और सह-उत्पादन के जरिए भारत में रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ जापानी कंपनियों के लिए भी भारतीय बाजार और उत्पादन नेटवर्क में भागीदारी के अवसर बढ़ सकते हैं।
मुलाकात के दौरान जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत-जापान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को और गहरा करने के लिए जापान सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए मौजूदा तंत्र को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
भारत और जापान के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते रणनीतिक परिदृश्य के बीच खास महत्व रखता है। दोनों देश स्वतंत्र,खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन की बात करते रहे हैं। ऐसे में रक्षा सहयोग,सैन्य समन्वय,सूचना साझेदारी और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकती है।
इसी दिशा में भारत और जापान ने एक नए कार्य समूह के गठन पर भी सहमति जताई है। इस कार्य समूह की अध्यक्षता दोनों देशों के महानिदेशक या संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में समग्र समन्वय स्थापित करना और दोनों देशों के बीच तय परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी की ओर से जारी संयुक्त बयान में इस कार्य समूह के गठन की जानकारी दी गई। बयान के अनुसार,यह समूह दोनों रक्षा मंत्रियों की ओर से तय किए गए सहयोग के क्षेत्रों में समन्वय करेगा। इसके साथ ही यह विभिन्न क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाने और रक्षा सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन में मदद करेगा।
कार्य समूह का दायरा भी काफी व्यापक रखा गया है। इसमें ऑपरेशनल सहयोग,खुफिया जानकारी,रक्षा उपकरण,तकनीक और रक्षा उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होंगे। इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध केवल उच्चस्तरीय राजनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि जमीनी स्तर पर विभिन्न परियोजनाओं और सहयोग कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी।
ऑपरेशनल सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा सकता है। वहीं खुफिया क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सूचनाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े आकलनों को साझा करने की क्षमता मजबूत हो सकती है। रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी सहयोग के जरिए दोनों देश नई प्रणालियों के विकास और उत्पादन में भी साझेदारी बढ़ा सकते हैं।
भारत के लिए रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी सहयोग विशेष महत्व रखता है। देश रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। जापान के पास उच्च तकनीक,उन्नत विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी विशेषज्ञता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने में मददगार हो सकता है।
जापान के लिए भी भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। भारत की भौगोलिक स्थिति और जापान की तकनीकी एवं आर्थिक क्षमता दोनों देशों को एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनाती है।
प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री कोइजुमी की मुलाकात इसी व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने की कड़ी के रूप में देखी जा रही है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा उद्योग, तकनीक और उपकरण निर्माण में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी जोर दिया गया।
कुल मिलाकर,जापानी रक्षा मंत्री की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को एक नया संस्थागत आधार देने का संकेत दिया है। नए कार्य समूह के गठन से रक्षा सहयोग से जुड़ी योजनाओं में बेहतर समन्वय और तेजी आने की उम्मीद है। वहीं ‘मेक इन इंडिया’ के तहत जापानी कंपनियों की भारतीय रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ संभावित भागीदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। आने वाले समय में भारत-जापान रक्षा साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में अपनी भूमिका को और व्यापक कर सकती है।
