भारत-श्रीलंका टेस्ट में जायसवाल और फर्नांडो के बीच नोकझोंक (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

भारत-श्रीलंका टेस्ट में जायसवाल और फर्नांडो के बीच नोकझोंक,अजय जडेजा ने भारतीय बल्लेबाज को लगाई फटकार

नई दिल्ली,24 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला कोलंबो के सिंहली क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है। मुकाबले के पहले दिन जहाँ भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मजबूत स्कोर खड़ा किया,वहीं मैदान पर यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने भी खूब चर्चा बटोरी। इस घटना को लेकर भारत के पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा ने यशस्वी जायसवाल के व्यवहार पर नाराजगी जताई और उन्हें मैदान पर अपने रवैये को लेकर संयम बरतने की सलाह दी।

दरअसल,भारतीय पारी के दौरान यशस्वी जायसवाल अच्छी लय में नजर आ रहे थे। उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की,लेकिन अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। जायसवाल को आउट करने के बाद असिथा फर्नांडो ने आक्रामक अंदाज में जश्न मनाया। उनका यह जश्न भारतीय बल्लेबाज को पसंद नहीं आया। पवेलियन लौटते समय जायसवाल अचानक पीछे मुड़े और उन्होंने फर्नांडो से कुछ कहा।

मामला यहीं नहीं रुका। दोनों खिलाड़ियों के बीच बढ़ती तनातनी के दौरान जायसवाल का हेलमेट फर्नांडो के सिर से भी टकरा गया। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की। श्रीलंकाई कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने बीच-बचाव करते हुए जायसवाल को वहाँ से अलग किया। कुछ ही समय में स्थिति सामान्य हो गई,लेकिन इस घटना ने मुकाबले में गर्मी जरूर बढ़ा दी।

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच हुई इस बहस पर चर्चा करते हुए अजय जडेजा ने भारतीय बल्लेबाज के रवैये पर सवाल उठाए। ‘सोनी स्पोर्ट्स’ पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह मामला खतरनाक इलाके में पहुँच सकता है और शारीरिक संपर्क को अलग नजर से देखा जाना चाहिए। जडेजा ने मैदान पर खिलाड़ियों के व्यवहार और आपसी मजाक को लेकर भी अपनी बात रखी।

अजय जडेजा ने कहा कि पिछले मुकाबले में जायसवाल दूसरी तरफ यानी फील्डिंग करते समय निरोशन डिकवेला से कुछ कह रहे थे। उस समय भी यह बात सामने आई थी कि मैदान पर मजाक तब तक ठीक है,जब तक भाषा और व्यवहार की सीमा पार न हो। जडेजा के मुताबिक,अगर कोई खिलाड़ी खुद पर किए गए मजाक को बर्दाश्त नहीं कर सकता,तो उसे मैदान पर दूसरे खिलाड़ियों के साथ भी उसी तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई खुद पर हँस नहीं सकता,तो उसे दूसरों पर भी नहीं हंसना चाहिए।

पहले दिन की बात करें,तो मुकाबला भारतीय टीम के पक्ष में रहा। भारत ने दिन का खेल समाप्त होने तक पाँच विकेट के नुकसान पर 300 रन बना लिए थे। भारतीय बल्लेबाजी में सबसे बड़ी उपलब्धि देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक रहा। उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 193 गेंदों में 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। पडिक्कल ने श्रीलंकाई गेंदबाजों का डटकर सामना किया और टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।

कप्तान शुभमन गिल ने भी उपयोगी अर्धशतकीय पारी खेली। उन्होंने पारी को सँभालते हुए टीम के स्कोर को आगे बढ़ाया और मध्यक्रम के बल्लेबाजों के लिए मजबूत आधार तैयार किया। भारतीय टीम ने पहले दिन नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए,लेकिन बल्लेबाजों ने स्कोरबोर्ड को लगातार आगे बढ़ाया और दिन के अंत तक 300 रन का आँकड़ा पार कर लिया।

यशस्वी जायसवाल ने भी शुरुआत अच्छी की थी और कुछ शानदार शॉट लगाए,लेकिन वह अपनी पारी को बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे। उन्होंने 53 गेंदों का सामना करते हुए 45 रन बनाए। शुरुआत में वह आत्मविश्वास से बल्लेबाजी करते नजर आए,लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर आउट होने के बाद उनकी पारी समाप्त हो गई। उनके आउट होने के बाद ही दोनों खिलाड़ियों के बीच नोकझोंक देखने को मिली।

रवींद्र जडेजा भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं टिक सके। उन्होंने 43 रन बनाए,लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। इस तरह श्रीलंकाई तेज गेंदबाज ने भारतीय पारी में महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। हालाँकि,भारतीय बल्लेबाजों की कुल प्रदर्शन क्षमता के कारण मेहमान टीम पहले दिन मजबूत स्थिति में रही।

भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबले में इस घटना ने खेल के प्रतिस्पर्धी माहौल को जरूर उजागर किया है। टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच मैदान पर बहस या आक्रामक जश्न कोई नई बात नहीं है,लेकिन जब मामला शारीरिक संपर्क तक पहुँच जाए,तो उसे गंभीरता से देखा जाता है। यही वजह है कि अजय जडेजा ने भी इस घटना को लेकर खिलाड़ियों के व्यवहार और जिम्मेदारी पर जोर दिया।

जडेजा की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही रहा कि मैदान पर आक्रामकता और प्रतिस्पर्धा खेल का हिस्सा हैं,लेकिन खिलाड़ियों को अपनी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। खासकर जब दोनों टीमों के बीच मुकाबला कड़ा हो,तब छोटी-सी बहस भी बड़ी घटना का रूप ले सकती है। खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने प्रदर्शन पर ध्यान दें और भावनाओं को नियंत्रण में रखें।

पहले दिन के खेल के आधार पर भारत ने मुकाबले में मजबूत स्थिति जरूर हासिल कर ली है। 300 रन का स्कोर और देवदत्त पडिक्कल का शतक टीम के लिए सकारात्मक संकेत हैं। अब दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाजों की कोशिश होगी कि स्कोर को और बड़ा किया जाए,जबकि श्रीलंकाई गेंदबाज जल्दी विकेट लेकर भारत को सीमित करने की कोशिश करेंगे।

फिलहाल मुकाबले की सबसे चर्चित तस्वीर मैदान पर हुई जायसवाल और फर्नांडो की नोकझोंक बनी हुई है। एक तरफ भारतीय टीम ने बल्ले से मजबूत शुरुआत की है, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों के बीच बढ़ी गर्मी ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों टीमें इस प्रतिस्पर्धी माहौल को किस तरह सँभालती हैं और टेस्ट के बाकी हिस्से में खेल किस दिशा में आगे बढ़ता है।