तेहरान,24 अगस्त (युआईटीवी)- होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने रविवार को घोषणा की कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जिन जहाजों पर ईरान के नियमों का पालन नहीं करने की पुष्टि होगी,उनके भविष्य के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। संभावित कार्रवाई में जुर्माना लगाने,जहाज को हिरासत में लेने या उसे जब्त करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। ईरान की इस घोषणा से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंताएँ और बढ़ गई हैं।
पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में जहाज संचालकों और व्यापारियों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी। प्राधिकरण ने पर्शियन गल्फ क्षेत्र में आने-जाने वाले माल से जुड़े व्यापारियों और कंपनियों से कहा कि वे किसी जहाज को किराये पर लेने से पहले उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध ‘नियमों का पालन न करने वाले जहाजों’ की सूची जरूर जांच लें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित जहाज के खिलाफ पहले से कोई कार्रवाई या प्रतिबंध दर्ज न हो और बाद में उसके आवागमन को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ईरान की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है,जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग पर्शियन गल्फ को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का समुद्री परिवहन होता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की सैन्य या राजनीतिक अस्थिरता का असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
इसी बीच ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन कशकावी ने भी होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समिति ने रविवार को हुई बैठक में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से संबंधित एक मसौदा प्रस्ताव के एक अनुच्छेद को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान इस समुद्री मार्ग से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क वसूल करेगा।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में नौवहन सेवाओं, पर्यावरण संबंधी सेवाओं, विशेष परिस्थितियों में ईंधन भरने की सुविधा, बीमा और सुरक्षा सेवाओं के लिए शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है। हालाँकि, इस प्रस्ताव की आगे की प्रक्रिया और इसके अंतिम रूप से लागू होने की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यदि यह व्यवस्था लागू होती है,तो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के संचालन और लागत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
ईरान की ओर से उठाए जा रहे इन कदमों को केवल समुद्री यातायात से जुड़े प्रशासनिक फैसले के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। हाल के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया था। उन्होंने इसे अमेरिका का क्षेत्र बताया था और कहा था कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना के मर्टल बीच में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ईरान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। यह रैली रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार डार्लीन ग्राहम के समर्थन में आयोजित की गई थी। ट्रंप ने कहा था कि ईरान किसी समझौते के लिए बहुत उत्सुक है। इसके बाद उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट का जिक्र करते हुए इसे अमेरिका का क्षेत्र बताया। हालाँकि,उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई कानूनी या क्षेत्रीय आधार पेश नहीं किया।
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ तनाव के कारण उनके घरेलू आर्थिक कार्यक्रम पर असर पड़ रहा है। उनका कहना था कि वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते, लेकिन अमेरिका को ईरान की ओर ध्यान देना होगा और परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना को रोकना होगा। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताता रहा है और इस मुद्दे को अपनी पश्चिम एशिया नीति में प्रमुख स्थान देता रहा है।
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा करने की कार्रवाई पहले भी सामने आ चुकी है। 28 फरवरी को ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को और मजबूत किया था। ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका,इजरायल और उनसे जुड़े या सहयोगी जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर रोक लगा दी थी। उस समय भी होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई थी।
ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट केवल एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग नहीं है,बल्कि यह उसकी रणनीतिक और सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा भी है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी समुद्री क्षमता और नियंत्रण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ता रहा है। ऐसे में जहाजों के लिए नियमों का पालन अनिवार्य करने और नियम तोड़ने पर संभावित कार्रवाई की चेतावनी को इसी व्यापक सुरक्षा नीति के संदर्भ में देखा जा सकता है।
दूसरी ओर,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत को देखते हुए किसी भी तरह के प्रतिबंध या जहाजों की आवाजाही में बाधा का व्यापक असर हो सकता है। तेल और गैस की आपूर्ति के साथ-साथ जहाजों की बीमा लागत,परिवहन खर्च और माल ढुलाई पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यदि किसी कारण से इस मार्ग पर लंबे समय तक यातायात बाधित होता है,तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे सकता है।
ईरान की ताजा घोषणा में व्यापारियों और कंपनियों से जहाज किराये पर लेने से पहले प्रतिबंधित या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों की सूची जाँचने को कहना भी महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि ईरान समुद्री यातायात पर निगरानी और नियमों के अनुपालन को और व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही,संभावित जुर्माना, हिरासत और जब्ती की चेतावनी जहाज संचालकों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बयानों का यह दौर ऐसे समय में चल रहा है,जब पश्चिम एशिया में पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियाँ मौजूद हैं। ईरान और इजरायल के बीच तनाव,अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेदों ने क्षेत्र की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में किसी भी समुद्री मार्ग को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कठोर बयान स्थिति को और जटिल बना सकते हैं।
फिलहाल ईरान ने जहाजों को अपने नियमों का पालन करने की स्पष्ट चेतावनी दी है और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी सेवाओं के लिए शुल्क लेने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। दूसरी ओर,अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अपना कड़ा रुख बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात,सुरक्षा व्यवस्था और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यह समुद्री मार्ग केवल ईरान और अमेरिका के बीच रणनीतिक तनाव का केंद्र नहीं है,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
