ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की पहली विदेश यात्रा कीव से शुरू (तस्वीर क्रेडिट@GloOouD)

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की पहली विदेश यात्रा कीव से शुरू,यूक्रेन में मिसाइल उत्पादन बढ़ाने का ऐलान

लंदन,24 अगस्त (युआईटीवी)- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने अपने कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा यूक्रेन की राजधानी कीव से शुरू की। यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की जा रही उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर यूरोप में सुरक्षा चिंताएँ बनी हुई हैं। बर्नहम अपनी यात्रा के दौरान यूक्रेन को घरेलू स्तर पर लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण में मदद देने की घोषणा करेंगे। ब्रिटेन की ओर से लिया गया यह फैसला दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के साथ ही रूस के साथ लंदन के तनाव को भी बढ़ा सकता है।

कीव पहुँचने पर यूक्रेन में ब्रिटेन के राजदूत वालेरी जालुजनी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बर्नहम के कीव पहुँचने की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट ने इस मुश्किल समय में यूक्रेन का साथ दिया है। उन्होंने ब्रिटेन के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। बर्नहम की यात्रा को यूक्रेन के प्रति ब्रिटेन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के एक महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

ब्रिटिश सरकार के अनुसार,यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलों के घरेलू उत्पादन में मदद देने के लिए रक्षा कंपनी एमबीडीए को ब्रिटिश घटकों से जुड़ी गोपनीय तकनीकी जानकारी साझा करने की अनुमति दी जाएगी। इससे यूक्रेन को फ्रांसीसी स्कैल्प क्रूज मिसाइल के निर्माण के लिए अपने देश में उत्पादन क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकेगी। स्कैल्प क्रूज मिसाइल को ब्रिटेन की स्टॉर्म शैडो मिसाइल के समकक्ष माना जाता है।

इस पहल का उद्देश्य यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करना और उसे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद करना है। रूस के साथ लंबे समय से जारी युद्ध में यूक्रेन को लंबी दूरी के हथियारों की जरूरत लगातार महसूस हुई है। ब्रिटेन की ओर से तकनीकी जानकारी और उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहायता मिलने से यूक्रेन भविष्य में अपने क्षेत्र में इन हथियारों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

बर्नहम अपनी यात्रा के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह यूक्रेन के लिए ब्रिटेन के समर्थन को दोहराएँगे और दोनों देशों के बीच रक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को लेकर बातचीत करेंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री का कहना है कि यूक्रेन की सुरक्षा केवल यूरोप की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है,बल्कि इसका सीधा संबंध ब्रिटेन की अपनी सुरक्षा से भी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लंदन कीव का समर्थन तब तक जारी रखेगा,जब तक एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति हासिल नहीं हो जाती।

ब्रिटेन की इस नीति का असर रूस के साथ उसके संबंधों पर भी पड़ सकता है। मॉस्को पहले ही लंदन पर यूक्रेन को ऐसे हथियार और ड्रोन उपलब्ध कराने का आरोप लगा चुका है,जिनका इस्तेमाल रूसी क्षेत्र के भीतर हमलों के लिए किया जा सकता है। रूस ने ब्रिटेन को इसके संभावित परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। हालाँकि,बर्नहम ने साफ कर दिया है कि ऐसी धमकियाँ यूक्रेन के प्रति ब्रिटेन की नीति को नहीं बदलेंगी।

ब्रिटिश सरकार का मानना है कि यूक्रेन को अपनी रक्षा क्षमता विकसित करने में सक्षम बनाना दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। यदि यूक्रेन अपने देश में लंबी दूरी की मिसाइलों का उत्पादन करने की क्षमता हासिल करता है,तो इससे युद्ध के दौरान उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। साथ ही,यूरोपीय देशों के लिए यूक्रेन के रक्षा उद्योग के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

बर्नहम की कीव यात्रा उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल की विदेश नीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा को अक्सर सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत माना जाता है। ऐसे में बर्नहम का अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए यूक्रेन को चुनना यह दर्शाता है कि उनकी सरकार यूरोपीय सुरक्षा और यूक्रेन के समर्थन को अपनी विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान दे रही है।

रूस के खिलाफ यूक्रेन को समर्थन देने के मामले में नाटो के कई देश लगातार मुखर रहे हैं। यूरोपीय देशों की ओर से यूक्रेन को सैन्य,आर्थिक और मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। रूस के साथ युद्ध के बीच यूक्रेन लगातार अपने सहयोगी देशों से सैन्य समर्थन बढ़ाने की अपील करता रहा है। राष्ट्रपति जेलेंस्की भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन के समर्थन में एकजुट रहने की अपील करते रहे हैं और युद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहे हैं।

बर्नहम की यात्रा के दौरान कीव में नॉर्डिक-बाल्टिक देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। इसमें आठ देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक की जानकारी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए साझा की। नॉर्डिक और बाल्टिक देशों ने भी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट रखी है। कीव में इन देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को यूक्रेन के प्रति क्षेत्रीय एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री की कीव यात्रा का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है। यह यात्रा ऐसे दिन हो रही है,जब यूक्रेन अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता को रेखांकित कर रहा है। युद्ध के बीच यूक्रेनी नेतृत्व लगातार यह संदेश देता रहा है कि देश अपनी स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। ब्रिटेन की ओर से इसी मौके पर रक्षा सहयोग की नई घोषणा किए जाने से दोनों देशों के बीच राजनीतिक निकटता का संदेश भी जाता है।

लंबी दूरी की मिसाइलों के घरेलू उत्पादन से जुड़ा प्रस्ताव युद्ध के भविष्य पर भी असर डाल सकता है। यदि यूक्रेन अपने स्तर पर इन हथियारों का उत्पादन बढ़ाता है, तो वह रूस के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अधिक स्वतंत्र हो सकता है। हालाँकि,इससे संघर्ष और अधिक जटिल होने तथा रूस की प्रतिक्रिया बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। यही वजह है कि ब्रिटेन के इस कदम को यूरोपीय सुरक्षा और रूस के साथ बढ़ते तनाव के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर,एंडी बर्नहम की पहली विदेश यात्रा का कीव से शुरू होना ब्रिटेन की विदेश नीति में यूक्रेन के महत्व को स्पष्ट करता है। लंबी दूरी की मिसाइलों के घरेलू उत्पादन में तकनीकी सहयोग,राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बैठक और यूक्रेन के समर्थन को लेकर ब्रिटेन की प्रतिबद्धता दोहराना इस यात्रा के प्रमुख पहलू हैं। दूसरी ओर,रूस की चेतावनियों के बावजूद ब्रिटेन का अपना रुख बनाए रखना यह संकेत देता है कि लंदन फिलहाल यूक्रेन के समर्थन से पीछे हटने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह रक्षा सहयोग रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था पर कितना प्रभाव डालता है,इस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।