तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से तमिलनाडु सरकार का किनारा, 1,700 एकड़ जमीन के औद्योगिक इस्तेमाल की तैयारी

चेन्नई,25 अगस्त (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार ने प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में इसकी औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि परंदूर में प्रस्तावित हवाई अड्डे से खेती की जमीन,जल संसाधनों और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता था। सरकार ने इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना को छोड़ने का निर्णय लिया है। हालाँकि,मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चेन्नई को भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक और एयरपोर्ट की आवश्यकता है और इसके लिए किसी दूसरी जगह की तलाश की जाएगी।

सरकार के इस फैसले के साथ ही परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है। हालाँकि,सरकार ने संकेत दिया है कि परियोजना के लिए पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी लगभग 1,700 एकड़ जमीन को वापस करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इन जमीनों का वैकल्पिक औद्योगिक इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार,जमीन मालिकों को दिए गए मुआवजे को भी वापस लेने की योजना नहीं है। सरकार का मानना है कि जिस कानून के तहत जमीन का अधिग्रहण किया गया था,उसके प्रावधानों के तहत इन जमीनों का इस्तेमाल एयरपोर्ट के अलावा अन्य औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा कि चेन्नई को एक नए एयरपोर्ट की जरूरत बनी हुई है, लेकिन इसके लिए ऐसी जगह का चयन किया जाएगा,जहाँ खेती,जल स्रोतों और बस्तियों को न्यूनतम नुकसान हो। उन्होंने मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट के विस्तार की योजना को भी जारी रखने की बात कही। इसका मतलब है कि सरकार एक ओर मौजूदा एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने पर काम करेगी,वहीं दूसरी ओर चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशेगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक,परंदूर में अधिग्रहित जमीन के भविष्य के इस्तेमाल को लेकर उद्योग विभाग विभिन्न विभागों के साथ विचार-विमर्श करेगा। इसके बाद जमीन के उपयोग का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। फिलहाल जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयाँ,खेती से जुड़े कामकाज और ऐसे उद्योग शामिल हैं,जिनसे स्थानीय पर्यावरण और जल संसाधनों पर अपेक्षाकृत कम जोखिम हो। इसके अलावा सिपकॉट औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य यह है कि पहले से अधिग्रहित जमीन को बेकार न छोड़ा जाए और उसका ऐसा उपयोग किया जाए,जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। हालाँकि,जमीन के अंतिम इस्तेमाल को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विभिन्न विभागों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद सरकार इस संबंध में विस्तृत रोडमैप जारी कर सकती है।

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना की योजना चेन्नई की लंबे समय की विमानन जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। वर्ष 2021 में इसके लिए सर्वेक्षण शुरू किया गया था और अगस्त 2022 में परियोजना की घोषणा की गई। योजना के अनुसार,परंदूर और आसपास के 13 गाँवों में लगभग 5,300 एकड़ जमीन पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना था। परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार का तर्क था कि चेन्नई में बढ़ते हवाई यातायात और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक अतिरिक्त एयरपोर्ट आवश्यक है।

लेकिन परियोजना की घोषणा के बाद से ही स्थानीय ग्रामीणों ने इसका लगातार विरोध किया। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह थी कि एयरपोर्ट के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण से खेती की जमीन खत्म हो जाएगी,जल स्रोत प्रभावित होंगे और कई गांवों की बसी-बसाई आबादी को विस्थापित होना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र की कृषि और जल व्यवस्था उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है और एयरपोर्ट परियोजना से इसका गंभीर नुकसान हो सकता है।

एगनापुरम गाँव के लोगों ने परियोजना के खिलाफ सबसे लंबे आंदोलनों में से एक चलाया। ग्रामीणों ने एक हजार एक सौ से अधिक दिनों तक रात के समय विरोध प्रदर्शन किए। आंदोलन के दौरान कई पंचायतों ने एयरपोर्ट परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए। कुल 16 पंचायत प्रस्तावों के जरिए परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई। इसके अलावा सात ग्राम सभा बैठकों का बहिष्कार भी किया गया। ग्रामीणों ने सरकार पर उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देने का आरोप लगाया था।

विरोध का असर स्थानीय परिवारों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई दिया। आंदोलन के दौरान कुछ परिवारों ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से दूर रखने का फैसला किया। ग्रामीणों का यह विरोध केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं था,बल्कि उनका कहना था कि परियोजना उनके पूरे सामाजिक और आर्थिक ढाँचे को प्रभावित करेगी। खेती,जल स्रोतों और गाँवों की मौजूदा संरचना को लेकर उनकी चिंताएँ लगातार बनी रहीं।

लगातार विरोध के बावजूद पिछली सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी रखी थी। परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों के लिए पुनर्वास योजनाएँ भी तैयार की गई थीं। विस्थापित परिवारों के लिए मॉडल घर बनाने की योजना सहित कई उपायों पर काम किया गया। सरकार का उद्देश्य प्रभावित लोगों को पुनर्वास और मुआवजे के जरिए राहत देना था,लेकिन ग्रामीण आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।

मौजूदा मुख्यमंत्री विजय ने जनवरी 2025 में एगनापुरम का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की चिंताओं को सुना था और वादा किया था कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है,तो परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द कर दिया जाएगा। सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने परियोजना से संबंधित गतिविधियों को धीमा कर दिया था। अब विधानसभा में की गई औपचारिक घोषणा के साथ इस परियोजना को समाप्त करने का निर्णय स्पष्ट हो गया है।

हालाँकि,परंदूर परियोजना खत्म होने के बावजूद चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत को सरकार ने खारिज नहीं किया है। अधिकारियों ने नए एयरपोर्ट के लिए संभावित स्थानों की तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी स्थान को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक,मुख्यमंत्री ने इस विषय पर अधिकारियों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की है। नई जगह का चयन करते समय खेती की जमीन,आबादी,जल संसाधन और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।

सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे चेन्नई की बढ़ती विमानन जरूरतों के लिए नए एयरपोर्ट की योजना तैयार करनी होगी,वहीं दूसरी ओर उसे ऐसा स्थान चुनना होगा,जहाँ स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े। परंदूर के अनुभव के बाद सरकार के लिए जमीन अधिग्रहण और स्थानीय सहमति का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

परंदूर में अधिग्रहित 1,700 एकड़ जमीन के भविष्य के इस्तेमाल पर भी नजर रहेगी। यदि सरकार इसे कृषि आधारित उद्योगों या कम जोखिम वाले औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में विकसित करती है,तो इससे इलाके में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है,लेकिन स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना भी जरूरी होगा। फिलहाल सरकार विभागीय स्तर पर योजना तैयार करने में जुटी है और आने वाले समय में जमीन के इस्तेमाल तथा चेन्नई के नए एयरपोर्ट के संभावित स्थान को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।