वॉशिंगटन,25 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव को और तेज करने का ऐलान किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका अब ईरान की आर्थिक व्यवस्था को कमजोर करने और उसे वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को सहारा देने वाली आर्थिक जीवनरेखाओं को काटना है। इसके साथ ही उन्होंने उन देशों,संस्थाओं और लोगों को भी चेतावनी दी है, जो ईरान के साथ अपने आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखना चाहते हैं।
स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमेरिका की नई रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों द्वारा चलाए गए डी-डे अभियान से की। बेसेंट के मुताबिक,डी-डे एक ऐसे ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत थी,जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों ने दुश्मन के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की थी और जरूरत पड़ने पर तीसरे देशों में मौजूद उसके ठिकानों को भी निशाना बनाया था। इसी भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका अब दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों के खिलाफ एक बड़ा आर्थिक अभियान शुरू कर रहा है।
बेसेंट ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरानी शासन को समर्थन देने वाली हर आर्थिक जीवनरेखा को काट देना है। उन्होंने संकेत दिया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक तेहरान पूरी तरह आर्थिक और राजनीतिक रूप से अलग-थलग नहीं पड़ जाता। अमेरिकी प्रशासन का यह रुख ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठाया है, जिसे उनके पूर्ववर्ती लंबे समय से टालते रहे थे। उनके मुताबिक,ट्रंप प्रशासन अब केवल ईरान से जुड़े खतरे को नियंत्रित करने या उसके प्रभाव को सीमित करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि उस खतरे को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। बेसेंट के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक रणनीति को व्यापक और अधिक आक्रामक बनाना चाहता है।
इस अभियान में केवल ईरान की घरेलू अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की बात नहीं कही गई है,बल्कि उसके अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संबंधों पर भी दबाव बढ़ाने की रणनीति सामने आई है। अमेरिका का उद्देश्य उन आर्थिक नेटवर्क और वित्तीय संपर्कों को कमजोर करना है, जिनके जरिए ईरानी शासन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधन और आर्थिक सहयोग हासिल होता है। इससे ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेनदेन करना और अधिक कठिन हो सकता है।
स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ सहयोग करने वाले देशों और संस्थाओं के लिए सकारात्मक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग अमेरिका के साथ खड़े होंगे, उन्हें अमेरिकी साझेदारी के लाभ मिलेंगे। इसके विपरीत,जो लोग तेहरान के साथ अपने संबंध बनाए रखेंगे,उन्हें ऐसे शासन के साथ अलगाव का सामना करना पड़ेगा,जो अमेरिकी दबाव के कारण कमजोर और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
बेसेंट का यह बयान उन देशों और कंपनियों के लिए भी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जिनके ईरान के साथ व्यापारिक या वित्तीय संबंध हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर प्रतिबंधों के जरिए उसके आर्थिक संसाधनों को सीमित करने की कोशिश करता रहा है। अब नए अभियान के जरिए इन प्रतिबंधों को और व्यापक बनाने तथा ईरान से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डालने की दिशा में कदम उठाए जाने की संभावना है।
अमेरिका के इस कदम का इजराइल ने भी समर्थन किया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी शासन के खिलाफ नए अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को बधाई दी। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ईरानी शासन और उसकी आक्रामक गतिविधियों को जारी रखने में मदद करने वालों पर भारी कीमत लगाई गई है।
नेतन्याहू ने अमेरिकी कार्रवाई को ईरानी शासन के खिलाफ एक मजबूत संदेश बताया। उन्होंने कहा कि इस कदम से उन लोगों को स्पष्ट संकेत मिलता है,जो ईरानी शासन के साथ सहयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार,ऐसे सहयोगियों को भी भविष्य में इसके परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इजराइल लंबे समय से ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों और उसके सहयोगी संगठनों को लेकर चिंता जताता रहा है। ऐसे में अमेरिका की नई आर्थिक रणनीति को इजराइल की ओर से समर्थन मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा,प्रतिबंधों और मध्य पूर्व में ईरान के प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार मतभेद रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन की नई घोषणा ऐसे समय में हुई है,जब मध्य पूर्व में सुरक्षा परिस्थितियाँ पहले से ही संवेदनशील बनी हुई हैं। आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति का उद्देश्य ईरान की वित्तीय क्षमता को कमजोर करना और उसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन जुटाना कठिन बनाना है।
ईरान के खिलाफ आर्थिक अभियान का असर केवल दोनों देशों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वैश्विक ऊर्जा बाजार,व्यापारिक नेटवर्क और उन देशों के आर्थिक हित भी इससे प्रभावित हो सकते हैं,जिनके ईरान के साथ कारोबारी संबंध हैं। यदि अमेरिका ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाता है,तो अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को भी अपने कारोबारी संबंधों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
अमेरिकी प्रशासन का संदेश फिलहाल स्पष्ट है कि वह ईरान के खिलाफ केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता। आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए तेहरान की वित्तीय क्षमता पर दबाव डालना उसकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। बेसेंट ने जिस तरह इस अभियान को ऐतिहासिक डी-डे अभियान की भावना से जोड़ा है, उससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इसे एक व्यापक और लंबे समय तक चलने वाली रणनीति के रूप में देख रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस आर्थिक अभियान को किस स्तर तक ले जाता है और ईरान तथा उसके सहयोगी देश इसका किस तरह जवाब देते हैं। यदि आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता है,तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका लक्ष्य तेहरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उसके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संबंधों को सीमित करना है,जबकि इजराइल ने इस कदम का खुलकर समर्थन किया है।
