अर्जेंटीना से 3-5 की हार के साथ भारत का वर्ल्ड कप खिताब जीतने का सपना टूटा (तस्वीर क्रेडिट@ddnewsBihar)

पुरुष हॉकी विश्व कप 2026: अर्जेंटीना से 3-5 की हार के साथ भारत का वर्ल्ड कप खिताब जीतने का सपना टूटा,सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म

एम्स्टेलवीन,25 अगस्त (युआईटीवी)- एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का खिताबी सपना सोमवार को टूट गया। नीदरलैंड के एम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए पूल-ई के मुकाबले में भारत को पूर्व ओलंपिक चैंपियन अर्जेंटीना के हाथों 3-5 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारतीय टीम के सेमीफाइनल में पहुँचने की उम्मीदें भी समाप्त हो गईं। टूर्नामेंट के दूसरे चरण में लगातार दूसरी हार झेलने वाली भारतीय टीम अपने प्रदर्शन से निराश नजर आई। अर्जेंटीना ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेली और भारतीय टीम को वापसी का पर्याप्त मौका नहीं दिया।

भारत के लिए यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण था। पूल-डी में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम ने दूसरे चरण में जगह बनाई थी,लेकिन यहाँ पहुँचने के बाद उसके सामने चुनौती काफी कठिन हो गई। नीदरलैंड के खिलाफ पिछले मुकाबले में 1-3 से हार के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें काफी कमजोर हो गई थीं। अंतिम चार में जगह बनाने के लिए भारतीय टीम को अर्जेंटीना के खिलाफ कम से कम चार गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी। इसके अलावा दूसरे मुकाबलों के नतीजे भी भारत के पक्ष में आने जरूरी थे। ऐसे में अर्जेंटीना के खिलाफ भारत को अपनी पूरी ताकत झोंकनी थी,लेकिन टीम लक्ष्य के करीब भी नहीं पहुँच सकी।

मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए बेहद खराब रही। अर्जेंटीना ने पहले ही मिनट में गोल दागकर भारतीय टीम पर दबाव बना दिया। जोआक्विन टोस्कानी ने गोल करते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। भारतीय टीम अभी शुरुआती झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि छठे मिनट में निकोलस डेला टोरे ने दूसरा गोल कर दिया। महज छह मिनट के भीतर अर्जेंटीना ने 2-0 की बढ़त बनाकर भारत की मुश्किलें बढ़ा दीं।

दो गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने वापसी की कोशिश की। 10वें मिनट में सुखजीत सिंह ने भारत के लिए गोल करके स्कोर 1-2 कर दिया। इस गोल से भारतीय खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा और टीम ने अर्जेंटीना के डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालाँकि,भारतीय टीम अपने हमलों को गोल में बदलने में कामयाब नहीं हो सकी। अर्जेंटीना ने रक्षात्मक रूप से मजबूत खेल दिखाया और भारतीय खिलाड़ियों को गोल के सामने ज्यादा मौके नहीं दिए। पहले हाफ के समाप्त होने तक अर्जेंटीना 2-1 से आगे रहा।

दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने बराबरी की कोशिश की,लेकिन दोनों टीमों की ओर से कोई गोल नहीं हो सका। भारत ने गेंद पर कब्जा बनाए रखने और अर्जेंटीना के सर्कल में प्रवेश करने की कोशिश की,लेकिन अंतिम चरण में उसके हमलों में वह धार दिखाई नहीं दी जिसकी इस मुकाबले में जरूरत थी। भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने बनाए मौकों को गोल में बदलने की रही। फाइनल थर्ड में बेहतर मूवमेंट और गोल के सामने अधिक सटीकता की कमी भारतीय टीम पर भारी पड़ी।

तीसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने एक बार फिर भारत पर दबाव बढ़ाया। 33वें मिनट में टॉमस डोमेने ने गोल करके अर्जेंटीना की बढ़त 3-1 कर दी। इसके बाद 45वें मिनट में डोमेने ने अपना दूसरा गोल दाग दिया और अर्जेंटीना को 4-1 की मजबूत बढ़त दिला दी। दो गोल करने वाले डोमेने भारतीय डिफेंस के लिए लगातार परेशानी खड़ी करते रहे। अर्जेंटीना ने अपनी बढ़त का फायदा उठाते हुए मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर ली।

भारत के लिए स्थिति तब और कठिन हो गई,जब 53वें मिनट में लुकास टोस्कानी ने गोल कर अर्जेंटीना को 5-1 से आगे कर दिया। इस समय तक मुकाबला लगभग भारतीय टीम की पकड़ से बाहर हो चुका था। हालाँकि,भारतीय खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी और आखिरी मिनटों में स्कोर अंतर कम करने की कोशिश जारी रखी। 58वें मिनट में सुखजीत सिंह ने अपना दूसरा गोल करते हुए भारत का स्कोर 2-5 किया। इसके बाद 60वें मिनट में हार्दिक सिंह ने गोल करके भारत के स्कोर को 3-5 तक पहुँचा दिया,लेकिन समय समाप्त होने के कारण भारतीय टीम वापसी नहीं कर सकी और अर्जेंटीना ने 5-3 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

भारत की हार का सबसे बड़ा कारण गोल के सामने मौकों को भुनाने में नाकामी रही। टीम ने कई बार अर्जेंटीना के सर्कल में प्रवेश किया,लेकिन अंतिम पास और फिनिशिंग में कमी दिखाई दी। इसके विपरीत अर्जेंटीना ने अपने अवसरों का बेहतर इस्तेमाल किया और शुरुआती मिनटों में बनाए दबाव को गोल में बदलकर मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया। भारतीय टीम को फाइनल थर्ड में ज्यादा आक्रामक और सटीक होने की जरूरत थी,लेकिन अर्जेंटीना की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने भारतीय हमले अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके।

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत पूल-डी में की थी। उसने अपने पहले मुकाबले में वेल्स को 3-1 से हराकर अच्छी शुरुआत की थी। इसके बाद टीम को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। तीसरे मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराकर अगले चरण में अपनी जगह पक्की की। तीन मुकाबलों में दो जीत के साथ भारतीय टीम पूल-डी की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही और दूसरे चरण में पहुँचीं।

हालाँकि,दूसरे चरण में भारत का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। पहले मुकाबले में उसे नीदरलैंड के हाथों 1-3 से हार मिली। इस हार के बाद सेमीफाइनल में पहुँचने के लिए भारत के सामने बेहद कठिन समीकरण बन गया था। उसे अर्जेंटीना को कम-से-कम चार गोल के अंतर से हराना जरूरी था। साथ ही अन्य मुकाबलों के नतीजे भी भारत के पक्ष में आने आवश्यक थे। लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ दो गोल के अंतर से हार ने भारतीय टीम की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। दूसरे चरण में भारत एक भी अंक हासिल नहीं कर सका।

दूसरी ओर,ओलंपिक खेलों की 2016 की स्वर्ण पदक विजेता अर्जेंटीना ने दूसरे चरण में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। उसने अपने पहले मुकाबले में इंग्लैंड को 3-1 से मात दी थी। भारत के खिलाफ जीत के बाद अर्जेंटीना के खाते में छह अंक हो गए हैं और वह नीदरलैंड के बराबर पहुँच गई है। पूल-ई में शीर्ष दो स्थानों के लिए मुकाबला अब बेहद रोमांचक हो गया है।

सोमवार को इंग्लैंड और नीदरलैंड के बीच होने वाला मुकाबला पूल-ई की तस्वीर साफ करेगा। इसी मुकाबले के बाद तय होगा कि कौन सी दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएँगी। भारत के लिए हालाँकि,टूर्नामेंट का खिताबी सफर समाप्त हो गया है। टीम ने शुरुआती चरण में उम्मीद जगाई थी,लेकिन निर्णायक दौर में लगातार दो हार के कारण उसका अभियान समय से पहले खत्म हो गया।

अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भारत ने अंतिम क्षणों में दो गोल जरूर किए,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुखजीत सिंह के दो गोल और हार्दिक सिंह के एक गोल ने हार का अंतर कम किया,मगर टीम को जिस बड़े अंतर से जीत की जरूरत थी,वह हासिल नहीं हो सकी। अब भारतीय टीम के सामने इस टूर्नामेंट से सीख लेकर अपनी कमियों को दूर करने की चुनौती होगी। खास तौर पर फाइनल थर्ड में मूवमेंट,मौके बनाने के बाद फिनिशिंग और शुरुआती दबाव से निपटने की क्षमता पर काम करना जरूरी होगा। विश्व कप का खिताब जीतने का भारत का सपना भले ही टूट गया हो,लेकिन टीम के लिए आगे के अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में इन कमजोरियों को सुधारना बेहद अहम रहेगा।