इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन

इसरो चेयरमैन का कहना है कि 2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा

नई दिल्ली,25 अगस्त (युआईटीवी)- भारत अंतरिक्ष में अपनी स्थायी मौजूदगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने घोषणा की है कि देश का लक्ष्य 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाना है।

23 अगस्त को अहमदाबाद में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह में बोलते हुए, नारायणन ने कहा कि प्रस्तावित ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (बीएएस) भारत के लंबे समय के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है। स्टेशन के पहले मॉड्यूल को पहले ही मंज़ूरी मिल चुकी है।

यह प्रस्तावित स्पेस स्टेशन भारत के व्यापक ‘स्पेस विज़न 2047’ का हिस्सा है,जिसमें 2028 तक बीएएस का पहला मॉड्यूल बनाना, 2035 तक स्टेशन का काम पूरा करना और 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजना शामिल है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का विकास भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, ‘गगनयान कार्यक्रम’ से गहराई से जुड़ा है। इस कार्यक्रम को ऐसी ज़रूरी तकनीकें विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है,जिनकी मदद से अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में भेजा जा सके और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाया जा सके।

इसरो मानव-अनुकूल लॉन्च सिस्टम,जीवन-रक्षक तकनीकों और अन्य प्रणालियों में भारत की क्षमताओं को बढ़ाने पर भी काम कर रहा है, जो लंबे समय तक चलने वाले मिशनों के लिए ज़रूरी होंगी।

नारायणन ने अंतरिक्ष तकनीक में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर ज़ोर दिया और बताया कि अंतरिक्ष-आधारित एप्लिकेशन्स का इस्तेमाल अब 50 से ज़्यादा क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को सीधे फ़ायदा होता है। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेज़ी से इनोवेशन,सहयोग और वैश्विक नेतृत्व पर केंद्रित हो रहा है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत अलग-अलग सैटेलाइट और ग्रहों के मिशन से आगे बढ़कर अपनी महत्वाकांक्षाओं का विस्तार कर रहा है। इस महीने की शुरुआत में, नारायणन ने कहा था कि भारत अगले पांच से छह वर्षों में कम से कम 300 सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना भी बना रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के वैज्ञानिक रिसर्च,टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और मानव अंतरिक्ष उड़ान गतिविधियों के लिए एक अहम प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करने की उम्मीद है। इसका विकास भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा बदलाव होगा—यानी कम समय के मिशन से हटकर ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ (पृथ्वी की निचली कक्षा) में इंसानों की लगातार मौजूदगी की ओर बढ़ना।

गगनयान,अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम, चंद्रयान-4 और भविष्य के चंद्रमा से जुड़े लक्ष्यों को देश के लंबे समय के रोडमैप में शामिल करके,भारत मानव अंतरिक्ष खोज में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।

अगर रोडमैप तय समय के अनुसार चलता रहा,तो 2035 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जब भारत अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा और दुनिया के प्रमुख अंतरिक्ष-सक्षम देशों के बीच अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।