अस्पताल में गर्लफ्रेंड के साथ पकड़ा गया कैदी,वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप में कॉन्स्टेबल निलंबित; एडीजीपी ने माँगी रिपोर्ट

मांड्या,26 अगस्त (युआईटीवी)- कर्नाटक के मांड्या जिले से जेल व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक कैदी को कथित तौर पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने और नियमों को दरकिनार कर अस्पताल में भर्ती कराने के मामले में जिला आर्म्ड रिजर्व के एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि कैदी को बिना किसी गंभीर बीमारी के अस्पताल ले जाया गया और कोर्ट की अनुमति के बिना उसे भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के बहाने पहुँचे कैदी को बाद में उसकी गर्लफ्रेंड के साथ वार्ड में पकड़ा गया। मामला सामने आने के बाद जेल विभाग में हड़कंप मच गया।

घटना की जानकारी मिलते ही जेल विभाग के एडीजीपी आलोक कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया और मांड्या जिला जेल का दौरा किया। उन्होंने जेल की अलग-अलग बैरकों का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने घटना को लेकर जेल अधिकारियों और कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की। एडीजीपी ने यह जानने की कोशिश की कि कैदी को अस्पताल ले जाने और वहाँ भर्ती कराने की प्रक्रिया में किन नियमों का पालन किया गया था और लापरवाही कहाँ हुई।

मामला मांड्या के एमआईएमएस अस्पताल से जुड़ा है। आरोप है कि कॉन्स्टेबल चंदन की ओर से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए गए कैदी को वार्ड में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहने दिया गया। बाद में कैदी मोहम्मद हुसैन को अस्पताल के वार्ड में उसकी गर्लफ्रेंड के साथ पकड़ा गया। घटना सामने आने के बाद ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में जिला आर्म्ड रिजर्व के कॉन्स्टेबल चंदन को निलंबित कर दिया गया।

जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है,क्योंकि किसी कैदी को जेल से बाहर अस्पताल ले जाने और वहाँ भर्ती कराने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आरोप है कि मोहम्मद हुसैन को बिना किसी गंभीर बीमारी के अस्पताल में भर्ती कराया गया और इसके लिए अदालत की अनुमति भी नहीं ली गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में कैदी को जेल से अस्पताल ले जाया गया और अस्पताल में उसके रहने की व्यवस्था कैसे की गई।

घटना के बाद एडीजीपी आलोक कुमार ने मांड्या एमआईएमएस अस्पताल का भी दौरा किया। उन्होंने अस्पताल परिसर और संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों से कैदी को अस्पताल में भर्ती किए जाने से जुड़ी जानकारी ली गई। इसके साथ ही मामले की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल कर्मचारियों की भूमिका की जाँच के निर्देश दिए गए हैं।

एडीजीपी ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट भी माँगी है। जेल अधीक्षक और एमआईएमएस अस्पताल के अधीक्षक को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। दोनों अधिकारियों को 27 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कैदी को अस्पताल में भर्ती कराने के पीछे क्या कारण बताया गया था, किस स्तर पर अनुमति ली गई और नियमों का उल्लंघन किस तरह हुआ।

जिस कैदी मोहम्मद हुसैन को लेकर यह पूरा विवाद सामने आया है,उसे दो जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उस पर जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का आरोप है। बताया गया है कि मामला जमीन के रिकॉर्ड के रजिस्टर,रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और सरकारी सॉफ्टवेयर में कथित तौर पर फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ा हुआ है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में था और उसे जेल से बाहर ले जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। किसी भी कैदी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जेल प्रशासन की निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है,लेकिन इसके लिए मेडिकल जरूरत और संबंधित अधिकारियों की अनुमति महत्वपूर्ण होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं कि कैदी को बिना गंभीर बीमारी और बिना अदालत की अनुमति के अस्पताल में भर्ती कराया गया,तो यह जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

कैदी के अस्पताल में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहने की घटना ने मामले को और भी चर्चा में ला दिया है। जेल में बंद किसी आरोपी या कैदी को अस्पताल में भी सुरक्षा और निगरानी के बीच रखा जाता है। ऐसे में उसके साथ किसी निजी व्यक्ति के इस तरह रहने की अनुमति कैसे मिली,इसकी जाँच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एडीजीपी आलोक कुमार के औचक निरीक्षण और अधिकारियों से पूछताछ के बाद अब विभागीय जाँच तेज होने की उम्मीद है। कॉन्स्टेबल चंदन का निलंबन शुरुआती कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। जाँच में यदि अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल जेल विभाग और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि कैदी को अस्पताल में भर्ती कराने की वास्तविक वजह क्या थी और इस पूरी व्यवस्था में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई। मांड्या में सामने आए इस मामले ने जेल में बंद कैदियों की निगरानी,अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर 27 अगस्त तक जमा होने वाली रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर है।