जापान में पीयूष गोयल की कारोबारी दिग्गजों से मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@PiyushGoyal)

जापान में पीयूष गोयल की कारोबारी दिग्गजों से मुलाकात,भारत में निवेश बढ़ाने पर जोर; बैंकिंग,बीमा और उद्योग क्षेत्र पर हुई चर्चा

टोक्यो,26 अगस्त (युआईटीवी)- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को जापान दौरे के तीसरे दिन देश के प्रमुख कारोबारी और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों के साथ व्यापार,मोबिलिटी, औद्योगिक,बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने जापानी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के सामने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था,लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में देश की क्षमता को प्रमुखता से रखा।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने जापान दौरे से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन समूह,मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप और निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान भारत में मौजूद कारोबारी अवसरों और विभिन्न क्षेत्रों में जापानी कंपनियों के निवेश को बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

टोयोटा त्सुशो कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तोशिमित्सु इमाई के साथ बैठक में भारत में कंपनी की भागीदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार,मोबिलिटी और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर विचार किया। पीयूष गोयल ने बैठक के दौरान भारत की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को जापानी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर पेश किया।


केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अपनी विनिर्माण क्षमता और निर्यात क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में जापानी कंपनियाँ भारत में उत्पादन बढ़ाकर न केवल घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं,बल्कि यहाँ से दुनिया के दूसरे बाजारों के लिए भी निर्यात कर सकती हैं। भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जापान की कंपनियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके बाद पीयूष गोयल ने सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन समूह के डिप्टी प्रेसिडेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर योशिहिरो हयाकुतोमे के साथ बैठक की। इसमें भारत और जापान के बीच वित्तीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ बैंकिंग क्षेत्र में निवेश और सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के लिए मजबूत वित्तीय सहयोग को अहम माना जा रहा है।

भारत में बुनियादी ढाँचे,विनिर्माण और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में जापान के प्रमुख बैंक भारतीय कंपनियों और परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के साथ निवेश के नए रास्ते तलाश सकते हैं। बैठक में इसी तरह के अवसरों पर चर्चा हुई।

पीयूष गोयल ने मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप के डिप्टी चेयरमैन यासुशी इतागाकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी मुलाकात की। इस बैठक में बैंकिंग,वाणिज्यिक वित्त और निवेश के क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने पर विचार किया गया। केंद्रीय मंत्री ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय क्षेत्र को जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ा अवसर बताया।

उन्होंने कहा कि भारत का गतिशील वित्तीय क्षेत्र जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ गहरी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराता है। भारत में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बैंकिंग और वाणिज्यिक वित्त की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में जापानी वित्तीय संस्थानों के लिए भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

केंद्रीय मंत्री ने निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और ग्लोबल बिजनेस प्रमुख मिनोरू किमुरा के साथ भी बैठक की। इसमें बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की गई। गोयल ने भारत के तेजी से विस्तार कर रहे बीमा बाजार में जापानी कंपनियों के लिए मौजूद संभावनाओं पर भी जोर दिया।

भारत में बीमा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और अधिक लोगों तक बीमा सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में वैश्विक अनुभव,तकनीक और पूँजी रखने वाली जापानी बीमा कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की गुंजाइश है। बैठक में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के संभावित रास्तों पर विचार किया गया।

पीयूष गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत दोनों देशों के आर्थिक और निवेश संबंधों को नई गति देने की कोशिश कर रहा है। जापान लंबे समय से भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे,विनिर्माण और वित्तीय क्षेत्रों में भी सहयोग रहा है।

भारत सरकार जापानी कंपनियों को देश में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके पीछे भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की व्यापक रणनीति है। जापान की तकनीकी क्षमता,पूँजी और औद्योगिक विशेषज्ञता को भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था और बढ़ते उत्पादन आधार के साथ जोड़ने से दोनों देशों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

पीयूष गोयल की इन बैठकों से यह संकेत मिलता है कि भारत-जापान आर्थिक संबंधों को केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित रखने के बजाय नए क्षेत्रों तक विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। मोबिलिटी और औद्योगिक क्षेत्र के साथ बैंकिंग,वाणिज्यिक वित्त,बीमा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

अब इन बैठकों में हुई चर्चाओं को आगे निवेश और कारोबारी साझेदारियों में बदलना महत्वपूर्ण होगा। यदि जापानी कंपनियाँ और वित्तीय संस्थान भारत में अपनी गतिविधियों का विस्तार करते हैं,तो इससे निवेश बढ़ने के साथ रोजगार,विनिर्माण और निर्यात को भी गति मिल सकती है। वहीं जापान के लिए भारत का विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था लंबे समय में महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर उपलब्ध करा सकती है।

कुल मिलाकर,जापान दौरे के दौरान पीयूष गोयल की प्रमुख कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकें भारत-जापान आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इन चर्चाओं में भारत की निवेश क्षमता,वैश्विक निर्यात केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा और तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय एवं बीमा बाजार को प्रमुखता दी गई। सरकार की कोशिश है कि जापानी पूँजी और विशेषज्ञता को भारत के विकास के साथ जोड़कर दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बनाया जाए।