सलेम,26 अगस्त (युआईटीवी)- तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के 28 अगस्त को मेट्टूर बाँध खोलने की उम्मीद है। जलाशय में लगातार पानी की आवक बढ़ने और जलस्तर में सुधार के बाद सरकार अब कावेरी डेल्टा के जिलों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की तैयारी में जुट गई है। यदि तय कार्यक्रम के अनुसार बाँध खोला जाता है,तो इससे राज्य के 13 जिलों में फैली करीब 16 लाख एकड़ कृषि भूमि को लाभ मिलने की उम्मीद है। पानी का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेट्टूर बाँध से कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। सामान्य तौर पर हर साल 12 जून को बाँध से पानी छोड़ा जाता है,ताकि किसान समय पर खेती की तैयारी शुरू कर सकें। हालाँकि,बाँध में उपलब्ध पानी की मात्रा और मानसून की स्थिति को देखते हुए पानी छोड़ने की तारीख में बदलाव किया जा सकता है। इस साल पर्याप्त जल भंडारण नहीं होने के कारण 12 जून को बाँध नहीं खोला जा सका। अब तय तारीख के करीब 70 दिन बाद भी कुरुवई धान की खेती के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है।
पानी नहीं मिलने के कारण डेल्टा क्षेत्र के किसान लगातार सरकार से जल्द फैसला लेने की माँग कर रहे हैं। खासकर कम अवधि में तैयार होने वाली कुरुवई धान की फसल के लिए समय पर पानी मिलना बेहद जरूरी है। खेती का मौसम आगे बढ़ने के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही थी। ऐसे में जलाशय में पानी की लगातार बढ़ती आवक ने किसानों को उम्मीद दी है कि अब सिंचाई के लिए पानी जल्द उपलब्ध हो सकता है।
मंगलवार को मेट्टूर बाँध में पानी का स्तर 88.43 फीट दर्ज किया गया। जलाशय में पानी की आवक 10,807 घन फुट प्रति सेकंड बताई गई। लगातार पानी आने के कारण बाँध का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अनुमान है कि अगले दो दिनों में जलस्तर 90 फीट तक पहुँच सकता है। आम तौर पर तमिलनाडु सरकार जलस्तर 90 फीट तक पहुँचने के बाद बाँध से पानी छोड़ने पर विचार करती है। ऐसे में जलस्तर में हो रही वृद्धि ने जल्द पानी छोड़े जाने की संभावना को मजबूत कर दिया है।
मंगलवार सुबह तमिलनाडु विधानसभा में भी मेट्टूर बाँध से पानी छोड़ने का मुद्दा उठाया गया। विपक्षी विधायकों ने सरकार से सवाल किया कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी आखिर कब उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने सरकार से स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने की माँग की। जल संसाधन मंत्री आनंद ने विपक्षी सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए संकेत दिया कि सरकार बाँध में पानी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और परिस्थितियों के अनुसार फैसला लिया जाएगा।
इसी बीच सलेम जिले के पुलिस अधीक्षक कुथलिंगम ने मेट्टूर बाँध का औचक दौरा किया। उन्होंने बाँध परिसर का निरीक्षण किया और वहाँ की स्थिति का जायजा लिया। उनके दौरे के अलावा बाँध स्थल पर चल रही अन्य आधिकारिक गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन गतिविधियों से संकेत मिले कि प्रशासन बाँध से पानी छोड़ने के संभावित कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 अगस्त को मेट्टूर बाँध पहुँच सकते हैं और इसी दौरान कावेरी डेल्टा की सिंचाई के लिए जलाशय से औपचारिक रूप से पानी छोड़ा जा सकता है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के सलेम जिले के कमलापुरम हवाई अड्डे पर हवाई मार्ग से पहुँचने और वहाँ से सड़क मार्ग के जरिए मेट्टूर जाने की उम्मीद है। इसके बाद वह बाँध से पानी छोड़ने की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियाँ तेज कर दी हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारी,जिला प्रशासन और पुलिस कार्यक्रम को लेकर जरूरी व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। बाँध परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक तैयारियाँ भी की जा रही हैं। हालाँकि,अंतिम कार्यक्रम और पानी छोड़ने की प्रक्रिया को जलाशय के जलस्तर तथा उस समय की परिस्थितियों के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
मेट्टूर बाँध से छोड़ा जाने वाला पानी सलेम,नमक्कल,इरोड,करूर,तिरुचि और तंजावुर समेत कावेरी डेल्टा से जुड़े 13 जिलों की कृषि भूमि के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान कावेरी नदी और उससे जुड़े जल संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। बाँध से पानी छोड़े जाने के बाद नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया जाता है,जिससे धान और अन्य फसलों की सिंचाई में मदद मिलती है।
इस बार पानी छोड़ने में हुई देरी का सबसे ज्यादा असर कुरुवई धान की खेती पर पड़ने की आशंका है। कुरुवई धान कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है और इसकी खेती के लिए समय पर सिंचाई की जरूरत होती है। यदि पानी देर से मिलता है,तो किसानों को खेती का चक्र प्रभावित होने का डर रहता है। यही वजह है कि किसान लंबे समय से बाँध खोलने की माँग कर रहे हैं।
हालाँकि, बाँध में पानी की उपलब्धता कम होने पर सरकार के सामने भी चुनौती रही है। एक ओर किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना जरूरी है,वहीं दूसरी ओर जलाशय में पर्याप्त भंडार बनाए रखना भी आवश्यक है। आने वाले महीनों में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता को देखते हुए सरकार को जल प्रबंधन में संतुलन बनाना होगा।
अब जलस्तर 90 फीट के करीब पहुँचने और पानी की आवक जारी रहने से स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। यदि पानी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो 28 अगस्त को बाँध खोलने की संभावना और मजबूत हो सकती है। मुख्यमंत्री के संभावित दौरे से भी संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अब सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कावेरी डेल्टा के किसानों की निगाहें अब 28 अगस्त पर टिकी हैं। लंबे इंतजार के बाद यदि मेट्टूर बाँध से पानी छोड़ा जाता है,तो इससे खेती की गतिविधियों को गति मिल सकती है और कुरुवई धान की फसल के लिए किसानों को राहत मिल सकती है। हालाँकि,पानी छोड़ने का अंतिम फैसला जलाशय के जलस्तर और उपलब्ध पानी की स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा। फिलहाल बढ़ते जलस्तर और प्रशासनिक तैयारियों के बीच डेल्टा के किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके खेतों तक कावेरी का पानी पहुँचेगा।
