अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर,नेतृत्व को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं; बोले- परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे

वॉशिंगटन,1 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य ताकत पहले की तुलना में काफी कमजोर हो गई है और देश के भीतर नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता नजर नहीं आ रही है। ट्रंप के मुताबिक,ईरान के पास फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट नेता दिखाई नहीं देता,जो देश की सैन्य और राजनीतिक दिशा को प्रभावी ढंग से सँभाल रहा हो। हालाँकि,उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया और न ही किसी व्यक्ति या संगठन का नाम बताया,जिसे अमेरिका वर्तमान ईरानी नेतृत्व के रूप में देखता हो।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से ईरान में नेतृत्व को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि बातचीत रुकने और नए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की कमान किसके हाथ में है। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि संभव है कि ईरान को खुद भी यह पता न हो कि उसका नेता कौन है। उन्होंने कहा कि वहाँ कट्टरपंथी तत्व मौजूद हैं,लेकिन सैन्य स्तर पर ईरान को काफी नुकसान हुआ है और उसकी सेना पहले जैसी मजबूत नहीं रही।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो चुकी है। हालाँकि,इस संबंध में उन्होंने विस्तृत सैन्य आँकड़े या स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया। उनका बयान ऐसे समय में आया है,जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ चिंता का विषय बनी हुई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने ईरान को एक विफल राष्ट्र बताते हुए दावा किया कि वहाँ आर्थिक संकट गहरा चुका है। ट्रंप के अनुसार,ईरान में महँगाई बेहद ऊँचे स्तर पर है,उसकी मुद्रा कमजोर स्थिति में है और सैन्य कर्मियों को वेतन मिलने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कई नेता मारे जा चुके हैं और देश की सैन्य संरचना को भारी नुकसान पहुँचा है।

ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान की नौसेना और वायुसेना की स्थिति का जिक्र किया। उनका दावा था कि ईरान की नौसेना लगभग समाप्त हो चुकी है और उसकी वायुसेना की क्षमता भी बेहद सीमित रह गई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा हिस्सा भी नष्ट हो चुका है। हालाँकि,इन दावों को लेकर उन्होंने कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

जब ट्रंप से पूछा गया कि ईरान पर नए हमले सीमित सैन्य कार्रवाई हैं या फिर यह पूर्ण युद्ध की ओर वापसी का संकेत है,तो उन्होंने अभियान की अवधि या उसके संभावित दायरे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ईरान की किसी कार्रवाई का जवाब नहीं देगा। उन्होंने संकेत दिया कि आगे की परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका अपनी रणनीति तय करेगा।

ट्रंप ने बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थिति अमेरिका के नियंत्रण में है और अमेरिकी नौसेना व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में मदद कर रही है। उनके मुताबिक,हालात को सँभाला जा रहा है और पिछले दिन रात भी कई जहाज अमेरिकी नौसेना की सहायता से सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग से गुजर सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है। ट्रंप ने इसी संदर्भ में कहा कि हर रात औसतन करीब 30 जहाज इस मार्ग से गुजर रहे हैं और बड़ी मात्रा में तेल बाहर जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक,होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति जारी रहने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ीं,जितनी आशंका जताई जा रही थी। उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही जारी है और अमेरिका इस प्रक्रिया में सुरक्षा उपलब्ध कराने की भूमिका निभा रहा है। हालाँकि,इस दावे के व्यापक प्रभाव और समुद्री मार्ग की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आ सकते हैं।

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान के मुख्य उद्देश्य को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनके मुताबिक,मौजूदा संघर्ष का मूल मुद्दा यही है और इसे किसी अन्य विषय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और यह अमेरिका के साथ-साथ पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। ट्रंप ने आशंका जताई कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है,तो इससे इजरायल और पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इससे अमेरिका के लिए भी बड़ा जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। परमाणु हथियारों की संभावना को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताओं और ईरान के अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दावों के बीच यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मौजूदा सैन्य तनाव ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि कहीं स्थिति व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में न बदल जाए।

ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति से पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सैन्य अभियान कितने समय तक जारी रह सकता है या आगे अमेरिका किस स्तर की कार्रवाई करेगा। उनका कहना है कि परिस्थितियों के आधार पर आगे के कदम तय किए जाएँगे।

ईरान के नेतृत्व को लेकर ट्रंप का दावा भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि उन्होंने किसी विशिष्ट व्यक्ति को मौजूदा नेतृत्व के तौर पर स्वीकार नहीं किया। इससे यह सवाल उठता है कि अमेरिका ईरान के भीतर वर्तमान सत्ता संरचना को किस रूप में देखता है। ट्रंप ने केवल इतना कहा कि कट्टरपंथी तत्व अभी मौजूद हैं,लेकिन सैन्य स्तर पर ईरान की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है।

वहीं,ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर ट्रंप के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी। खास तौर पर सैन्य क्षमताओं के व्यापक नुकसान,नेतृत्व की स्थिति और आर्थिक आँकड़ों से जुड़े दावों को अलग-अलग स्रोतों से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता है। फिलहाल ये दावे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से दिए गए आकलन के रूप में सामने आए हैं।

कुल मिलाकर,ट्रंप के ताजा बयान से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली,अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को पहले की तुलना में काफी कमजोर मान रहा है। दूसरी, अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने पर जोर दे रहा है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अमेरिकी अभियान का मुख्य उद्देश्य बता रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया,क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। ट्रंप ने फिलहाल आगे की कार्रवाई को लेकर अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं,लेकिन उनके बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी संभावित खतरे को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।