नई दिल्ली,3 सितंबर (युआईटीवी)- राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में चल रही बदले की राजनीति अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तक पहुँच गई है। राघव चड्ढा का दावा है कि मोहाली में पंजीकृत उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में ‘शिफ्टेड’ यानी स्थानांतरित के तौर पर दर्ज किया गया है,जबकि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। उन्होंने इसे महज लिपिकीय गलती मानने से इनकार करते हुए राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया है।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वह पंजाब से राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनके नाम के सामने उन्हें ‘शिफ्टेड’ के रूप में चिह्नित किया गया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है,अंतिम सूची नहीं। उनके मुताबिक,दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की प्रक्रिया अभी चल रही है और इसी दौरान मतदाता सूची में आवश्यक सुधार किए जाते हैं। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ के तौर पर किसने चिह्नित किया और इस पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम का यह वर्गीकरण किसी एक स्तर पर हुई गलती नहीं है,बल्कि पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारियों की भूमिका रही है। उनका कहना है कि पहले स्तर पर नाम को चिह्नित करने वाला अधिकारी पंजाब सरकार की व्यवस्था से जुड़ा हुआ है,उसके बाद इसी वर्गीकरण का सत्यापन भी पंजाब सरकार के अधिकारी ने किया और उच्च स्तर पर इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में भी उसी प्रशासनिक तंत्र के अधिकारियों की भूमिका रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी पुनरीक्षण की जमीनी प्रक्रिया से लेकर उच्च प्रशासनिक स्तर तक पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल हैं। राघव चड्ढा के मुताबिक,बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ आम तौर पर पंजाब सरकार का एक कनिष्ठ कर्मचारी होता है। इसके ऊपर सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी एईआरओ, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ और जिला निर्वाचन अधिकारी यानी डीईओ जैसे अधिकारी आते हैं,जो भी राज्य प्रशासन से जुड़े होते हैं। सबसे ऊपर पंजाब कैडर का एक आईएएस अधिकारी पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के तौर पर कार्यरत है।
राघव चड्ढा ने इसी प्रशासनिक ढाँचे को आधार बनाते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में तैनात अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष राजनीतिक दबाव की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि चुनाव संबंधी ड्यूटी समाप्त होने के बाद इन अधिकारियों की सेवा संबंधी व्यवस्थाएँ,स्थानांतरण और पदस्थापन राज्य सरकार के प्रशासनिक ढाँचे से जुड़े होते हैं। उनके अनुसार,अधिकारियों को यह पता होता है कि किसके पास उनका तबादला करने या उनकी सेवा संबंधी परिस्थितियों को प्रभावित करने की शक्ति है। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि इसी वजह से आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार सरकारी अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाने और विरोधियों को निशाना बनाने का काम कर रही है।
राज्यसभा सदस्य ने अपने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है,तब से पार्टी नेतृत्व उनके प्रति नाराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने पंजाब पुलिस और राज्य की प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल उन लोगों के खिलाफ किया है,जिन्होंने चुप रहने के बजाय अपनी राजनीतिक असहमति जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार की ओर से निशाना बनाया गया है। राघव चड्ढा ने अपने नाम को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में ‘शिफ्टेड’ दिखाए जाने को इसी कथित राजनीतिक प्रतिशोध की ताजा कड़ी बताया।
राघव चड्ढा ने अपने आरोपों के समर्थन में भारत निर्वाचन आयोग की एसआईआर संबंधी गाइडलाइन का भी हवाला दिया। उन्होंने विशेष रूप से दिशानिर्देश के पैराग्राफ 4(डी) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें जनप्रतिनिधियों और कुछ विशिष्ट वर्गों के लोगों के लिए एक तरह की ‘सुरक्षित सूची’ का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार,इस श्रेणी में न्यायपालिका के सदस्य,सांसद,विधायक, घोषित पदों पर आसीन लोग और कला, संस्कृति,पत्रकारिता, खेल तथा सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे लोगों के नाम,जो पहले से मतदाता डेटाबेस में चिह्नित हैं,ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने चाहिए,ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें। उनका कहना है कि इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे जनप्रतिनिधियों और अन्य महत्वपूर्ण श्रेणियों के लोगों के नामों को प्रक्रिया के दौरान उचित तरीके से सुरक्षित रखना और किसी तरह की अनावश्यक समस्या से बचाना है।
राघव चड्ढा ने दावा किया कि वह पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हैं,इसलिए यदि उनके नाम को किसी कारण से पुनरीक्षण के दौरान चिह्नित भी किया गया था,तब भी एसआईआर के पैराग्राफ 4(डी) के तहत उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में केवल निर्देश की अनदेखी नहीं हुई, बल्कि जानबूझकर उसका उल्लंघन किया गया। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि वर्तमान सूची अंतिम नहीं है और दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान इसमें सुधार संभव है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम को ‘शिफ्टेड’ दिखाए जाने का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है। किसी मतदाता को स्थानांतरित दिखाए जाने का अर्थ यह हो सकता है कि संबंधित मतदाता अब उस पते पर निवास नहीं करता,जिसके आधार पर उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। ऐसी स्थिति में नाम को लेकर आपत्ति या सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। राघव चड्ढा का कहना है कि उनके मामले में उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत होने के बावजूद उन्हें स्थानांतरित दिखाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने इस मामले को केवल अपने व्यक्तिगत मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ा विषय नहीं माना, बल्कि इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि अगर एक मौजूदा राज्यसभा सदस्य के नाम को इस तरह गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है,तो आम मतदाताओं के नामों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। हालाँकि,राघव चड्ढा के आरोप राजनीतिक हैं और उनके बयान में पंजाब सरकार तथा आम आदमी पार्टी पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की गई है।
राघव चड्ढा ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि वह इस मामले को उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया के जरिए ठीक कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह एसआईआर दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं और दावे तथा आपत्तियों की प्रक्रिया में अपने नाम को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि अभी इस मामले में अंतिम स्थिति अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि क्या राघव चड्ढा का नाम वास्तव में प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से ‘शिफ्टेड’ श्रेणी में गया या इसके पीछे किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप था। राघव चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले का स्पष्ट मामला बताया है,लेकिन उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर सामने नहीं आई है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ प्रशासनिक तंत्र के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार चलाने वाली आम आदमी पार्टी को चुनावी व्यवस्था पर राजनीतिक स्वामित्व का अधिकार नहीं है। उन्होंने अपने बयान के अंत में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी भले ही पंजाब की सरकार चला रही हो,लेकिन पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उसकी निजी संपत्ति नहीं है।
राघव चड्ढा के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ राघव चड्ढा इसे राजनीतिक प्रतिशोध और प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग से जोड़ रहे हैं,वहीं दूसरी ओर इस मामले का अंतिम निष्कर्ष दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने तथा अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल राघव चड्ढा ने अपने नाम को ‘शिफ्टेड’ श्रेणी में दर्ज किए जाने पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है।
