वॉशिंगटन,4 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक तेहरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और उन्हें निशाना बनाने की कार्रवाई बंद नहीं करता,तब तक अमेरिका उसके साथ किसी तरह की बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में वॉशिंगटन का प्रमुख उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना और ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने के लिए आवश्यक संसाधन हासिल करने से रोकना है।
व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान से तब तक बातचीत नहीं करेगा,जब तक वह वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी बंद नहीं करता। वेंस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं।
वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने मौजूदा अभियानों को खत्म करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किस तरह का व्यवहार करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कोई समयसीमा तय नहीं करेगा,क्योंकि जब तक ईरान तेल और गैस ले जाने वाले वाणिज्यिक जहाजों को धमकाता रहेगा,तब तक किसी अभियान की समाप्ति की तारीख बताना गैर-जिम्मेदाराना होगा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने मौजूदा स्थिति को लगातार जारी युद्ध के रूप में पेश किए जाने वाली बातों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस समय बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई नहीं चल रही है। उनके मुताबिक,फिलहाल अमेरिका का मुख्य ध्यान होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने पर है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहाँ किसी भी तरह की बड़ी बाधा का असर दुनिया के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
वेंस ने ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा कि तेहरान की इच्छा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से एक भी बैरल तेल बाहर न जा सके। हालाँकि,उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद बड़ी मात्रा में तेल इस मार्ग से बाहर जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली रात करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर निकला और यह अमेरिका की कार्रवाई के कारण संभव हो सका। उनके अनुसार, दुनिया में व्यापक ऊर्जा संकट पैदा नहीं होने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि अमेरिका वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दावा किया कि फिलहाल कोई दूसरा देश इस स्तर पर वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की सुरक्षा को अपनी मौजूदा रणनीति का प्रमुख हिस्सा मान रहा है। अमेरिका का कहना है कि तेल और गैस की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है और इसका प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अमेरिकी रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन के दबाव अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता को नष्ट किए जाने के बाद अमेरिका की प्राथमिकताओं में यह भी शामिल है कि तेहरान उस क्षमता को दोबारा विकसित न कर सके।
उन्होंने कहा कि अब तक अमेरिका ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने की कोशिश करते हुए नहीं देखा है। हालाँकि,अमेरिकी प्रशासन इस संभावना को लेकर सतर्क है। वेंस के मुताबिक,ईरान की परमाणु क्षमता को दोबारा विकसित होने से रोकना मौजूदा अमेरिकी दबाव अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमेरिका की आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी विकल्प बंद नहीं किया गया है। आर्थिक दबाव,सैन्य दबाव, कूटनीतिक दबाव और गुप्त दबाव समेत सभी विकल्प अमेरिकी प्रशासन की मेज पर हैं। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इनमें से किन विकल्पों का इस्तेमाल किस स्तर पर या किस समय किया जा सकता है।
वेंस से यह भी सवाल किया गया कि क्या अमेरिकी प्रशासन ईरान में सक्रिय असंतुष्ट समूहों को हथियार देने पर विचार कर रहा है। उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। हालाँकि,उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प मौजूद हैं और प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार फैसला कर सकता है। इस बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका अपनी रणनीति को किसी एक विकल्प तक सीमित नहीं रखना चाहता।
अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। वेंस ने कहा कि चीन ने ईरान से जुड़े कुछ अमेरिकी अनुरोधों पर प्रतिक्रिया दी है। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को मिलने वाली वित्तीय सेवाओं पर रोक लगाने के मुद्दे पर सीधे चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग से बातचीत की है या नहीं।
वेंस ने चीन के रवैये की तुलना ईरान के व्यवहार से करते हुए कहा कि उनका मानना है कि चीन इस मामले में सहयोग करने को तैयार है। उन्होंने हालाँकि,यह भी स्पष्ट किया कि चीन ने अमेरिका की हर माँग को स्वीकार नहीं किया है। इसके बावजूद उनके मुताबिक, चीन ने ईरान की तुलना में कहीं अधिक जिम्मेदाराना रवैया अपनाया है। अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक मतभेदों के बावजूद ईरान के मुद्दे पर सहयोग की संभावना को ट्रंप प्रशासन अहम मान रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी बताया कि कई अन्य देश ईरान पर दबाव बढ़ाने के अमेरिकी प्रयास में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने तुर्किये, अजरबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर का नाम लेते हुए कहा कि ये देश अलग-अलग तरीकों से दबाव बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कुछ देश सार्वजनिक रूप से अपनी भूमिका का उल्लेख नहीं कर रहे हैं,लेकिन निजी स्तर पर अमेरिका के साथ सहयोग कर रहे हैं।
वेंस के अनुसार, अमेरिकी दबाव अभियान के दो प्रमुख लक्ष्य हैं। पहला लक्ष्य वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है,ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस समेत अन्य आवश्यक सामान की आवाजाही जारी रह सके। दूसरा लक्ष्य ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन हासिल करने से रोकना है। अमेरिका इन दोनों उद्देश्यों को अपनी मौजूदा रणनीति का केंद्रीय हिस्सा मान रहा है।
वेंस का यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर अमेरिका समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है,वहीं दूसरी ओर ईरान पर सैन्य,आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने का संकेत भी दे रहा है। बातचीत का रास्ता फिलहाल ईरान के व्यवहार से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। जब तक ईरान अपने रुख में बदलाव नहीं करता और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की स्थिति समाप्त नहीं होती,तब तक अमेरिका बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियाँ और अमेरिका की प्रतिक्रिया दोनों ही क्षेत्रीय तनाव के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।
