कीव,4 सितंबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूक्रेन के अपने दौरे का समापन कीव स्थित नेशनल बॉटनिकल गार्डन में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करके किया। विदेश मंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों और उनके शांति संदेश को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन दुनिया को अंतहीन युद्ध से निकलकर युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत का संदेश देता है। जयशंकर के यूक्रेन दौरे के दौरान भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि कीव के नेशनल बॉटनिकल गार्डन में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर उन्होंने अपने दौरे का समापन किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन और उनका संदेश इस आवश्यकता को रेखांकित करता है कि दुनिया को अंतहीन युद्ध की स्थिति से आगे बढ़कर युद्ध के अंत की दिशा में प्रयास करना चाहिए। विदेश मंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है,जब रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
अपने दौरे के अंतिम दिन जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके अलावा क्षेत्र में जारी संघर्ष और उसे समाप्त करने के संभावित उपाय भी बातचीत का प्रमुख विषय रहे। जयशंकर ने बताया कि उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के साथ हुई चर्चाओं से भी राष्ट्रपति जेलेंस्की को अवगत कराया।
राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा के साथ द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने को लेकर हुई चर्चाओं की जानकारी उन्होंने जेलेंस्की को दी। जयशंकर के मुताबिक,दोनों नेताओं के बीच बातचीत मुख्य रूप से जारी संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों पर केंद्रित रही।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी जयशंकर के साथ हुई बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की,जिसमें काला सागर की स्थिति भी शामिल रही। जेलेंस्की ने भारत की उस इच्छा के लिए आभार जताया,जिसके तहत वह यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में प्रयासों का समर्थन करता है।
जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध बताते हुए कहा कि इसे समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध का समय नहीं होना चाहिए और शांति की आवश्यकता है। जेलेंस्की के मुताबिक,युद्ध को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट है और वह शांति की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। उन्होंने भारत के साथ बातचीत को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने जयशंकर के कीव दौरे के दौरान रूस की ओर से किए गए ड्रोन हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जब भारतीय विदेश मंत्री कीव में मौजूद थे, उस समय रूस ने एक बार फिर जेट-संचालित शाहेद ड्रोन लॉन्च किए। जेलेंस्की ने कहा कि ऐसे ड्रोन ईरान की सहायता के बिना नहीं बनाए जा सकते थे। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने अधिकांश ऐसे ड्रोन को मार गिराया और इसी वजह से भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को उम्मीद है कि दुनिया के अन्य मजबूत देश भी युद्ध को समाप्त करने और विश्वसनीय शांति स्थापित करने की आवश्यकता को लेकर स्पष्ट रुख अपनाएँगे। उनके बयान से स्पष्ट है कि यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय समुदाय से युद्ध को समाप्त करने के लिए और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा कर रहा है।
जयशंकर का यूक्रेन दौरा भारत की उस कूटनीतिक नीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जिसमें भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष का समाधान निकालने पर जोर देता रहा है। भारत ने विभिन्न मौकों पर कहा है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से ही संभव है। जयशंकर की यूक्रेन यात्रा में भी द्विपक्षीय संबंधों के साथ शांति और संघर्ष समाप्त करने का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर जयशंकर ने अपने दौरे का समापन जिस संदेश के साथ किया,वह भी भारत की शांति और संवाद की व्यापक सोच को रेखांकित करता है। गांधी का अहिंसा और शांति का दर्शन दुनिया भर में संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रेरणा रहा है। कीव में उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि के दौरान जयशंकर ने इसी विरासत को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए युद्ध को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत और यूक्रेन के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी जयशंकर का दौरा अहम रहा। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्कों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं,रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण पैदा हुई क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जयशंकर और जेलेंस्की की बैठक से यह संकेत मिला कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ युद्ध की स्थिति और शांति की संभावनाओं पर भी संवाद जारी रखना चाहते हैं। काला सागर की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा ने बैठक के रणनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया। वहीं,कीव में रहते हुए ड्रोन हमलों का जेलेंस्की द्वारा किया गया उल्लेख बताता है कि युद्ध की परिस्थितियां अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई हैं।
ऐसे समय में जयशंकर का महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने गांधी के संदेश के माध्यम से यह रेखांकित किया कि दुनिया को अंतहीन संघर्ष से बाहर निकलकर स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। भारत की कूटनीतिक कोशिशों में संवाद,शांति और समाधान पर जोर जारी रहने के संकेत जयशंकर के इस दौरे के दौरान भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
