डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

ईरान से टकराव को ट्रंप ने बताया ‘सैन्य संघर्ष’, बोले- अमेरिका का होर्मुज पर मजबूत नियंत्रण

वॉशिंगटन,5 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के टकराव को पूर्ण युद्ध मानने से इनकार किया है। उन्होंने इसे रुक-रुक कर होने वाला ‘सैन्य संघर्ष’ बताया और कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार लड़ाई नहीं चल रही है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब ईरान पर अमेरिकी हमलों और जवाबी कार्रवाई को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की ओर से इस टकराव को ‘युद्ध’ मानने से इनकार किए जाने पर सवाल पूछे जाने के बाद ट्रंप ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बहुत से लोग इस घटनाक्रम को युद्ध नहीं कहते और वह खुद भी इसे सैन्य टकराव कहना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक,अमेरिका के लिए यह कोई बहुत बड़ी घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच होने वाली कार्रवाई लगातार चलने वाली लड़ाई नहीं है,बल्कि बीच-बीच में हमले होते हैं और फिर स्थिति शांत हो जाती है। ट्रंप ने इस टकराव को ‘रुक-रुक कर होने वाली घटना’ बताते हुए कहा कि फिलहाल कोई लड़ाई नहीं चल रही है।

हालाँकि,इस सैन्य टकराव में अमेरिकी सैनिकों की मौत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने बताया कि अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की जान गई है। पत्रकारों द्वारा यह सवाल उठाए जाने पर कि अमेरिकी सैनिकों की मौत के बावजूद इसे छोटी या सीमित घटना कैसे कहा जा सकता है,ट्रंप ने अपने अभियान का बचाव किया। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका के पिछले लंबे युद्धों से करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ मौजूदा अभियान की तुलना वियतनाम या अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों से नहीं की जा सकती।

ट्रंप ने अपने सैन्य अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा और अमेरिका ने उसे ऐसा करने से रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मुद्दे को अपने सैन्य अभियान के प्रमुख औचित्य के तौर पर पेश किया और संकेत दिया कि ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर अमेरिका आगे भी बेहद सतर्क रहेगा।

उन्होंने ईरान में स्थित ‘पिकएक्स’ नामक जगह को लेकर भी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि यदि वहां दोबारा किसी तरह की गतिविधि दिखाई देती है,तो अमेरिका उस स्थान पर फिर से हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और यदि उसे कुछ गलत दिखाई देता है तो वह जवाबी कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका जोरदार हमला कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कई महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को नष्ट कर दिया है। इनमें रडार,विमान और अन्य उपकरण शामिल हैं। ट्रंप के अनुसार,अमेरिकी सैन्य बलों ने इस रणनीतिक जलमार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए माइनस्वीपर्स का इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की खेपों का आवागमन जारी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने बेहद महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिका का नियंत्रण है और यह नियंत्रण बेहद मजबूत है। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है,क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और ऊर्जा संसाधनों के परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वहाँ से होने वाले ऊर्जा परिवहन को लेकर वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ जाती है।

ट्रंप ने अपने सैन्य अभियान की स्थिति का वर्णन करते हुए यह भी कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर कब्जा कर लिया और वास्तव में ईरान पर भी कब्जा कर लिया है। उनके इस बयान का संदर्भ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के व्यापक प्रभाव से था। उन्होंने दावा किया कि हालिया अमेरिकी हमलों के बाद कई दिनों से कोई गोलीबारी नहीं हुई है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की क्षमता को काफी नुकसान पहुँचाया है और यदि अमेरिका तुरंत अपना अभियान समाप्त भी कर दे,तो ईरान को दोबारा मजबूती हासिल करने में लगभग 25 साल लग सकते हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि मौजूदा स्थिति जल्द खत्म हो जाए,ताकि भविष्य में अमेरिका के अगले राष्ट्रपति को इस संकट की चिंता न करनी पड़े। हालाँकि,उन्होंने ईरान के साथ सैन्य टकराव समाप्त करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिकी सैन्य अभियान कितने समय तक जारी रह सकता है और किन परिस्थितियों में वॉशिंगटन इसे समाप्त करने का फैसला करेगा।

ईरान के साथ चीन के संबंधों और इस संघर्ष में बीजिंग की संभावित भूमिका को लेकर भी ट्रंप से सवाल किए गए। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का अनुरोध किया था। ट्रंप के मुताबिक,चीन इस टकराव में वास्तव में शामिल नहीं है और उसकी भागीदारी बेहद सीमित है। उन्होंने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप न करें।

ट्रंप ने चीन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन को इस समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति मिलती है। हालाँकि,अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि बदलते ऊर्जा ढाँचे के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले जैसी नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मध्य पूर्व में नई पाइपलाइनों का निर्माण हो रहा है,जिससे ऊर्जा परिवहन के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हो रहे हैं।

ट्रंप ने सीरिया से होकर जाने वाले जमीनी रास्तों का भी उल्लेख किया और कहा कि पाइपलाइन तथा अन्य वैकल्पिक मार्ग रणनीतिक जलमार्ग पर निर्भरता को कम कर सकते हैं। उनके अनुसार,होर्मुज जलडमरूमध्य अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था,क्योंकि ऊर्जा परिवहन के लिए दूसरे विकल्प विकसित किए जा रहे हैं। हालाँकि, जलडमरूमध्य की वास्तविक रणनीतिक और वैश्विक ऊर्जा भूमिका को देखते हुए इस दावे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन हो सकते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव को लेकर ट्रंप की भाषा में एक तरफ सैन्य कार्रवाई की गंभीरता को सीमित करके पेश करने की कोशिश दिखाई देती है,वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ईरान को भविष्य में और हमलों की चेतावनी भी दी है। एक ओर वह इसे पूर्ण युद्ध नहीं मान रहे हैं,तो दूसरी ओर ईरान की सैन्य क्षमताओं और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपना रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस्तेमाल की जा रही भाषा भी महत्वपूर्ण हो गई है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस पहले ही इस टकराव को युद्ध कहने से बचते रहे हैं। अब ट्रंप ने भी इसे सैन्य संघर्ष का नाम दिया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल सैन्य कार्रवाई को पारंपरिक अर्थों में युद्ध के रूप में परिभाषित नहीं करना चाहता। इसके पीछे राजनीतिक,कानूनी और रणनीतिक कारणों की भूमिका हो सकती है।

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। यदि अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि ईरान फिर से उन सैन्य या परमाणु क्षमताओं को विकसित करने की कोशिश कर रहा है,जिन्हें अमेरिका ने नष्ट करने का दावा किया है,तो आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी। इस स्थिति में दोनों देशों के बीच तनाव कभी भी दोबारा बढ़ सकता है।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है और यहाँ किसी भी सैन्य गतिविधि का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आयात पर निर्भर देशों,ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए भी इस समुद्री मार्ग की स्थिरता महत्वपूर्ण है।

ट्रंप के मुताबिक,अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचाया है और फिलहाल ईरान की ओर से बड़े पैमाने पर जवाबी हमला नहीं हो रहा है,लेकिन उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका किसी भी नई गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करेगा। यदि ईरान दोबारा ऐसी गतिविधि करता है,जिसे वॉशिंगटन खतरे के रूप में देखता है, तो अमेरिका फिर से हमला कर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में भविष्य की रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह चाहते हैं कि यह स्थिति जल्द समाप्त हो,लेकिन साथ ही ईरान की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने की नीति जारी रखने का संकेत दिया। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव स्थायी रूप से कम होगा या आने वाले दिनों में फिर से सैन्य कार्रवाई का दौर शुरू हो सकता है।

फिलहाल ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ टकराव को ‘युद्ध’ के बजाय ‘सैन्य संघर्ष’ के रूप में पेश कर रहा है। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोक दिया है,उसकी सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुँचाया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मजबूत नियंत्रण स्थापित किया है। वहीं,आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी तथा कार्रवाई को किस दिशा में ले जाता है। आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य,ईरान की परमाणु गतिविधियाँ और अमेरिका-चीन के बीच इस मुद्दे पर संपर्क इस पूरे संकट के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में बने रहेंगे।