एयर इंडिया

फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक घटी ऊँचाई,एयर इंडिया ने पायलट को नौकरी से निकाला,ड्रग टेस्ट आया था पॉजिटिव

नई दिल्ली,5 सितंबर (युआईटीवी)- एयर इंडिया ने 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान में अचानक ऊँचाई कम होने की घटना को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। एयरलाइन ने उड़ान के पायलट-इन-कमांड को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। रिपोर्ट में मुख्य पायलट के साइकोएक्टिव पदार्थ से जुड़े ड्रग टेस्ट के नॉन-नेगेटिव पाए जाने और उड़ान के दौरान विमान की अचानक ऊँचाई कम होने की घटना को गंभीर चिंता का विषय बताया गया था।

एयर इंडिया ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पायलट के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी दी। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि उसके लिए यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी ने कहा कि फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड की जाँच में एक साइकोएक्टिव पदार्थ पाया गया। सुरक्षा,फिटनेस और नियमों के उल्लंघन के मामलों में एयर इंडिया की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत पायलट को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है।

यह मामला 4 अगस्त को संचालित फुकेत-दिल्ली उड़ान एआई-2379 से जुड़ा है। उड़ान में कुल 145 लोग सवार थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू सदस्य और दो पायलट शामिल थे। उड़ान के दौरान विमान ने अचानक ऊँचाई खो दी,जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के कुछ सदस्यों को चोटें आईं। घटना में कम-से-कम 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद विमान की सुरक्षा और चालक दल की फिटनेस से जुड़े कई सवाल उठे थे।

विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली पहुँचने के बाद विमान में मौजूद दोनों क्रू सदस्यों की उड़ान के बाद मेडिकल स्क्रीनिंग की गई। दोनों के ब्रेथलाइजर टेस्ट के परिणाम संतोषजनक पाए गए। हालाँकि,साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों का पता लगाने के लिए किए गए परीक्षण में पायलट-इन-कमांड का सैंपल नॉन-नेगेटिव पाया गया। वहीं,सह-पायलट का सैंपल नेगेटिव रहा।

प्रारंभिक जाँच में पायलट के सैंपल के नॉन-नेगेटिव पाए जाने के बाद मामले को और गंभीरता से लिया गया। पुष्टि के लिए दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों के रक्त के नमूने पैथोलॉजिकल लैब भेजे गए। जाँच रिपोर्ट के अनुसार,पायलट-इन-कमांड के कन्फर्मेशन टेस्ट का परिणाम भी नॉन-नेगेटिव आया,जबकि सह-पायलट के नमूने का परिणाम दोनों परीक्षणों में नेगेटिव रहा।

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उड़ान के दौरान विमान की ऊँचाई में अचानक कमी और पायलट के ड्रग टेस्ट के परिणाम को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने नागर विमानन महानिदेशालय से इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की माँग की है। हालाँकि,मामले की तकनीकी और अन्य पहलुओं से जुड़ी विस्तृत जाँच अभी जारी है। इसलिए घटना के सभी कारणों और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

एयर इंडिया की ओर से पायलट को तत्काल नौकरी से हटाने का फैसला विमानन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विमान उड़ाते समय पायलट की मानसिक और शारीरिक फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थ का सेवन उड़ान संचालन के दौरान पायलट की निर्णय लेने की क्षमता,प्रतिक्रिया समय और सतर्कता को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण विमानन क्षेत्र में चालक दल के सदस्यों की नियमित मेडिकल और ड्रग जाँच को सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।

इस घटना ने विमानन क्षेत्र में चालक दल की फिटनेस और नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एयर इंडिया ने अपने रुख से स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। एयरलाइन ने कहा है कि वह सुरक्षा को लेकर अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति पर कायम है।

फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उड़ान के दौरान विमान की ऊँचाई अचानक कम होने से यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो सकती है। विमान में बड़ी संख्या में लोग सवार थे और घटना के बाद कई यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं। ऐसे में जाँच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि विमान ने अचानक ऊँचाई क्यों खोई और इस दौरान कॉकपिट में क्या परिस्थितियाँ थीं।

जाँच ब्यूरो की रिपोर्ट ने पायलट के ड्रग टेस्ट को इस घटना के प्रमुख गंभीर पहलुओं में शामिल किया है। हालाँकि,पायलट के सैंपल के नॉन-नेगेटिव पाए जाने और विमान की ऊँचाई में कमी के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करना अभी जाँच का विषय है। विस्तृत तकनीकी जाँच में विमान की प्रणालियों,उड़ान के दौरान कॉकपिट संचालन, मौसम की स्थिति,चालक दल की कार्रवाई और अन्य संभावित कारणों की भी जाँच की जा रही है।

एयर इंडिया की कार्रवाई ऐसे समय हुई है,जब विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और चालक दल की फिटनेस पर लगातार जोर दिया जा रहा है। एयरलाइन कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विमान संचालन में शामिल पायलट सभी निर्धारित स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का पालन करें। किसी भी तरह के नियम उल्लंघन की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कदम उठाना विमानन सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

इस मामले में सह-पायलट के दोनों परीक्षणों का नेगेटिव आना भी जाँच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे जाँचकर्ताओं को चालक दल के दोनों सदस्यों की भूमिका और घटना के दौरान उनकी गतिविधियों का अलग-अलग आकलन करने में मदद मिलेगी। वहीं, मुख्य पायलट के नॉन-नेगेटिव परिणाम की पुष्टि होने के बाद एयर इंडिया ने उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है।

नागर विमानन महानिदेशालय से भी इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की माँग की गई है। इसका अर्थ है कि केवल एयरलाइन स्तर पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहेगा,बल्कि नियामकीय स्तर पर भी इसकी समीक्षा की जा सकती है। विस्तृत जाँच के परिणाम के आधार पर पायलट के खिलाफ आगे की कार्रवाई और विमानन सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त कदमों का फैसला हो सकता है।

फिलहाल इस घटना की तकनीकी जाँच जारी है और विमान की अचानक ऊँचाई कम होने के पीछे वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है। जाँच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि घटना में पायलट की स्थिति की क्या भूमिका थी और विमान की उड़ान के दौरान कौन-कौन से तकनीकी या मानवीय कारक जिम्मेदार थे।

एयर इंडिया ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पायलट-इन-कमांड की तत्काल बर्खास्तगी कंपनी की जीरो-टॉलरेंस नीति के अनुरूप की गई कार्रवाई है। अब सभी की नजरें विस्तृत जाँच के अंतिम निष्कर्षों पर हैं,जिनसे यह पता चलेगा कि फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक ऊँचाई कम होने की घटना के पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विमानन क्षेत्र में कौन से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।