कीव में जेलेंस्की से मिले अमेरिकी दूत (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

कीव में जेलेंस्की से मिले अमेरिकी दूत,रूस-यूक्रेन वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद तेज

कीव,7 सितंबर (युआईटीवी)- यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है,जब अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत का रास्ता फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है। बैठक के बाद जेलेंस्की ने अमेरिकी दूतों के साथ हुई बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण और सार्थक बताया।

जेलेंस्की ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष से संबंधित वार्ताओं को दोबारा शुरू करने,यूक्रेन की सुरक्षा और आर्थिक गारंटी तथा आने वाली सर्दियों के लिए सहायता पैकेज सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि यूक्रेन इस समय अपनी सुरक्षा व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अमेरिकी मदद की उम्मीद कर रहा है। रूस के साथ संघर्ष के बीच सर्दियों के दौरान ऊर्जा ढांचे और नागरिकों की सुरक्षा यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन विशेष रूप से हवाई सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी सहायता की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने अमेरिकी एलएनजी की पर्याप्त मात्रा और उसके इस्तेमाल की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। यूक्रेन लंबे समय से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और रूसी हमलों के कारण ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को होने वाले नुकसान ने इस आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में अमेरिकी ऊर्जा सहायता को कीव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक,बातचीत के तीसरे दौर में ब्रिटेन,फ्रांस और जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष के संभावित समाधान, सुरक्षा व्यवस्था और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर विचार-विमर्श किया गया। जेलेंस्की ने बताया कि बैठक में शामिल सभी पक्ष भविष्य में भी बातचीत जारी रखने के लिए दोबारा मिलने पर सहमत हुए हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि संघर्ष के समाधान के लिए बहुपक्षीय कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन,अमेरिका और रूस के बीच त्रिपक्षीय वार्ता को फिर से शुरू करने के प्रयास जारी हैं। उनका कहना है कि इस तरह की बातचीत का उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए व्यावहारिक रास्ता तलाशना है। हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अगली त्रिपक्षीय बैठक कब और किस स्थान पर होगी। इसके बावजूद अमेरिकी दूतों की मॉस्को और कीव दोनों यात्राओं को वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने भी कीव में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वार्ता की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि दोनों अमेरिकी शांति दूतों ने मॉस्को में हुई बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण प्रगति की है। विटकॉफ ने उम्मीद जताई कि रूस,अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की घोषणा जल्द की जा सकती है। उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय से तीनों देशों के बीच सीधी त्रिपक्षीय बातचीत की प्रक्रिया ठप पड़ी हुई थी।

विटकॉफ और कुशनर की कीव यात्रा मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात के तुरंत बाद हुई। दोनों अमेरिकी दूत रविवार को मॉस्को पहुँचे थे,जहाँ उन्होंने पुतिन के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। मॉस्को से निकलने के बाद दोनों पहली बार यूक्रेन पहुँचे और जेलेंस्की से मुलाकात की। इस क्रम को अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले यूक्रेन,अमेरिका और रूस के प्रतिनिधिमंडलों के बीच दो दौर की त्रिपक्षीय वार्ता अबू धाबी में हुई थी। पहला दौर 23 और 24 जनवरी को तथा दूसरा दौर 4 और 5 फरवरी को आयोजित किया गया था। इसके बाद 17 और 18 फरवरी को जिनेवा में भी एक और दौर की बातचीत हुई थी। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के संभावित रास्ते तलाशना और दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की सहमति की संभावनाओं पर चर्चा करना था। हालाँकि,बाद में त्रिपक्षीय बातचीत रुक गई और प्रक्रिया स्थगित हो गई।

अब अमेरिकी दूतों की सक्रियता से एक बार फिर इन वार्ताओं के पुनर्जीवित होने की संभावना दिखाई दे रही है। अमेरिका एक ओर मॉस्को में रूसी नेतृत्व के साथ बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कीव में यूक्रेनी नेतृत्व के साथ चर्चा कर रहा है। दोनों पक्षों की चिंताओं को समझने और किसी साझा आधार तक पहुँचने की कोशिश के तौर पर इन बैठकों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मॉस्को में हुई बातचीत को लेकर क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी दूतों के साथ बेहद खुली,रचनात्मक और गंभीर बातचीत की। उशाकोव के मुताबिक,दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर औपचारिक कार्य बैठक में चर्चा हुई। इसके बाद रात्रिभोज के दौरान भी अनौपचारिक बातचीत जारी रही। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद के लिहाज से उपयोगी बताया।

उशाकोव के अनुसार,राष्ट्रपति पुतिन ने दोहराया कि रूस यूक्रेन से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है। हालाँकि,रूसी पक्ष ने बातचीत के दौरान अपने रुख और युद्ध से जुड़े अपने आकलन को भी स्पष्ट रूप से अमेरिकी प्रतिनिधियों के सामने रखा। उशाकोव ने कहा कि रूस ने विशेष सैन्य अभियान के दौरान बन रही स्थिति का विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया।

रूसी अधिकारी के मुताबिक,बातचीत में विशेष रूप से युद्ध क्षेत्र में रूसी सेना की प्रगति का उल्लेख किया गया। रूस ने यह विश्वास भी जताया कि वह अपने निर्धारित उद्देश्यों को हासिल करेगा। साथ ही रूसी पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संभावित समाधान के लिए संघर्ष के मूल कारणों को समाप्त करना जरूरी होगा। इससे स्पष्ट है कि रूस और यूक्रेन के बीच संभावित समझौते को लेकर दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में अभी भी महत्वपूर्ण अंतर मौजूद हैं।

मॉस्को में हुई बातचीत केवल यूक्रेन संकट तक सीमित नहीं रही। उशाकोव ने बताया कि बैठक में आर्थिक मुद्दों और रूस तथा अमेरिका के बीच बड़े पैमाने पर संभावित आपसी लाभ वाली परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। रूस की ओर से इस बातचीत को दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बताया गया। उनके मुताबिक,बैठक सही समय पर हुई और रूस तथा अमेरिका दोनों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई।

वहीं,यूक्रेन की ओर से सुरक्षा गारंटी पर जोर दिया जा रहा है। कीव चाहता है कि भविष्य में किसी भी संभावित समझौते के साथ उसकी सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन भी मिले। यूक्रेन के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह संघर्ष समाप्त होने के बाद भी भविष्य में संभावित रूसी सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंतित है। इसी कारण शांति वार्ता के साथ सुरक्षा गारंटी का सवाल भी प्रमुख बना हुआ है।

आर्थिक गारंटी और पुनर्निर्माण भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे संघर्ष के कारण यूक्रेन के बुनियादी ढाँचे और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में युद्ध समाप्त होने के बाद पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होगी। अमेरिकी और यूरोपीय सहायता यूक्रेन की मौजूदा जरूरतों के साथ-साथ भविष्य के पुनर्निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल अमेरिकी दूतों की मॉस्को और कीव यात्राओं के बाद कूटनीतिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं। हालाँकि,रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी अंतिम समझौते तक पहुँचना अभी भी चुनौतीपूर्ण है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय नियंत्रण,सुरक्षा गारंटी और संघर्ष के मूल कारणों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इसके बावजूद बातचीत के दरवाजे दोबारा खोलने की कोशिशें जारी हैं।

कीव में जेलेंस्की और अमेरिकी दूतों की बैठक तथा मॉस्को में पुतिन के साथ हुई बातचीत से यह संकेत जरूर मिला है कि अमेरिका दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल करने के प्रयासों को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है। यदि रूस,अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता फिर शुरू होती है,तो यह लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में तीनों देशों के बीच अगली बैठक को लेकर क्या घोषणा होती है और क्या कूटनीतिक प्रयास किसी ठोस परिणाम तक पहुँच पाते हैं।