नई दिल्ली,7 सितंबर (युआईटीवी)- दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन टेस्ट में मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम में बड़े बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थीं,लेकिन चयनकर्ताओं ने अनुभवी खिलाड़ियों पर अपना भरोसा कायम रखा है। टीम में सबसे ज्यादा चर्चा मार्नस लाबुशेन को बरकरार रखे जाने की हो रही है। टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे लाबुशेन को एक और मौका दिया गया है।
बांग्लादेश के खिलाफ खेली गई टेस्ट सीरीज में लाबुशेन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। उन्होंने तीन पारियों में कुल 36 रन ही बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से आखिरी शतक करीब तीन साल पहले आया था। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम से बाहर नहीं किया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लाबुशेन से एक बार फिर बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई टीम में उनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि चयनकर्ता उनके अनुभव और क्षमता पर अभी भी विश्वास कर रहे हैं।
इस दौरे पर ऑस्ट्रेलिया की टीम के लिए इतिहास का एक खास पहलू भी जुड़ा हुआ है। साल 2018 में हुए चर्चित गेंद से छेड़छाड़ विवाद के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली बार दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज खेलने जा रही है। उस विवाद के बाद दोनों टीमों के बीच क्रिकेट संबंधों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस बार ऑस्ट्रेलियाई टीम में उस दौर के केवल पाँच खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें मिचेल स्टार्क,पैट कमिंस, जोश हेजलवुड, स्टीव स्मिथ और मैट रेंशॉ का नाम शामिल है।
टीम में कूपर कोनोली की वापसी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोनोली ने फरवरी 2025 में श्रीलंका के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। अब उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के लिए फिर से टीम में शामिल किया गया है। घरेलू क्रिकेट और सीमित ओवरों के प्रारूप में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके कोनोली को टीम में एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। उनके चयन से ऑस्ट्रेलिया के पास बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी एक उपयोगी विकल्प मौजूद रहेगा।
चयनकर्ताओं ने मैथ्यू कुनेमैन और माइकल नेसर को भी टीम में जगह दी है। कुनेमैन ऑस्ट्रेलिया के लिए बाएँ हाथ के स्पिन गेंदबाज का विकल्प प्रदान करते हैं। उनकी गेंदबाजी नाथन लायन की ऑफ स्पिन के साथ मिलकर विपक्षी बल्लेबाजों के सामने अलग तरह की चुनौती पेश कर सकती है। दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका पिच के मिजाज पर निर्भर करेगी,लेकिन कुनेमैन को टीम में शामिल करना ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक विविधता को दर्शाता है।
वहीं, माइकल नेसर की वापसी से ऑस्ट्रेलिया को एक उपयोगी ऑलराउंड विकल्प मिला है। नेसर बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने की क्षमता रखते हैं और दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में उनकी गेंदबाजी खास तौर पर प्रभावी साबित हो सकती है। पिंडली की चोट के कारण वह बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम का हिस्सा नहीं बन सके थे। हालाँकि,एशेज सीरीज 2025-26 में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने तीन मैचों में कुल 15 विकेट हासिल किए थे,जिससे उनकी उपयोगिता एक बार फिर सामने आई।
दक्षिण अफ्रीका का दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में मिचेल स्टार्क,पैट कमिंस और जोश हेजलवुड की तिकड़ी टीम की सबसे बड़ी ताकत होगी। वहीं,बल्लेबाजी में स्टीव स्मिथ और अन्य अनुभवी खिलाड़ियों पर जिम्मेदारी रहेगी। लाबुशेन के लिए यह सीरीज खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी,क्योंकि लगातार खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी जगह को सही साबित करने का मौका मिला है।
बांग्लादेश के खिलाफ हार के बाद ऑस्ट्रेलिया से बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन चयनकर्ताओं ने युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाए रखने का फैसला किया है। अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में यह देखना दिलचस्प होगा कि मौजूदा टीम उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और लाबुशेन सहित खराब फॉर्म से जूझ रहे खिलाड़ी किस तरह वापसी करते हैं।
साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम: पैट कमिंस (कप्तान), एलेक्स कैरी,स्कॉट बोलैंड,कूपर कोनोली,जोश हेजलवुड,कैमरून ग्रीन,जोश इंग्लिस, ट्रेविस हेड,मैथ्यू कुन्हेमैन,नाथन लायन,मार्नस लाबुशेन,माइकल नेसर,मैथ्यू रेनशॉ,स्टीव स्मिथ,मिशेल स्टार्क और ब्यू वेबस्टर।
