डॉलर

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से जुड़े अरबों डॉलर अमेरिकी बैंकों से गुजर रहे,जाँच में बड़ा खुलासा

वॉशिंगटन,7 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से जुड़े अरबों डॉलर हर साल अमेरिकी बैंकों के खातों के जरिए गुजर रहे हैं। एक जाँच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ईरान विदेशी बैंकों और जटिल वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक अप्रत्यक्ष पहुँच बनाए हुए है। इस व्यवस्था में कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। इसके जरिए ऐसे विदेशी बैंक अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के साथ डॉलर में सीमा पार लेनदेन कर सकते हैं,जिनकी अमेरिका में खुद कोई शाखा या प्रत्यक्ष मौजूदगी नहीं होती।

रिपोर्ट के मुताबिक,ईरान से जुड़े संस्थान अपनी वास्तविक पहचान और लेनदेन के अंतिम लाभार्थियों को छिपाने के लिए फ्रंट कंपनियों,करेंसी एक्सचेंजों और अलग-अलग देशों में मौजूद कारोबारी साझेदारों का इस्तेमाल करते हैं। चीन,संयुक्त अरब अमीरात और अन्य देशों में मौजूद कंपनियां इस नेटवर्क का हिस्सा बन सकती हैं। इन कंपनियों के जरिए लेनदेन को इस तरह आगे बढ़ाया जाता है कि अमेरिकी वित्तीय संस्थानों तक पहुँचने वाले भुगतान दस्तावेजों में ईरान से सीधा संबंध स्पष्ट रूप से सामने न आए। विदेशी बैंक इसके बाद अपने अमेरिकी कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकों के माध्यम से डॉलर में लेनदेन पूरा करते हैं।

जाँच में सामने आए आँकड़ों के अनुसार,अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2024 के दौरान करीब 9 अरब डॉलर की ऐसी राशि की पहचान की थी,जिसका किसी न किसी रूप में ईरान से संबंध था और जो अमेरिकी बैंकों के माध्यम से गुजरी। यह आँकड़ा ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिकी प्रशासन ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इससे अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था की प्रभावशीलता और उसमें मौजूद संभावित खामियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुँच सीमित करना और उसके लिए डॉलर आधारित लेनदेन को मुश्किल बनाना है। हालाँकि, जाँच रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि विदेशी वित्तीय संस्थानों और जटिल कारोबारी संरचनाओं के जरिए कुछ ईरानी संस्थाएँ इस व्यवस्था से बचने के रास्ते तलाश रही हैं। प्रत्यक्ष रूप से किसी अमेरिकी बैंक का ईरानी संस्था से लेनदेन न होना इस प्रक्रिया को पकड़ना मुश्किल बना देता है। जब भुगतान किसी तीसरे देश की कंपनी या बैंक के माध्यम से होता है,तो लेनदेन की वास्तविक प्रकृति की पहचान करना अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के लिए चुनौती बन सकती है।

इसी संदर्भ में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 28 अगस्त को मिस्र के सरकारी बैंक बैंक मिस्र की संयुक्त अरब अमीरात स्थित शाखा के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव रखा। अमेरिकी अधिकारियों ने इस शाखा को धनशोधन के लिए प्रमुख चिंता वाला वित्तीय संस्थान बताया। अमेरिकी विभाग का आरोप है कि इस शाखा ने ईरान के कथित छाया बैंकिंग नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों के लिए करीब 1.8 अरब डॉलर अमेरिकी कॉरेस्पॉन्डेंट खातों के जरिए स्थानांतरित किए।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,बैंक मिस्र की संयुक्त अरब अमीरात शाखा के डॉलर खाते अमेरिका के तीन बैंकों में मौजूद थे। हालाँकि,इन तीनों अमेरिकी बैंकों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किए गए। बैंक मिस्र की वेबसाइट पर जेपी मॉर्गन चेज और सिटीग्रुप को उसके कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग साझेदारों में शामिल बताया गया है। इन दोनों अमेरिकी बैंकों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय की यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का हिस्सा बताई गई है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुँच को खत्म करना और ऐसे विदेशी वित्तीय संस्थानों पर कार्रवाई करना है,जो अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में ईरानी संस्थाओं की मदद करते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपनी आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए ऐसे नेटवर्क का इस्तेमाल करता है,जिससे उसकी प्रतिबंधित संस्थाओं तक धन पहुँच सके और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भुगतान किया जा सके।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस मामले में सख्त संदेश देते हुए कहा कि ईरान की मदद करने वाले संस्थान अमेरिकी डॉलर और वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक अपनी पहुँच बनाए नहीं रख सकते। अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह बयान उन विदेशी बैंकों के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है,जो ईरान से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। अमेरिका पहले भी विदेशी बैंकों को चेतावनी देता रहा है कि प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने पर उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बैंकों को ईरान द्वारा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संभावित संकेतकों के बारे में भी चेतावनी दी है। इनमें ऐसी कंपनियाँ शामिल हैं,जिनका स्वामित्व स्पष्ट नहीं है या जिनके वास्तविक मालिकों की जानकारी छिपाई गई है। इसके अलावा हांगकांग में पंजीकृत लेकिन चीनी बैंकों में खाते रखने वाली कंपनियों और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद ऐसी फर्मों को भी जोखिम वाले नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है,जिनकी वास्तविक कारोबारी गतिविधियाँ स्पष्ट नहीं होतीं।

ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों में विविधता लाने की कोशिश करता रहा है। उसने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीनी युआन और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल बढ़ाया है। इसके बावजूद डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह अलग होना ईरान के लिए आसान नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार,कुछ तकनीकी उपकरणों की खरीद और सैन्य कार्यक्रमों से संबंधित सामान हासिल करने के लिए उसे अब भी ऐसी वित्तीय व्यवस्था की जरूरत पड़ती है, जिसमें डॉलर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यही कारण है कि ईरान से जुड़े कथित छाया बैंकिंग नेटवर्क अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। इन नेटवर्क में कई देशों की कंपनियाँ,वित्तीय संस्थान,करेंसी एक्सचेंज और कारोबारी मध्यस्थ शामिल हो सकते हैं। एक लेनदेन कई चरणों से गुजरता है और हर चरण में अलग-अलग कंपनी या बैंक शामिल होने के कारण अंतिम लाभार्थी की पहचान मुश्किल हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों को ऐसे मामलों में यह साबित करना पड़ता है कि संबंधित वित्तीय संस्थान ने प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ जानबूझकर कारोबार किया या उन्हें प्रतिबंधों से बचने में मदद की।

अमेरिकी कानून के तहत अमेरिकी नागरिकों और संस्थानों को प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ वित्तीय लेनदेन करने की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही अमेरिका ने विदेशी बैंकों और कंपनियों पर भी दबाव बनाया है कि वे ईरान से जुड़े प्रतिबंधित कारोबार में शामिल न हों। यदि कोई विदेशी वित्तीय संस्था जानबूझकर ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करती है,तो उसके खिलाफ अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर किए जाने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि अमेरिकी डॉलर के कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग नेटवर्क तक पहुँच विदेशी बैंकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ जोखिम का क्षेत्र भी बन गई है।

जांच रिपोर्ट में सामने आए करीब 9 अरब डॉलर के आँकड़े ने अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती को उजागर किया है। हालाँकि,अमेरिकी बैंकों के जरिए किसी राशि के गुजरने का अर्थ यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक लेनदेन अवैध था या अमेरिकी बैंक जानबूझकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे। कई मामलों में विदेशी बैंकों के जरिए आने वाले लेनदेन में अंतिम लाभार्थी या वास्तविक कारोबारी संबंध छिपे हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों की जाँच में लेनदेन की संरचना,कंपनियों के स्वामित्व और भुगतान के वास्तविक उद्देश्य की विस्तृत पड़ताल की जाती है।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव बढ़ने के बीच इस वित्तीय नेटवर्क को लेकर आने वाला खुलासा दोनों देशों के बीच आर्थिक संघर्ष का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने लाता है। अमेरिका जहाँ ईरान की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पहुँच को सीमित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क वैकल्पिक रास्तों के जरिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तक पहुँच बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। यदि अमेरिकी प्रशासन ऐसे नेटवर्क पर और सख्ती करता है,तो संयुक्त अरब अमीरात,चीन और अन्य देशों में सक्रिय वित्तीय संस्थानों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

आने वाले समय में अमेरिका की कोशिश उन वित्तीय संस्थानों और कंपनियों की पहचान करने की होगी,जो कथित तौर पर ईरान के छाया बैंकिंग नेटवर्क को सहायता पहुँचा रहे हैं। दूसरी ओर,ईरान के लिए चुनौती यह होगी कि वह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और जरूरी आयात को जारी रखते हुए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से कैसे बचता है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर के वैश्विक वित्तीय नेटवर्क और कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग प्रणाली को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। अमेरिकी प्रतिबंधों की सख्ती के बावजूद अरबों डॉलर के लेनदेन का सामने आना यह संकेत देता है कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में प्रतिबंधों को लागू करना केवल कानून बनाने का मामला नहीं,बल्कि जटिल अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन और मध्यस्थ नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखने की चुनौती भी है।