प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@PKVarmaRanchi)

पेरिस में बीएपीएस मंदिर का लोकार्पण भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ: पीएम मोदी

नई दिल्ली,7 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के लोकार्पण को भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ बताया है। मंदिर के लोकार्पण समारोह को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र नहीं है,बल्कि दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक मूल्यों, आपसी सहयोग और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आने वाले समय में भारत और फ्रांस के बीच संबंधों को नई ऊर्जा देने के साथ यूरोप में भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संदेश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भले ही वह इस ऐतिहासिक अवसर पर व्यक्तिगत रूप से पेरिस में मौजूद नहीं हैं,लेकिन मन और हृदय से वह स्वयं को समारोह में उपस्थित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने पूज्य महंत स्वामी,संतों और बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था को मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए संस्था से जुड़े सभी लोगों के योगदान की सराहना करते हुए प्रमुख स्वामी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज ने भारत के प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव के पुनर्जागरण का एक व्यापक अभियान शुरू किया था। उनके प्रयासों के कारण भारतीय संस्कृति,अध्यात्म और सेवा की परंपरा का संदेश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचा। प्रधानमंत्री के मुताबिक,इस अभियान का प्रकाश आज यूरोप सहित पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पेरिस में निर्मित यह मंदिर उसी संकल्प और आध्यात्मिक दृष्टि की निरंतरता है,जिसने भारत की संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में योगदान दिया है।

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2024 में अबू धाबी में भव्य हिंदू मंदिर के लोकार्पण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब पेरिस में मंदिर का निर्माण उसी संकल्प शक्ति और सांस्कृतिक विस्तार की यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके अनुसार,बीएपीएस के माध्यम से दुनिया के अलग-अलग देशों में निर्मित होने वाले मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं हैं,बल्कि वे भारत की प्राचीन विचार परंपरा,आध्यात्मिक मूल्यों और मानव कल्याण के संदेश को भी अपने साथ लेकर जाते हैं।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने संस्कृत के मंत्र ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की मूल भावना लोगों के मन और हृदय को जोड़ने की रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा विविधताओं के बीच एकता, संवाद और सहयोग का संदेश दिया है। पेरिस का यह मंदिर भी इसी विचार को आगे बढ़ाता है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह मंदिर फ्रांस की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करेगा तथा भारत और फ्रांस के बीच पहले से मजबूत सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और फ्रांस के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत और फ्रांस के बीच विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को दोनों देश भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के रूप में मना रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के संबंध केवल वर्तमान सहयोग तक सीमित नहीं हैं,बल्कि इनके पीछे लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत नींव भी मौजूद है।

प्रधानमंत्री ने भारत और फ्रांस के ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संपर्क केवल आधुनिक कूटनीति से नहीं बना है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस की धरती पर भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके अलावा फ्रांस के कई विद्वानों और चिंतकों ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और संस्कृत के अध्ययन को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने रोमां रोलां की लेखनी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचारों ने भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत किया।

प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस से जुड़े विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन आध्यात्मिक विचारों ने भारत की संस्कृति और दर्शन को यूरोप में समझने के लिए नई दृष्टि प्रदान की। इसी क्रम में उन्होंने पेरिस से पुडुचेरी तक ‘द मदर’ की आध्यात्मिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों ने भारत और फ्रांस के समाजों को एक-दूसरे के और करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री ने इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद स्वामी के फ्रांस आगमन और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एफिल टॉवर के सामने आयोजित योग कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएँ भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के फ्रांस में बढ़ते प्रभाव का उदाहरण हैं। अब पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने मंदिर की निर्माण प्रक्रिया को भी विशेष बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर ‘मेड इन इंडिया’ और ‘बिल्ट इन फ्रांस’ का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किए गए कई पत्थरों को भारत में तराशा गया और इसके बाद उन्हें फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के साथ जोड़कर इस भव्य संरचना का स्वरूप दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया अपने आप में भारत और फ्रांस की क्षमताओं, तकनीकी सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि पेरिस का यह मंदिर आने वाली कई पीढ़ियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग, मित्रता और नई संभावनाओं का प्रतीक बना रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह मंदिर की संरचना में भारत की पारंपरिक कला और फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग का मेल दिखाई देता है,उसी तरह दोनों देशों के संबंधों में भी परंपरा और आधुनिकता का संतुलन देखने को मिलता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामीनारायण मंदिरों की पहचान केवल भक्ति से नहीं, बल्कि सेवा की भावना से भी जुड़ी रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि पेरिस स्थित यह मंदिर भी आने वाले समय में विभिन्न सेवा परियोजनाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उनके अनुसार,मंदिर से भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा का संदेश पूरे यूरोप तक पहुँच सकता है। यह स्थान भारतीय समुदाय के साथ-साथ फ्रांस और यूरोप के अन्य लोगों के लिए भी संवाद,संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समझने का माध्यम बन सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंत में कहा कि पेरिस का बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर भारत की आध्यात्मिक विरासत और फ्रांस की आधुनिक क्षमता के संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा और भविष्य के सहयोग के लिए नई संभावनाएँ खोलेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलेगा,वह स्वयं इस मंदिर में जाकर दर्शन करने का प्रयास करेंगे। उनके मुताबिक,यह मंदिर भारत और फ्रांस की दोस्ती, साझा मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को आने वाले लंबे समय तक दुनिया के सामने प्रस्तुत करता रहेगा।