नई दिल्ली,7 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने निजीकरण और अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी भूमिका सीमित किए जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह बेबुनियाद और गलत बताया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का केंद्रीय संस्थान बना रहेगा और देश के महत्वपूर्ण तथा रणनीतिक अंतरिक्ष अभियानों का नेतृत्व पहले की तरह करता रहेगा। इसरो की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है,जब अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी के बीच संगठन की भविष्य की भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
इसरो ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के बाद इसरो का निजीकरण किया जाएगा या धीरे-धीरे उसकी भूमिका कम कर दी जाएगी। संगठन ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि न तो इसरो का निजीकरण किया जा रहा है और न ही भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी अहमियत कम होने वाली है। इसरो के मुताबिक,वह देश की अंतरिक्ष क्षमताओं के विकास और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।
संगठन ने कहा कि भारत के उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान,राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों, मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम,अगली पीढ़ी की प्रक्षेपण तकनीकों,भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन,चंद्रमा और अन्य ग्रहों की खोज जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों का नेतृत्व इसरो ही करेगा। इन मिशनों के लिए आवश्यक वैज्ञानिक,तकनीकी और रणनीतिक क्षमताओं को विकसित करना संगठन की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। इसरो ने कहा कि देश के दीर्घकालिक अंतरिक्ष लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उसके वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नेतृत्व की भूमिका पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण होगी।
इसरो ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया। संगठन के अनुसार,निजी क्षेत्र को अवसर देने का उद्देश्य इसरो की भूमिका कम करना नहीं है। इसके बजाय इससे इसरो को अपने संसाधनों और वैज्ञानिक प्रतिभा को अधिक उन्नत अनुसंधान,जटिल तकनीकी चुनौतियों और भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों पर केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। वहीं निजी कंपनियाँ और स्टार्टअप उन तकनीकों के विकास,उत्पादन और व्यावसायिक इस्तेमाल को बड़े स्तर पर आगे बढ़ा सकेंगे,जिन्हें पहले मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों के स्तर पर विकसित किया जाता था।
इसरो ने कहा कि वर्ष 2020 से शुरू किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों और भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 का व्यापक उद्देश्य देश में एक मजबूत,बड़ा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इन सुधारों के तहत उद्योगों, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। इससे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार होगा और देश वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अपनी कई परिपक्व और स्थापित तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण पहले ही किया है। हालाँकि,तकनीक के हस्तांतरण का अर्थ यह नहीं है कि इसरो उस क्षेत्र से बाहर निकल रहा है। इसके जरिए उद्योगों को बड़े पैमाने पर उत्पादन, व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुँच बनाने में मदद मिलती है। दूसरी ओर,इसरो के वैज्ञानिक और इंजीनियर नई पीढ़ी की तकनीकों तथा अत्यधिक जटिल राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशनों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
इसरो ने भारत के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का लक्ष्य वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना है। इसके अलावा वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की महत्वाकांक्षी योजना भी है। इसके साथ ही पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास और चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की दीर्घकालिक खोज को आगे बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इन योजनाओं के लिए अत्याधुनिक तकनीक,दीर्घकालिक वैज्ञानिक अनुसंधान और मजबूत रणनीतिक क्षमता की जरूरत होगी।
संगठन के मुताबिक,ऐसे महत्वाकांक्षी अभियानों के लिए इसरो का उन्नत अनुसंधान और रणनीतिक क्षमताओं पर केंद्रित रहना बेहद जरूरी है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसरो के सामने नए अवसर पैदा होंगे,क्योंकि इससे संगठन को उत्पादन और व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय अत्याधुनिक तकनीकी विकास तथा राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले अभियानों पर अधिक ध्यान देने की गुंजाइश मिलेगी।
इसरो ने भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप की तेजी से बढ़ती संख्या को भी अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत बताया। संगठन के अनुसार, वर्ष 2020 में देश में गिने-चुने अंतरिक्ष स्टार्टअप मौजूद थे,जबकि अब इनकी संख्या 450 से अधिक हो चुकी है। ये कंपनियाँ प्रक्षेपण यान,उपग्रह, प्रणोदन प्रणाली,पृथ्वी अवलोकन,संचार और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इससे भारत में अंतरिक्ष से जुड़े निजी उद्योग का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इसरो ने भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को लेकर भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखा। संगठन के अनुसार,देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 8.4 अरब डॉलर की है और वर्ष 2033 तक इसे बढ़ाकर लगभग 44 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सरकारी संसाधन पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए निजी निवेश,औद्योगिक उत्पादन क्षमता, स्टार्टअप और उद्यमिता को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
इसरो का कहना है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षमताओं का विस्तार एक-दूसरे के विकल्प के रूप में नहीं,बल्कि एक-दूसरे के पूरक के तौर पर देखा जाना चाहिए। संगठन के अनुसार,निजी क्षेत्र के विस्तार से इसरो कमजोर नहीं होगा,बल्कि इससे देश की समग्र अंतरिक्ष क्षमता मजबूत होगी। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इसरो वैज्ञानिक नेतृत्व,राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतिक अभियानों का केंद्र बना रहेगा, जबकि उद्योग और स्टार्टअप अंतरिक्ष तकनीकों के उत्पादन और व्यावसायिक विस्तार को गति देंगे। इसरो का यह स्पष्टीकरण उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश है,जिनमें अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों को संगठन के निजीकरण या उसकी भूमिका घटने से जोड़कर देखा जा रहा था।
