अदन (यमन),7 सितंबर (युआईटीवी)- यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। देश के पश्चिमी प्रांतों ताइज और होदेइदाह में सरकारी बलों और हूती समूह के बीच पिछले चार दिनों से भीषण लड़ाई जारी है। इस संघर्ष में अब तक कम से कम 117 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। मृतकों में सरकारी सैनिकों के साथ-साथ हूती लड़ाके भी शामिल हैं। लगातार हो रही हिंसा ने यमन में एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध की आशंका बढ़ा दी है।
चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक,गुरुवार को लड़ाई शुरू होने के बाद से सरकारी बलों के कम से कम 54 सैनिक मारे गए हैं, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। पश्चिमी तटीय मोर्चे पर सरकारी बलों के साथ मौजूद एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि संघर्ष के दौरान सरकारी सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अधिकारी ने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की।
वहीं,होदेइदाह प्रांत में हूती समूह के नियंत्रण वाले अस्पतालों से जुड़े दो चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि पिछले चार दिनों की लड़ाई में कम से कम 63 हूती लड़ाके भी मारे गए हैं। इस तरह दोनों पक्षों के मृतकों की संख्या 117 तक पहुँच गई है। हालाँकि,संघर्ष अभी भी जारी होने के कारण हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पश्चिमी यमन में चल रही इस लड़ाई के दौरान शुक्रवार को सरकारी बलों की ओर से हवाई हमले भी किए गए। यमनी सरकार के लड़ाकू विमानों ने होदेइदाह और ताइज के उन इलाकों को निशाना बनाया,जो हूती समूह के नियंत्रण में हैं। बताया गया कि ये हवाई हमले जमीनी सैनिकों को समर्थन देने के लिए किए गए,जो बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास हूती समूह के बड़े हमले का मुकाबला कर रहे थे।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,दोनों प्रांतों में कई मोर्चों पर भारी लड़ाई चल रही थी। पिछले 24 घंटों के दौरान हूती लड़ाकों ने कई इलाकों में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की और कुछ स्थानों पर बढ़त भी हासिल कर ली थी। इसके बाद सरकारी बलों ने हवाई और जमीनी कार्रवाई तेज कर दी। लड़ाकू विमानों ने उन इलाकों में हूती ठिकानों और उनकी गतिविधियों को निशाना बनाया, जहाँ जमीनी स्तर पर संघर्ष चल रहा था।
हवाई हमलों में हुए नुकसान और संभावित हताहतों को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। संघर्ष वाले इलाकों में संचार और सुरक्षा की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में नुकसान का पूरा आकलन करना मुश्किल हो रहा है। दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियाँ तेज होने के कारण स्थानीय आबादी के बीच भी चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच,एक सरकारी सैन्य अधिकारी ने बताया कि सरकारी बलों ने रातभर चले एक तेज जवाबी अभियान के दौरान पश्चिमी ताइज में कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर दोबारा कब्जा कर लिया। इन ठिकानों पर कुछ घंटे पहले ही हूती लड़ाकों ने नियंत्रण हासिल किया था। सरकारी बलों की इस जवाबी कार्रवाई को हूती समूह की हालिया बढ़त को रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पश्चिमी यमन में बढ़ा यह तनाव हाल के वर्षों में हुई सबसे बड़ी जमीनी लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है। संघर्ष की तीव्रता ने इस आशंका को जन्म दिया है कि वर्षों से कई मोर्चों पर बनी अपेक्षाकृत शांति अब खत्म हो सकती है और यमन दोबारा बड़े पैमाने पर युद्ध की चपेट में आ सकता है। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण पहले ही देश की मानवीय स्थिति बेहद खराब रही है और नए सिरे से हिंसा बढ़ने से आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
यमन में संघर्ष की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इसके पीछे की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। देश साल 2014 के अंत से गृहयुद्ध जैसे हालात से जूझ रहा है। उस समय हूती समूह ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से में अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अगले वर्ष सैन्य हस्तक्षेप किया था।
इसके बाद यमन में कई वर्षों तक भीषण लड़ाई चली। संघर्ष में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। देश के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा। हालाँकि,हाल के वर्षों में विभिन्न मोर्चों पर लड़ाई की तीव्रता अपेक्षाकृत कम हुई थी और राजनीतिक समाधान की उम्मीदें भी बनी थीं,लेकिन ताइज और होदेइदाह में हालिया हिंसा ने इन उम्मीदों को एक बार फिर झटका दिया है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास का इलाका रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री आवाजाही के लिए अहम मार्ग माना जाता है। ऐसे में इस इलाके में सैन्य गतिविधियाँ बढ़ने से यमन के आंतरिक संघर्ष के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ बढ़ सकती हैं।
फिलहाल सरकारी बल और हूती समूह एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं। सरकारी बलों की जवाबी कार्रवाई और हूतियों की क्षेत्रीय बढ़त की कोशिशों के बीच पश्चिमी यमन में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। चार दिनों में 117 लोगों की मौत ने संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि क्या यह हिंसा सीमित मोर्चों तक रहेगी या फिर यमन में एक बार फिर व्यापक युद्ध का दौर शुरू हो जाएगा। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की सैन्य रणनीति और जमीनी स्थिति इस बात को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
