सोल,7 सितंबर (युआईटीवी)- उत्तर कोरिया ने अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए नए युद्धपोत ‘कांग कोन’ को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। करीब 5,000 टन वजनी इस नए विध्वंसक युद्धपोत को उत्तर कोरियाई नेतृत्व ने देश की परमाणु जवाबी कार्रवाई प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। इस मौके पर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस बल के रूप में विकसित करने और देश की समुद्री सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
सरकारी मीडिया के अनुसार,किम जोंग-उन ने एक दिन पहले पूर्वी बंदरगाह शहर वोनसन में आयोजित युद्धपोत के कमीशनिंग समारोह में हिस्सा लिया। समारोह के दौरान उन्होंने नए विध्वंसक युद्धपोत का निरीक्षण किया और इसकी सैन्य क्षमताओं को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। किम ने ‘कांग कोन’ को मूल रूप से एक आक्रामक युद्धपोत बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का यह युद्धपोत देश की परमाणु जवाबी कार्रवाई प्रणाली का हिस्सा है और इसे दुश्मनों के खिलाफ घातक जवाबी हमला करने में सक्षम होना चाहिए।
किम जोंग-उन ने इस दौरान उत्तर कोरिया की नौसैनिक रणनीति को लेकर भी अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि समुद्री रक्षा क्षमता और युद्ध को रोकने की ताकत को मजबूत करने के लिए उत्तर कोरिया की नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस बल के रूप में विकसित करना जरूरी है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि प्योंगयांग अपनी सैन्य रणनीति में समुद्री शक्ति और परमाणु क्षमता के संयोजन पर विशेष जोर दे रहा है।
उत्तर कोरियाई नेता ने यह भी कहा कि उनका देश अपनी नौसैनिक ताकत का लगातार विस्तार करेगा। उन्होंने अधिक शक्तिशाली रणनीतिक सैन्य संसाधनों को तैनात करने का संकल्प भी जताया। किम ने दावा किया कि उनका देश नौसेना को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रहा है और करीब आठ महीने बाद वह पूरी दुनिया को इस योजना का परिणाम दिखाएँगे। हालाँकि,उन्होंने इस प्रस्तावित सैन्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की और यह स्पष्ट नहीं किया कि अगले चरण में किस तरह की सैन्य क्षमता विकसित या तैनात की जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग-उन द्वारा आठ महीने बाद परिणाम दिखाने की बात उत्तर कोरिया की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी परियोजना से जुड़ी हो सकती है। उत्तर कोरिया ने पहली बार जनवरी 2021 में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी विकसित करने की अपनी योजना सार्वजनिक की थी। यदि प्योंगयांग इस दिशा में वास्तविक प्रगति करता है,तो इससे उसकी समुद्री परमाणु क्षमता में महत्वपूर्ण विस्तार हो सकता है।
दिसंबर 2025 में उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया ने कुछ तस्वीरें जारी की थीं,जिनमें किम जोंग-उन एक निर्माणाधीन परमाणु-संचालित पनडुब्बी का निरीक्षण करते हुए दिखाई दिए थे। बताया गया था कि इस पनडुब्बी की क्षमता करीब 8,700 टन है। उस समय किम ने दक्षिण कोरिया की परमाणु-संचालित पनडुब्बी बनाने की योजना को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि उत्तर कोरिया को ऐसी सैन्य क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए अपनी रणनीतिक ताकत को मजबूत करना होगा।
‘कांग कोन’ को उत्तर कोरियाई नौसेना के पूर्वी सागर बेड़े में शामिल किया जाएगा। सरकारी मीडिया के मुताबिक,यह युद्धपोत देश की समुद्री संप्रभुता की रक्षा करने के साथ-साथ परमाणु युद्ध को रोकने वाली शक्ति के रूप में काम करेगा। उत्तर कोरिया लंबे समय से अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए मिसाइलों,परमाणु हथियारों और समुद्री संसाधनों के विकास पर जोर देता रहा है। ऐसे में नए विध्वंसक युद्धपोत को नौसेना में शामिल करना उसकी व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में किम जोंग-उन अपनी पत्नी री सोल-जू और बेटी जू-ए के साथ समारोह में नजर आए। परिवार की मौजूदगी ने कार्यक्रम के राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व को भी बढ़ाया। उत्तर कोरिया में बड़े सैन्य कार्यक्रमों के दौरान किम की मौजूदगी को देश की सैन्य प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जाता है।
‘कांग कोन’ को नौसेना में शामिल किए जाने की घोषणा ऐसे समय में हुई है,जब उत्तर कोरिया अपने नए युद्धपोतों की संख्या बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे पहले देश ने अपना पहला 5,000 टन का विध्वंसक युद्धपोत ‘चोए ह्योन’ नौसेना में शामिल किया था। उसे शामिल किए जाने के तीन महीने से भी कम समय बाद अब ‘कांग कोन’ को नौसेना का हिस्सा बनाया गया है। उत्तर कोरिया ने उस समय कहा था कि ‘चोए ह्योन’ पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की रक्षा और युद्ध को रोकने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएगा।
दो बड़े विध्वंसक युद्धपोतों को कम समय के अंतराल में नौसेना में शामिल किए जाने से उत्तर कोरिया की समुद्री सैन्य क्षमता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्योंगयांग का लक्ष्य पारंपरिक नौसैनिक क्षमता के साथ परमाणु हथियारों की ताकत को जोड़ना दिखाई दे रहा है। इससे उत्तर कोरिया अपने संभावित विरोधियों के खिलाफ समुद्र से जवाबी कार्रवाई की क्षमता विकसित करना चाहता है।
विशेषज्ञों की नजर अब किम जोंग-उन द्वारा बताए गए आठ महीने के समय पर है। यदि इस अवधि में उत्तर कोरिया परमाणु-संचालित पनडुब्बी या कोई अन्य रणनीतिक सैन्य संसाधन सामने लाता है,तो इससे पूर्वी एशिया में सैन्य संतुलन को लेकर चिंताएँ बढ़ सकती हैं। फिलहाल ‘कांग कोन’ का नौसेना में शामिल होना इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरिया अपनी समुद्री ताकत को केवल रक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता,बल्कि उसे अपनी व्यापक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
