लंदन,9 सितंबर (युआईटीवी)- ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवाओं में आई गंभीर तकनीकी खराबी ने मंगलवार को देश के हवाई यातायात नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के कारण देशभर के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन बाधित रहा। बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ीं,जबकि कई अन्य उड़ानों में घंटों तक देरी हुई। स्थानीय मीडिया द्वारा उपलब्ध आँकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक,मंगलवार रात तक ब्रिटेन के अलग-अलग हवाई अड्डों पर एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी थीं। इस तकनीकी समस्या के कारण हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं और हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति देखने को मिली।
ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवाओं का संचालन करने वाली नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज यानी एनएटीएस ने बताया कि उसके फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में तकनीकी समस्या आ गई थी। इसी सिस्टम के जरिए विमानों की आवाजाही और उड़ानों के संचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है। सिस्टम में आई खराबी के बाद देश के कई हिस्सों में उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। एयरलाइंस को उड़ानों में बदलाव करने पड़े और कई विमानों को निर्धारित समय पर उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिल सकी। इसके चलते धीरे-धीरे देरी का असर पूरे हवाई यातायात नेटवर्क में फैल गया।
स्वीडन की फ्लाइट ट्रैकिंग सेवा फ्लाइटरडार-24 के आँकड़ों के अनुसार,तकनीकी खराबी का असर ब्रिटेन के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर दिखाई दिया। इनमें राजधानी लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट,एडिनबर्ग एयरपोर्ट और मैनचेस्टर एयरपोर्ट प्रमुख रूप से शामिल रहे। शुरुआत में समस्या का असर कुछ खास हवाई क्षेत्रों तक दिखाई दे रहा था,लेकिन जैसे-जैसे विमानों का निर्धारित संचालन प्रभावित हुआ,देरी और रद्दीकरण का असर अन्य हवाई अड्डों तक भी पहुँच गया।
फ्लाइटरडार-24 के आँकड़ों का स्थानीय मीडिया द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया कि मंगलवार रात तक ब्रिटेन के विभिन्न हवाई अड्डों पर एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी थीं। इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने से यह स्पष्ट हुआ कि समस्या महज किसी एक एयरपोर्ट या सीमित हवाई क्षेत्र तक नहीं रही,बल्कि इसके कारण पूरे नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया। जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुईं,उन्हें वैकल्पिक उड़ानों की तलाश करनी पड़ी,जबकि कई यात्रियों को अपनी यात्रा आगे के लिए टालनी पड़ी।
एनएटीएस ने शुरुआत में बताया था कि उसके फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ी को दूर करने के लिए इंजीनियर लगातार काम कर रहे हैं। तकनीकी टीम ने समस्या की पहचान करने के बाद उसे ठीक करने के लिए समाधान लागू किया। बाद में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवा ने पुष्टि की कि सिस्टम की समस्या को ठीक कर लिया गया है। हालाँकि,तकनीकी खराबी दूर होने के बावजूद उड़ानों का संचालन तुरंत सामान्य नहीं हो सका।
एनएटीएस ने यात्रियों और एयरलाइंस को चेतावनी दी कि सामान्य संचालन बहाल करने और पहले से प्रभावित उड़ानों की लंबी कतार को खत्म करने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है। तकनीकी समस्या के कारण जो उड़ानें पहले ही रद्द या विलंबित हो चुकी थीं, उन्हें दोबारा व्यवस्थित करना आसान नहीं था। बड़ी संख्या में विमान और यात्री अपने निर्धारित कार्यक्रम से पीछे हो चुके थे। ऐसे में सिस्टम ठीक होने के बाद भी उड़ानों को सामान्य समय-सारिणी पर लाने में अतिरिक्त समय लगना स्वाभाविक था।
एनएटीएस ने एक बयान में कहा कि उसके सिस्टम की समस्या अब ठीक हो चुकी है और सेवा सामान्य रूप से काम कर रही है। संस्था ने यह भी कहा कि लंबित उड़ानों के कार्यक्रम को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। हालाँकि,एयर ट्रैफिक कंट्रोल नेटवर्क पर जमा हुए दबाव को कम करने और रद्द या विलंबित उड़ानों को फिर से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया जारी रही। इसका असर उन यात्रियों पर भी पड़ा, जिनकी उड़ानें सीधे तौर पर तकनीकी खराबी के कारण रद्द नहीं हुई थीं,क्योंकि पूरे नेटवर्क में विमानों की उपलब्धता और समय-सारिणी प्रभावित हो चुकी थी।
ब्रिटेन के सबसे बड़े हवाई अड्डे हीथ्रो एयरपोर्ट ने भी स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दी। एयरपोर्ट ने कहा कि वह एनएटीएस के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि तकनीकी समस्या के प्रभाव को कम किया जा सके और यात्रियों तथा उड़ान कार्यक्रमों पर पड़ने वाले असर को नियंत्रित किया जा सके। हीथ्रो से बड़ी संख्या में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं। ऐसे में वहाँ किसी भी बड़े स्तर की एयर ट्रैफिक कंट्रोल समस्या का असर केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं रहता,बल्कि दूसरे देशों से आने-जाने वाली उड़ानों पर भी पड़ सकता है।
फ्लाइटरडार-24 ने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण लंदन फ्लाइट इन्फॉर्मेशन क्षेत्र के कई हवाई अड्डों पर आने और जाने वाली उड़ानों को नियंत्रित करना पड़ा। विमानों की आवाजाही पर नियंत्रण बढ़ने से उड़ानों की रफ्तार प्रभावित हुई और पूरे नेटवर्क में देरी बढ़ती चली गई। एक उड़ान के देर से पहुँचने का असर उसके अगले प्रस्थान पर भी पड़ता है। इस तरह शुरुआती तकनीकी खराबी के बाद उड़ानों में देरी का सिलसिला कई घंटों तक चलता रहा और समस्या का प्रभाव लगातार व्यापक होता गया।
तकनीकी खराबी का असर केवल लंदन और उसके आसपास के हवाई अड्डों तक सीमित नहीं रहा। ब्रिटेन के दूसरे हिस्सों में स्थित कई हवाई अड्डों ने भी अपने संचालन पर इसके असर की जानकारी दी। एडिनबर्ग एयरपोर्ट ने यात्रियों को पहले ही चेतावनी दी कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई तकनीकी समस्या के कारण वहाँ से संचालित होने वाली उड़ानों पर असर पड़ सकता है। यात्रियों से अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी लेने और एयरलाइन से संपर्क बनाए रखने की अपील की गई।
स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के कई अन्य हवाई अड्डे भी इस व्यवधान से प्रभावित हुए। ल्यूटन और बर्मिंघम हवाई अड्डों से उड़ानों में देरी और रद्द होने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा एबरडीन और ग्लासगो हवाई अड्डों पर भी यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन हवाई अड्डों पर कई उड़ानें अपने निर्धारित समय से पीछे रहीं या रद्द कर दी गईं। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबा इंतजार करना पड़ा और कई लोगों को अपनी आगे की यात्रा की योजनाओं में बदलाव करना पड़ा।
इस तकनीकी खराबी का असर ब्रिटेन के बाहर भी दिखाई दिया। आयरलैंड के डबलिन एयरपोर्ट ने बताया कि ब्रिटेन से आने-जाने वाली उड़ानें एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ी से प्रभावित हो रही हैं। ब्रिटेन के साथ हवाई संपर्क रखने वाली उड़ानों के प्रभावित होने से दूसरे देशों में भी यात्रियों की यात्रा योजनाओं में रुकावट आई। इससे पता चलता है कि किसी देश के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आने वाली तकनीकी समस्या का प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क पर भी पड़ सकता है।
ब्रिटिश एयरवेज ने भी राष्ट्रीय एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के कारण अपनी सेवाओं के प्रभावित होने की जानकारी दी। एयरलाइंस के लिए इस तरह की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती है,क्योंकि उन्हें उड़ानों के समय में बदलाव करने के साथ-साथ यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने,विमानों और चालक दल की नई समय-सारिणी तैयार करने और एयरपोर्ट संचालन के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत पड़ती है।
इस पूरी घटना ने ब्रिटेन के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की तकनीकी क्षमता और उसकी विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हवाई यातायात का संचालन अत्यंत जटिल नेटवर्क पर निर्भर करता है,जहाँ विमानों की आवाजाही, उड़ान मार्ग, प्रस्थान और आगमन से जुड़े फैसलों में तकनीकी प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में आई खराबी का प्रभाव कुछ ही समय में बड़ी संख्या में उड़ानों तक पहुँच सकता है।
हालाँकि,एनएटीएस ने तकनीकी समस्या को ठीक करने की पुष्टि कर दी है,लेकिन हजारों यात्रियों को प्रभावित करने वाली इस घटना का असर तत्काल खत्म नहीं हुआ। सिस्टम बहाल होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती पहले से जमा हुए उड़ानों के बैकलॉग को खत्म करना था। रद्द उड़ानों के यात्रियों को नए विकल्प देने और विलंबित विमानों को फिर से निर्धारित करने में समय लगना तय था। यही वजह रही कि तकनीकी समस्या दूर होने के बाद भी यात्रियों को तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि आधुनिक विमानन व्यवस्था कितनी हद तक तकनीकी प्रणालियों पर निर्भर है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल में कुछ समय की तकनीकी गड़बड़ी भी हजारों यात्रियों की यात्रा प्रभावित कर सकती है और सैकड़ों से लेकर एक हजार से अधिक उड़ानों के संचालन को बाधित कर सकती है। अब जबकि एनएटीएस ने सिस्टम को ठीक कर दिया है,प्राथमिकता उड़ानों के लंबित कार्यक्रम को सामान्य करना और यात्रियों की परेशानी कम करना है। ब्रिटेन के प्रमुख हवाई अड्डों और एयरलाइंस के सामने भी चुनौती यही है कि वे रद्द और विलंबित उड़ानों को जल्द-से-जल्द व्यवस्थित करें और हवाई यातायात को सामान्य स्थिति में वापस लाएँ।
