मुंबई,9 सितंबर (युआईटीवी)- मिडकैप आईटी कंपनी कोफोर्ज में बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सामने आई चिंताओं के बीच कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन ओपी भट्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। भट्ट के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद बुधवार को कोफोर्ज के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर पर दबाव बढ़ा और निवेशकों की प्रतिक्रिया के चलते शेयर अपने पिछले बंद भाव से करीब नौ प्रतिशत तक नीचे चला गया।
बुधवार के कारोबार में कोफोर्ज के शेयर ने 1,780.70 रुपये का इंट्राडे निचला स्तर बनाया। यह कंपनी के पिछले बंद भाव 1,950 रुपये की तुलना में करीब 8.71 प्रतिशत की गिरावट है। हालाँकि,बाद में शेयर में कुछ सुधार देखने को मिला। सुबह 10:45 बजे के आसपास कोफोर्ज का शेयर करीब 4.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,862 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कंपनी के चेयरमैन के इस्तीफे और बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित आंतरिक ऑडिट में सामने आई चिंताओं को इस गिरावट की प्रमुख वजहों में से एक माना जा रहा है।
कोफोर्ज ने नियामकीय फाइलिंग में भट्ट के इस्तीफे और इससे जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार,उसके इंटरनल ऑडिटर ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के लिए तैयार किए गए इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत बोर्ड इवैल्यूएशन प्रोसेस और इस प्रक्रिया के आधार पर तैयार की गई बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट की समीक्षा की थी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी ओपी भट्ट कर रहे थे। ऑडिट के दौरान बोर्ड के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी की प्रक्रिया और उसके खुलासे में कुछ कमियाँ सामने आईं।
कंपनी के अनुसार,इन कमियों में चेयरमैन के प्रदर्शन के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी भी शामिल थी। इंटरनल ऑडिट में यह बात सामने आई कि बोर्ड मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया और उससे तैयार रिपोर्ट में मौजूद कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ बोर्ड के समक्ष पूरी तरह से प्रस्तुत नहीं की गई थीं। कंपनी की फाइलिंग के मुताबिक,जब बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट को बोर्ड के सामने पेश किया गया,तब रिपोर्ट में मौजूद या उससे संबंधित कुछ अहम सूचनाओं का पूरा खुलासा बोर्ड के सदस्यों के सामने नहीं हुआ था।
आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में इन मुद्दों के सामने आने के बाद कोफोर्ज के बोर्ड ने ओपी भट्ट से इस मामले में स्पष्टीकरण माँगा। भट्ट ने अपने काम और बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया में अपनी भूमिका का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने नेक नीयत से काम किया था। हालाँकि,कंपनी के बोर्ड द्वारा उनके स्पष्टीकरण की समीक्षा पूरी किए जाने और इस मामले पर किसी अंतिम निष्कर्ष या निर्णय पर पहुँचने से पहले ही भट्ट ने 8 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
भट्ट का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कॉरपोरेट प्रशासन और बोर्ड की जवाबदेही को लेकर कंपनियों में पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बोर्ड मूल्यांकन किसी कंपनी के संचालन में महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है, क्योंकि इसके जरिए बोर्ड, उसके सदस्यों और विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। ऐसे में मूल्यांकन से संबंधित जानकारी के पूर्ण और सही तरीके से प्रस्तुत नहीं होने को लेकर उठी चिंताएँ निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
कोफोर्ज ने भट्ट के इस्तीफे के बाद बोर्ड के नेतृत्व को लेकर तत्काल व्यवस्था भी की है। कंपनी ने मौजूदा नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। विवेक शर्मा 31 जनवरी 2027 तक कंपनी के बोर्ड के अंतरिम चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी सँभालेंगे। इस नियुक्ति के जरिए कंपनी ने बोर्ड के नेतृत्व में किसी तरह का खालीपन पैदा होने से रोकने की कोशिश की है और नियमित कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था की है।
ओपी भट्ट का कोफोर्ज के अलावा एक अन्य बड़ी कंपनी के बोर्ड से भी जुड़ाव है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार,वह वॉकहार्ट लिमिटेड के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर भी हैं। वहाँ वह ऑडिट कमेटी,स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप कमेटी और कैपिटल जुटाने से संबंधित कमेटियों के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कोफोर्ज से उनके इस्तीफे के बाद उनके अन्य कॉरपोरेट पदों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।
बाजार में कोफोर्ज के शेयरों में आई तेज गिरावट से यह संकेत मिलता है कि निवेशकों ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। किसी कंपनी के शीर्ष स्वतंत्र निदेशक और चेयरमैन का इस्तीफा,खासकर तब जब वह बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी आंतरिक ऑडिट चिंताओं के बीच हुआ हो,निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट गवर्नेंस मुद्दा बन सकता है। हालाँकि,कंपनी की फाइलिंग में सामने आए तथ्यों के अनुसार,बोर्ड ने भट्ट से स्पष्टीकरण जरूर माँगा था,लेकिन उनके इस्तीफा देने तक इस मामले में बोर्ड की समीक्षा पूरी नहीं हुई थी और कोई अंतिम फैसला भी नहीं लिया गया था।
अब कोफोर्ज के लिए आगे की चुनौती बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को दूर करने,कॉरपोरेट प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखने और निवेशकों का भरोसा कायम रखने की होगी। अंतरिम चेयरमैन के तौर पर विवेक शर्मा की नियुक्ति के बाद कंपनी के बोर्ड स्तर पर कामकाज जारी रहेगा। आने वाले समय में इस मामले में बोर्ड की आगे की समीक्षा और कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर बाजार की नजर रहेगी।
