अक्षय कुमार (तस्वीर क्रेडिट@apki_khanak)

‘हैवान’ से पहले भी विलेन बनकर चौंका चुके हैं अक्षय कुमार,इन फिल्मों में दिखा खतरनाक अंदाज

मुंबई,9 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक कलाकारों की पहचान कुछ खास तरह के किरदारों तक सीमित रही। किसी अभिनेता को एक्शन हीरो के तौर पर पसंद किया गया तो उससे लगातार उसी तरह की फिल्मों की उम्मीद की जाने लगी, जबकि कॉमेडी या रोमांटिक फिल्मों में लोकप्रिय कलाकारों के सामने भी एक तय छवि बनी रहती थी। हालाँकि, समय के साथ दर्शकों की पसंद बदली और कलाकारों ने भी अपनी स्थापित छवि से बाहर निकलकर अलग-अलग तरह के किरदारों को अपनाना शुरू किया। अब बड़े सितारे भी नकारात्मक भूमिकाएँ निभाने से पीछे नहीं हटते। इसी बदलते दौर में अक्षय कुमार भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते नजर आए हैं। अभिनेता अब क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘हैवान’ में खलनायक की भूमिका निभाने जा रहे हैं।

अक्षय कुमार का नाम बॉलीवुड के उन कलाकारों में शामिल है,जिन्होंने अपने लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। हालाँकि,उनकी पहचान मुख्य रूप से एक्शन हीरो और कॉमिक किरदारों के लिए बनी,लेकिन समय-समय पर उन्होंने ऐसे नकारात्मक किरदार भी निभाए, जिन्होंने दर्शकों को हैरान किया। ‘हैवान’ में उनका विलेन वाला अंदाज एक बार फिर चर्चा में है,लेकिन यह पहली बार नहीं है जब अक्षय पर्दे पर खतरनाक या नकारात्मक भूमिका में दिखाई देंगे। इससे पहले भी वह कई फिल्मों में अपने किरदारों के जरिए अपनी छवि से बिल्कुल अलग नजर आ चुके हैं।

अक्षय कुमार के नकारात्मक किरदारों की चर्चा 1997 में आई फिल्म ‘अफलातून’ से शुरू की जा सकती है। एक्शन कॉमेडी ड्रामा शैली की इस फिल्म में उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई थी। उनके किरदारों के नाम राजा और रॉकी थे। दोनों देखने में बिल्कुल एक जैसे थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व और इरादों में जमीन-आसमान का अंतर था। राजा एक छोटा-मोटा चोर था,जो पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए तरह-तरह के जुगाड़ करता रहता था। कहानी में वह पूजा के प्यार में पड़ जाता है और उसके पिता का दिल जीतने की कोशिश करता है।

दूसरी ओर रॉकी बेहद खतरनाक और बेरहम कातिल था। उसका चेहरा राजा से बिल्कुल मिलता था, जिसकी वजह से कहानी में कई तरह के भ्रम और मुश्किलें पैदा होती हैं। रॉकी राजा को ब्लैकमेल करता है और उसकी जिंदगी में उथल-पुथल मचा देता है। इस फिल्म में अक्षय ने एक ही समय पर सकारात्मक और नकारात्मक शेड वाले दो बिल्कुल अलग किरदार निभाए थे। राजा के मुकाबले रॉकी का अंदाज ज्यादा हिंसक और खतरनाक था, जिसने अभिनेता की अभिनय क्षमता का अलग पक्ष दर्शकों के सामने रखा।

इसके बाद साल 2000 में अक्षय कुमार फिल्म ‘खिलाड़ी 420’ में नजर आए। यह भी उनके करियर की उन फिल्मों में शामिल है,जिसमें उन्होंने डबल रोल के जरिए अपने अभिनय का अलग रंग दिखाया। फिल्म में उनके दो किरदार देव कुमार मल्होत्रा और आनंद कुमार मल्होत्रा थे। देव एक शातिर और धोखेबाज ठग था,जो कर्ज में डूबा हुआ था। हालाँकि,वह खुद को बाहर से एक सफल और सभ्य कारोबारी के तौर पर पेश करता था। उसका असली मकसद लोगों को धोखा देकर अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करना था।

देव कुमार मल्होत्रा अमीर कारोबारी श्याम प्रसाद भारद्वाज की इकलौती बेटी रितु को अपने प्रेमजाल में फँसा लेता है। वह उससे शादी कर लेता है और बाद में उसके पिता की हत्या कर संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश करता है। जब रितु को देव की असलियत का पता चलता है, तो वह आत्मरक्षा में उसकी हत्या कर देती है। इसके बाद कहानी में देव के भाई आनंद की एंट्री होती है। आनंद को जब अपने भाई के काले कारनामों और रितु की बेगुनाही का पता चलता है,तो वह उसकी मदद करने का फैसला करता है। इस फिल्म में अक्षय का नकारात्मक किरदार चालाकी, धोखे और लालच से भरा हुआ था।

अक्षय कुमार के खलनायक वाले किरदारों में साल 2001 की फिल्म ‘अजनबी’ का नाम खास तौर पर लिया जाता है। सस्पेंस थ्रिलर इस फिल्म में उन्होंने विक्रम बजाज यानी विक्की नाम के बेहद चालाक और नकारात्मक किरदार को निभाया था। फिल्म में उनका किरदार रहस्यमय और खतरनाक था। अक्षय ने इस भूमिका में अपनी सामान्य हीरो वाली छवि से पूरी तरह अलग अंदाज अपनाया। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों से काफी सराहना मिली और इसी दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें अपने करियर का पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी मिला।

‘अजनबी’ में अक्षय के अभिनय ने यह साबित किया कि वह सिर्फ एक्शन और कॉमेडी तक सीमित अभिनेता नहीं हैं। वह किसी किरदार के नकारात्मक पक्ष को भी प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतार सकते हैं। फिल्म में उनके किरदार की चालाकी और रहस्यमय व्यवहार ने कहानी के रोमांच को बढ़ाया। यही वजह है कि आज भी अक्षय कुमार के विलेन किरदारों की चर्चा होती है तो ‘अजनबी’ का विक्की सबसे पहले याद आने वाले पात्रों में शामिल रहता है।

इसके करीब एक दशक बाद अक्षय कुमार ने 2013 में आई फिल्म ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा’ में अंडरवर्ल्ड डॉन शोएब खान का किरदार निभाया। यह फिल्म 2010 में आई ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई’ की अगली कड़ी थी। पहली फिल्म में शोएब के युवा किरदार को इमरान हाशमी ने निभाया था,जबकि अगली कहानी में यही किरदार अक्षय कुमार के रूप में सामने आया। फिल्म की कहानी में शोएब अब अपने गुरु सुल्तान मिर्जा की हत्या कर मुंबई की अंडरवर्ल्ड दुनिया का सबसे शक्तिशाली डॉन बन चुका था।

शोएब खान का किरदार सत्ता,अपराध और महत्वाकांक्षा से जुड़ा हुआ था। अक्षय ने इस भूमिका में अपने सामान्य एक्शन हीरो वाले अंदाज से अलग अंडरवर्ल्ड डॉन की छवि पेश करने की कोशिश की। हालाँकि, इस किरदार को दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली और इसे उनके सबसे प्रभावशाली नकारात्मक किरदारों में नहीं गिना जाता,लेकिन इस फिल्म ने यह जरूर दिखाया कि अक्षय अपनी स्थापित छवि को छोड़कर अपराध की दुनिया से जुड़े किरदार निभाने के लिए भी तैयार हैं।

इसके बाद साल 2018 में आई फिल्म ‘2.0’ में अक्षय कुमार ने एक बेहद अनोखा और चुनौतीपूर्ण नकारात्मक किरदार निभाया। इस फिल्म में वह पक्षीराजन यानी डॉक्टर रिचर्ड और पक्षी राजन के रूप में नजर आए। उनका किरदार एक प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिप्रेमी वैज्ञानिक का था,जिसका जीवन पक्षियों की रक्षा और उनकी देखभाल के लिए समर्पित था। कहानी में परिस्थितियाँ उसे एक ऐसे किरदार में बदल देती हैं,जो इंसानों और मोबाइल फोन से निकलने वाले विकिरण को पक्षियों के लिए खतरा मानता है और इसके खिलाफ एक खतरनाक संघर्ष शुरू कर देता है।

‘2.0’ में अक्षय का लुक भी उनके पिछले किरदारों से बिल्कुल अलग था। पक्षीराजन के किरदार को प्रभावी बनाने के लिए अभिनेता को भारी प्रोस्थेटिक मेकअप से गुजरना पड़ा था। इस खतरनाक और अनोखे रूप को तैयार करने में उन्हें रोजाना करीब चार से छह घंटे तक मेकअप कराना पड़ता था। किरदार की शारीरिक बनावट और लुक ने फिल्म की रिलीज से पहले ही काफी चर्चा बटोरी थी। यह भूमिका केवल अभिनय के लिहाज से ही चुनौतीपूर्ण नहीं थी,बल्कि इसके लिए अक्षय को लंबे समय तक मेकअप प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

पक्षीराजन का किरदार भी बाकी खलनायकों से अलग था। वह सिर्फ अपराधी या सत्ता का भूखा व्यक्ति नहीं था,बल्कि उसके पीछे पक्षियों और पर्यावरण को बचाने की एक सोच थी। हालाँकि,अपने उद्देश्य को हासिल करने का उसका तरीका खतरनाक और विनाशकारी हो जाता है। यही विरोधाभास इस किरदार को दिलचस्प बनाता है। फिल्म में अक्षय ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई,जिसकी भावनाओं और विचारों को समझा जा सकता है,लेकिन जिसके तरीके उसे कहानी का मुख्य विरोधी बना देते हैं।

अब अक्षय कुमार एक बार फिर क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘हैवान’ में खलनायक के किरदार के साथ दर्शकों के सामने आने वाले हैं। फिल्म में उनके विलेन वाले अवतार को लेकर पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है। खास बात यह है कि अक्षय की पर्दे पर बनी एक्शन और कॉमेडी हीरो की छवि के कारण उनका नकारात्मक किरदार दर्शकों के लिए और भी दिलचस्प हो सकता है। उनके पिछले अनुभवों को देखते हुए यह देखना खास होगा कि इस बार वह अपने विलेन के किरदार में किस तरह का नया अंदाज लेकर आते हैं।

अक्षय कुमार का करियर इस बात का उदाहरण है कि कोई भी अभिनेता केवल एक छवि में बँधा नहीं रह सकता। उन्होंने जहाँ एक तरफ एक्शन और कॉमेडी में अपनी अलग पहचान बनाई, वहीं ‘अजनबी’, ‘अफलातून’, ‘खिलाड़ी 420’, ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा’ और ‘2.0’ जैसी फिल्मों में नकारात्मक किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता के दूसरे पहलू भी दिखाए। अब ‘हैवान’ के जरिए वह एक बार फिर खलनायक की भूमिका में दिखाई देंगे। ऐसे में फिल्म के जरिए यह देखने का मौका मिलेगा कि अक्षय कुमार अपने पुराने विलेन किरदारों से कितना अलग और नया रूप दर्शकों के सामने पेश करते हैं।