दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा (तस्वीर क्रेडिट@sputnik_afrique)

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति रामाफोसा,12 सितंबर को आएँगे भारत

केप टाउन,10 सितंबर (युआईटीवी)- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएँगे। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने बुधवार को रामाफोसा की भारत यात्रा की जानकारी दी। दो दिवसीय यह शिखर सम्मेलन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा, जिसकी मेजबानी इस वर्ष भारत कर रहा है। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग, सतत विकास और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के भारत दौरे को दोनों देशों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी संघर्ष, बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने विकासशील देशों के सामने कई नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। ऐसे समय में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए सदस्य देश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करने पर विचार करेंगे।

शिखर सम्मेलन में जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश का विस्तार प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगा। इसके अलावा वित्तीय और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने तथा संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने पर भी चर्चा होगी। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, रामाफोसा अपनी भारत यात्रा के दौरान देश के कूटनीतिक और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर देंगे।

रामाफोसा की प्राथमिकताओं में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना, निवेश के नए अवसर तलाशना, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना शामिल है। इसके साथ ही अफ्रीकी महाद्वीप में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अधिक निवेश आकर्षित करने पर भी उनका जोर रहेगा। दक्षिण अफ्रीका इन प्रयासों को अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र के उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ाना चाहता है,ताकि अफ्रीकी देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सके और आर्थिक एकीकरण मजबूत हो।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ब्रिक्स बिजनेस फोरम लीडर्स डायलॉग में भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के नेताओं के साथ कारोबारी प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यहां व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, कृषि, महिला नेतृत्व वाले विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत करना और निजी क्षेत्र के लिए निवेश तथा सहयोग के नए अवसर तलाशना है।

ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल और ब्रिक्स वुमेन्स बिजनेस अलायंस के दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मंच खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ब्रिक्स सहयोग के जरिए अपने व्यापारिक और निवेश संबंधों का विस्तार करना चाहता है। अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास और नई तकनीक में निवेश बढ़ाने को भी दक्षिण अफ्रीका महत्वपूर्ण मानता है।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र होगा, जिसका विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के भविष्य को आकार देना’ रखा गया है। इन सत्रों में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में नई दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया जाएगा। इसमें शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं और सदस्य देशों के बीच बनी सहमति को शामिल किया जाएगा। वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, आर्थिक सहयोग और साझा विकास से जुड़े मुद्दों पर ब्रिक्स देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को घोषणा-पत्र के जरिए सामने लाया जा सकता है।

रामाफोसा के साथ दक्षिण अफ्रीका के अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मंत्री रोनाल्ड लामोला, राष्ट्रपति कार्यालय में मंत्री खुम्बुदजो न्त्शावहेनी और व्यापार, उद्योग एवं प्रतिस्पर्धा के उपमंत्री जुको गोडलिम्पी भी भारत आएंगे। दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से शिखर सम्मेलन के दौरान राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला 18वां शिखर सम्मेलन इसी अध्यक्षता के तहत होने वाला प्रमुख आयोजन है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मूल विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ है। यह विषय वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों के बीच सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और सामूहिक रूप से चुनौतियों का सामना करने की दिशा को दर्शाता है।

भारत की अध्यक्षता का दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मानवता प्रथम’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित सोच को प्रतिबिंबित करता है। इसके तहत ब्रिक्स के भीतर साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। विकास, तकनीक,व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश भी इस मंच के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

ब्रिक्स का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। वर्तमान में इसके सदस्य देशों में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, क्यूबा, बोलिविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाइलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों के तौर पर समूह से जुड़े हैं।

ब्रिक्स के बढ़ते दायरे को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। समूह के सदस्य देश विश्व की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली बैठक में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार और बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की माँग भी प्रमुखता से उठ सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश ब्रिक्स के साथ-साथ द्विपक्षीय आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठकों में अफ्रीका के विकास, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों को भी विशेष महत्व मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में वैश्विक दक्षिण के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। रामाफोसा की भागीदारी से दक्षिण अफ्रीका की प्राथमिकताओं को समूह के साझा एजेंडे में प्रमुखता मिलने की उम्मीद है। अब सभी की नजर नई दिल्ली में होने वाली बैठकों और शिखर सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले घोषणा-पत्र पर रहेगी, जिसमें वैश्विक सहयोग, आर्थिक विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था को लेकर सदस्य देशों की साझा दिशा सामने आएगी।