13 साल बाद पूर्व क्षेत्र बना दलीप ट्रॉफी चैंपियन (तस्वीर क्रेडिट@TATUPREM5555)

13 साल बाद पूर्व क्षेत्र बना दलीप ट्रॉफी चैंपियन,ड्रॉ फाइनल में पहली पारी की बढ़त ने दिलाया खिताब

चेन्नई,11 सितंबर (युआईटीवी)- ईशान किशन की कप्तानी वाली पूर्व क्षेत्र की टीम ने आखिरकार 13 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में पूर्व क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र के बीच खेला गया फाइनल मुकाबला पाँचवें दिन ड्रॉ पर समाप्त हुआ,लेकिन मैच का नतीजा पहली पारी में ही लगभग तय हो गया था। पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद दक्षिण क्षेत्र को 336 रन पर समेट दिया था। इस तरह उसे पहली पारी में 372 रन की बड़ी बढ़त मिली,जो अंत में चैंपियन बनने के लिए पर्याप्त साबित हुई।

फाइनल मुकाबले में पूर्व क्षेत्र ने शुरुआत से ही अपनी स्थिति मजबूत रखी। टीम के बल्लेबाजों ने पहली पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद पूर्व क्षेत्र के गेंदबाजों के सामने दक्षिण क्षेत्र के बल्लेबाजों के लिए टिकना आसान नहीं रहा। तिलक वर्मा की अगुआई वाली दक्षिण क्षेत्र की टीम अपनी पहली पारी में 336 रन ही बना सकी। इस तरह दोनों टीमों के बीच 372 रन का अंतर रहा और यही अंतर मुकाबले में निर्णायक साबित हुआ।

पूर्व क्षेत्र की पहली पारी में कप्तान ईशान किशन का बल्ला जमकर बोला। उन्होंने शानदार दोहरा शतक लगाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईशान की इस पारी ने न केवल टीम को मजबूत आधार दिया, बल्कि फाइनल में पूर्व क्षेत्र के दबदबे की नींव भी रख दी। उनके अलावा कुमार कुशाग्र ने भी शतक लगाकर टीम के बड़े स्कोर में अहम योगदान दिया। बल्लेबाजों के सामूहिक प्रदर्शन का नतीजा यह रहा कि पूर्व क्षेत्र ने 700 रन का आँकड़ा पार करते हुए दक्षिण क्षेत्र के सामने बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी।

दक्षिण क्षेत्र की पहली पारी 336 रन पर खत्म होने के बाद पूर्व क्षेत्र के पास 372 रन की बड़ी बढ़त थी। इस बढ़त ने मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल दी। फाइनल के चौथे दिन तक यह स्पष्ट हो गया था कि दक्षिण क्षेत्र के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल होगा। बुधवार को दिन का खेल खत्म होने तक पूर्व क्षेत्र ने अपनी दूसरी पारी में पांच विकेट पर 212 रन बना लिए थे। पहली पारी की बढ़त को जोड़ने के बाद उसकी कुल बढ़त 584 रन तक पहुँच चुकी थी। ऐसे में दक्षिण क्षेत्र के पास मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने का लगभग कोई रास्ता नहीं बचा था।

पाँचवें दिन पूर्व क्षेत्र ने अपनी दूसरी पारी में भी बल्लेबाजी जारी रखी। टीम का लक्ष्य किसी जल्दबाजी में परिणाम हासिल करना नहीं,बल्कि अपनी स्थिति को और मजबूत करना था। इसी दौरान मोहम्मद कौनेन कुरैशी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपने प्रथम श्रेणी करियर का पहला शतक पूरा किया। उन्होंने नाबाद 116 रन की पारी खेली और अपनी टीम की बढ़त को और बड़ा कर दिया। कुरैशी ने मैदान पर धैर्य दिखाते हुए दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों का सामना किया और अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील किया।

कुरैशी को अनुकूल राय का भी अच्छा साथ मिला। दोनों ने सातवें विकेट के लिए 150 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। यह साझेदारी उस समय हुई,जब पूर्व क्षेत्र पहले ही मुकाबले में पूरी तरह मजबूत स्थिति में था। इसके बावजूद दोनों बल्लेबाजों ने आक्रामकता के बजाय संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए टीम की बढ़त को लगातार बढ़ाया। उनकी साझेदारी ने दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में सात विकेट पर 388 रन बनाए और उसकी कुल बढ़त 760 रन तक पहुँच गई।

इसके बाद मुकाबले को आगे बढ़ाने की कोई वास्तविक जरूरत नहीं रह गई थी। पूर्व क्षेत्र के पास इतनी बड़ी बढ़त थी कि दक्षिण क्षेत्र के लिए जीत तो दूर,मुकाबले को बचाना भी लगभग असंभव हो चुका था। दोनों टीमों ने परिस्थितियों को देखते हुए मैच समाप्त करने का फैसला किया। दोपहर करीब 2 बजकर 10 मिनट पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया। हालाँकि,स्कोरकार्ड पर मैच का परिणाम ड्रॉ रहा,लेकिन पहली पारी में मिली 372 रन की बढ़त के कारण खिताब पूर्व क्षेत्र के नाम रहा।

पूर्व क्षेत्र की इस जीत में कप्तान ईशान किशन की भूमिका केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने पहली पारी में दोहरा शतक लगाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया और फिर कप्तान के तौर पर भी परिस्थितियों के अनुसार फैसले लिए। फाइनल के बाद ईशान ने मुकाबले की रणनीति को लेकर कहा कि टीम ने लगभग दो दिन बल्लेबाजी की और सभी खिलाड़ी जानते थे कि यह मुख्य रूप से पहली पारी की बढ़त हासिल करने का मुकाबला है। जब टीम के पास खिताब जीतने के लिए पर्याप्त बढ़त मौजूद थी, तब गर्म परिस्थितियों में दोबारा अनावश्यक जोखिम लेने की जरूरत नहीं थी।

ईशान की कप्तानी में पूर्व क्षेत्र ने पूरे मुकाबले में धैर्य दिखाया। टीम ने पहली पारी में विशाल स्कोर बनाने के बाद गेंदबाजी में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई और दक्षिण क्षेत्र को 336 रन पर रोक दिया। इसके बाद दूसरी पारी में बल्लेबाजों ने समय लेकर टीम की बढ़त को 700 रन के पार पहुँचा दिया। इस रणनीति ने अंततः टीम को लंबे समय बाद दलीप ट्रॉफी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

इस ऐतिहासिक जीत में अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की मौजूदगी भी पूर्व क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ फाइनल मुकाबला शमी के प्रथम श्रेणी करियर का 100वां मैच भी था। इतने लंबे अनुभव वाले गेंदबाज का युवा खिलाड़ियों से सजी टीम में होना पूर्व क्षेत्र के लिए बड़ी मजबूती रही। शमी ने अपने अनुभव के जरिए टीम के युवा खिलाड़ियों को भी महत्वपूर्ण परिस्थितियों में आत्मविश्वास दिया। उनके करियर के इस खास पड़ाव पर टीम की खिताबी जीत ने मुकाबले को और यादगार बना दिया।

झारखंड के उनके साथी शिखर मोहन ने भी फाइनल में उपयोगी अर्धशतकीय पारी खेलकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का परिचय दिया। वहीं कुमार कुशाग्र ने शतक लगाकर पहली पारी के विशाल स्कोर को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूर्व क्षेत्र की जीत किसी एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं रही। टीम के बल्लेबाजों ने बड़ी साझेदारियाँ कीं,गेंदबाजों ने विपक्षी टीम को दबाव में रखा और कप्तान ने पूरे मुकाबले के दौरान परिस्थितियों के अनुसार रणनीति अपनाई।

पूर्व क्षेत्र के लिए यह खिताब इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि टीम को दलीप ट्रॉफी जीतने के लिए 13 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। इससे पहले पूर्व क्षेत्र ने लगातार दो सत्रों में यह प्रतिष्ठित घरेलू खिताब अपने नाम किया था। टीम ने 2011-12 और 2012-13 सत्र में दलीप ट्रॉफी जीती थी। इसके बाद लंबे समय तक टीम इस ट्रॉफी से दूर रही। अब ईशान किशन की कप्तानी में खिताब जीतकर पूर्व क्षेत्र ने एक बार फिर घरेलू क्रिकेट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

इस जीत के साथ पूर्व क्षेत्र ने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अपना तीसरा खिताब दर्ज कर लिया। लगातार दो खिताब जीतने के बाद 13 साल का इंतजार और फिर चेन्नई में दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ फाइनल में मिली सफलता टीम के लिए विशेष उपलब्धि बन गई। खास बात यह रही कि फाइनल का फैसला किसी रोमांचक अंतिम दिन या आखिरी विकेट के आधार पर नहीं हुआ,बल्कि पहली पारी में पूर्व क्षेत्र की शानदार बल्लेबाजी और उसके बाद गेंदबाजों के प्रभावी प्रदर्शन ने मैच का रुख तय कर दिया था।

दक्षिण क्षेत्र की टीम के लिए फाइनल का परिणाम निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उसकी चुनौती शुरुआत से ही कठिन हो गई थी। पहली पारी में 708 रन के जवाब में 336 रन तक पहुँचना पर्याप्त नहीं था और 372 रन की कमी ने उसे मुकाबले में काफी पीछे कर दिया। दूसरी पारी में पूर्व क्षेत्र ने जब अपनी बढ़त को 760 रन तक पहुँचा दिया,तब दक्षिण क्षेत्र के लिए मैच बचाने की संभावनाएँ भी लगभग समाप्त हो गई थीं।

पूर्व क्षेत्र की इस खिताबी जीत ने यह भी साबित किया कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पहली पारी की बढ़त कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर बनाया,विपक्षी टीम को दबाव में रखा और फिर दूसरी पारी में बिना किसी जल्दबाजी के अपनी स्थिति मजबूत की। मैच ड्रॉ होने के बावजूद पूर्व क्षेत्र की पहली पारी की बढ़त उसे चैंपियन बनाने के लिए पर्याप्त रही।

इस तरह चेन्नई का फाइनल पूर्व क्षेत्र के लिए लंबे इंतजार के बाद आई बड़ी खुशी लेकर आया। ईशान किशन का दोहरा शतक, कुमार कुशाग्र का शतक, मोहम्मद कौनेन कुरैशी का नाबाद शतक,अनुकूल राय के साथ उनकी 150 रन की साझेदारी और मोहम्मद शमी के 100वें प्रथम श्रेणी मैच की उपलब्धि ने इस अभियान को यादगार बना दिया। 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी पर कब्जा करके पूर्व क्षेत्र ने न केवल अपना तीसरा खिताब जीता, बल्कि घरेलू क्रिकेट के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में एक बार फिर अपनी वापसी का मजबूत संकेत भी दिया।