अदन (यमन),14 सितंबर (युआईटीवी)- यमन में हूती विद्रोहियों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना के बीच संघर्ष एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। सरकारी सेना ने रविवार को दावा किया कि देश के पश्चिमी तटीय इलाकों में करीब एक महीने तक चले भीषण संघर्ष में उसके 500 से अधिक सैनिक मारे गए, जबकि लगभग 1,500 सैनिक घायल हुए हैं। सेना के अनुसार,इस दौरान हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य की ओर तेजी से बढ़त बनाई और लाल सागर के तटीय क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण इलाकों पर अपना नियंत्रण मजबूत किया।
यमन की सरकारी सेना की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज ने एक बयान में बताया कि 9 अगस्त से 10 सितंबर के बीच हुई लड़ाई में ये हताहत हुए। सेना ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान हूती विद्रोहियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसके मुताबिक,इस अवधि में 1,000 से अधिक हूती लड़ाके मारे गए और हजारों अन्य घायल हुए हैं। हालाँकि,इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील होने के कारण वास्तविक हताहतों की संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकारी सेना के अनुसार,हालिया संघर्ष की शुरुआत हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए बड़े हमलों के बाद हुई। इन हमलों में मिसाइलों,ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद लड़ाई लाल सागर के तटीय क्षेत्र में तेजी से फैलती गई। शुरुआती संघर्ष होदेदाह प्रांत के दक्षिणी हिस्से में स्थित हैस इलाके के आसपास हुआ और बाद में यह पड़ोसी दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत के कई क्षेत्रों तक पहुँच गया।
सेना का कहना है कि 3 सितंबर से हूती विद्रोहियों ने अपने हमलों को और तेज कर दिया। इसके बाद यमन के लाल सागर तट पर सैन्य स्थिति तेजी से बदलने लगी। हूती बलों ने होदेदाह और ताइज प्रांत में सरकार के नियंत्रण वाले कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद हूती विद्रोहियों के लिए दक्षिण दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया।
संघर्ष में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम गुरुवार को सामने आया,जब हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक महत्व वाले बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने का दावा किया। मोखा लाल सागर के तट पर स्थित महत्वपूर्ण शहर है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे यमन के पश्चिमी तट की सैन्य और समुद्री गतिविधियों के लिहाज से अहम बनाती है। शहर पर नियंत्रण के बाद हूती बलों ने अपनी सैन्य कार्रवाई को और दक्षिण की ओर बढ़ाया।
अगले दिन यानी शुक्रवार को हूती लड़ाके बाब-अल-मंदब क्षेत्र की ओर बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने जलडमरूमध्य के बीच स्थित मायून द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया। मायून द्वीप की स्थिति बेहद रणनीतिक है,क्योंकि यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बीच स्थित है। इस क्षेत्र पर नियंत्रण से हूती विद्रोहियों की रणनीतिक स्थिति मजबूत होने का दावा किया जा रहा है।
बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता एशिया,मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के बीच समुद्री आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी सशस्त्र समूह की सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है।
मायून द्वीप पर नियंत्रण के बाद हूती बलों ने अपनी बढ़त को और दक्षिण की ओर बढ़ाने की कोशिश की। उनकी अगली दिशा पड़ोसी लहज प्रांत की ओर बताई गई है। सरकारी सेना के जिन बलों ने पश्चिमी तटीय इलाकों से पीछे हटकर खुद को पुनर्गठित किया था, वे इसी क्षेत्र में दोबारा सैन्य स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस वजह से संघर्ष अब यमन की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रमुख केंद्र अदन के और करीब पहुंच गया है।
इस बीच हूती पक्ष की ओर से संघर्ष के दौरान अपने कैद सदस्यों की रिहाई का भी दावा किया गया है। एक हूती सैन्य अधिकारी ने बताया कि हूती बलों ने सैन्य कार्रवाई के दौरान एक जेल पर कब्जा किया और वहाँ बंद अपने 210 सदस्यों को मुक्त करा लिया। अधिकारी ने पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि यह कार्रवाई मोखा शहर पर कब्जे के बाद की गई।
अधिकारी के अनुसार,गुरुवार को हूती लड़ाकों ने मोखा शहर पर नियंत्रण हासिल करने के बाद सरकार द्वारा संचालित जेल में प्रवेश किया। उनका दावा है कि सरकारी बल पीछे हटने से पहले सभी 210 कैदियों को जेल के एक बड़े हॉल में बंद कर गए थे। इसके बाद हूती लड़ाकों ने जेल पर नियंत्रण स्थापित किया और वहाँ मौजूद सभी कैदियों को रिहा कर दिया।
यमन में लंबे समय से चल रहा संघर्ष हाल के घटनाक्रम के साथ एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। पश्चिमी तटीय इलाकों में हूती विद्रोहियों की बढ़त से सरकारी सेना पर दबाव बढ़ा है। खासकर मोखा,मायून द्वीप और बाब-अल-मंदब क्षेत्र में नियंत्रण को लेकर सैन्य स्थिति का बदलना संघर्ष को रणनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना रहा है।
सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों की ओर से सामने आए हताहतों के आँकड़े फिलहाल दावों तक सीमित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी जिस तेजी से संघर्ष होदेदाह और ताइज से बढ़कर मोखा,मायून और बाब-अल-मंदब तक पहुँचा है,उससे यमन में सुरक्षा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी बलों के अदन के करीब पुनर्गठन और हूती बलों की दक्षिण की ओर बढ़त के बीच आने वाले दिनों में पश्चिमी और दक्षिणी यमन में संघर्ष और तेज होने की आशंका बनी हुई है।
हालिया घटनाक्रम ने यमन के आंतरिक संघर्ष को एक बार फिर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में ला दिया है। विशेष रूप से बाब-अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के आसपास सैन्य गतिविधियाँ बढ़ने से इसका प्रभाव यमन की सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संघर्ष को और फैलने से रोकने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
