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भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र बना निवेशकों की पहली पसंद,अब तक जुटाए 1.4 अरब डॉलर

नई दिल्ली,14 सितंबर (युआईटीवी)- भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेश का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अब तक 281 वित्तपोषित कंपनियों के माध्यम से कुल 1.4 अरब डॉलर की इक्विटी फंडिंग जुटाई जा चुकी है। खास बात यह है कि इस कुल निवेश में से करीब 701 मिलियन डॉलर यानी लगभग आधा हिस्सा 2025 के बाद आया है। यह आँकड़ा बताता है कि भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को लेकर निवेशकों का भरोसा तेजी से मजबूत हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस समय सेमीकंडक्टर से संबंधित 3,557 कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें से 281 कंपनियाँ ऐसी हैं, जिन्हें किसी न किसी स्तर पर फंडिंग मिली है। वहीं 142 कंपनियां इक्विटी निवेश जुटाने में सफल रही हैं। वर्ष 2026 में अब तक भी इस क्षेत्र के लिए निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है और इस साल अकेले सेमीकंडक्टर उद्योग ने 228 मिलियन डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार में निवेश की गति अभी धीमी पड़ने के बजाय लगातार आगे बढ़ रही है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में बढ़ते निवेश को भारत की तकनीकी और विनिर्माण क्षमता के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। दुनिया भर में सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को लेकर रणनीतिक बदलाव हो रहे हैं। कई देश किसी एक बाजार या क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए उत्पादन और आपूर्ति के नए केंद्र विकसित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत अपनी बड़ी घरेलू माँग,बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और कुशल तकनीकी मानव संसाधन के कारण निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है।

भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर बढ़ती गतिविधियों के बीच 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2026 सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्योग जगत की नजर इस आयोजन पर इसलिए भी है क्योंकि इससे भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति,विनिर्माण क्षमता, डिजाइन क्षेत्र और वैश्विक कंपनियों के साथ संभावित सहयोग को लेकर नई दिशा सामने आने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजाइन के प्रमुख केंद्रों में शामिल करना है।

रिपोर्ट के अनुसार,इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज यानी ईएमएस भारत के सेमीकंडक्टर से जुड़े क्षेत्र में सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित करने वाला खंड रहा है। 2025 के बाद से इस क्षेत्र में 313 मिलियन डॉलर का निवेश आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की बढ़ती माँग और देश में विनिर्माण क्षमता के विस्तार के कारण ईएमएस क्षेत्र को आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू और वैश्विक कंपनियों के भारत में उत्पादन बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

एम्बेडेड हार्डवेयर भी निवेशकों की नजर में तेजी से उभरता क्षेत्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस खंड ने 51.9 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है। खास बात यह है कि इसमें आई पूरी राशि पिछले 12 महीनों के दौरान प्राप्त हुई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि केवल पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तक सीमित नहीं है,बल्कि हार्डवेयर डिजाइन और उससे जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही है।

इसके अलावा पावर मैनेजमेंट इंटीग्रेटेड सर्किट और फैबलेस सेमीकंडक्टर विनिर्माता भी निवेश के लिहाज से प्रमुख श्रेणियों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों का महत्व इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, ऊर्जा और अन्य तकनीकी उद्योगों में बढ़ती माँग के कारण लगातार बढ़ रहा है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में घरेलू कंपनियों के लिए भी विस्तार की संभावनाएँ बन रही हैं।

भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश की तेजी को पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में इस क्षेत्र में वार्षिक फंडिंग केवल 49 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई और 2025 में यह आँकड़ा 473 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया। इस अवधि में क्षेत्र ने 36 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की। इतनी तेज वृद्धि यह दर्शाती है कि सेमीकंडक्टर से जुड़ी भारतीय कंपनियां निवेशकों के लिए लगातार अधिक आकर्षक होती जा रही हैं।

इस वृद्धि के पीछे कई कारण बताए गए हैं। सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। इसके साथ ही भारत सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए देश में चिप निर्माण और उससे जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक कंपनियाँ भी अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने पर जोर दे रही हैं। ऐसे में भारत को नए उत्पादन और तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित होने का अवसर मिला है।

घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में तेजी भी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए सकारात्मक साबित हो रही है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ऑटोमोबाइल, संचार प्रणाली और अन्य तकनीकी उत्पादों की माँग बढ़ने से चिप और संबंधित घटकों की जरूरत भी बढ़ रही है। इससे सेमीकंडक्टर से जुड़ी भारतीय कंपनियों के लिए बाजार का आकार बढ़ रहा है और निवेशकों को भविष्य में विस्तार की संभावनाएँ दिखाई दे रही हैं।

शहरों के स्तर पर देखें तो बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर केंद्र बनकर उभरा है। यहां 626 सेमीकंडक्टर से संबंधित कंपनियाँ मौजूद हैं,जो देश की कुल कंपनियों का करीब 18 प्रतिशत है। तकनीकी प्रतिभा,अनुसंधान एवं विकास की मजबूत व्यवस्था और लंबे समय से मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी का आधार बेंगलुरु को इस क्षेत्र में बढ़त देता है।

फंडिंग के मामले में भी बेंगलुरु सबसे आगे है। अब तक जुटाई गई कुल इक्विटी फंडिंग में शहर की हिस्सेदारी 40.1 प्रतिशत रही है। इसके बाद नोएडा, गुरुग्राम, कोच्चि और हैदराबाद जैसे शहर महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर केंद्रों के रूप में उभरे हैं। इन शहरों में तकनीकी प्रतिभा, औद्योगिक आधार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के कारण इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है।

रिपोर्ट में भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए निकास के रास्तों का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार, अधिग्रहण कंपनियों के लिए सबसे लोकप्रिय निकास विकल्प बना हुआ है। अब तक इस क्षेत्र में 62 अधिग्रहण दर्ज किए गए हैं। वहीं 42 कंपनियाँ प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के जरिए सार्वजनिक बाजार तक पहुँच चुकी हैं। यह आँकड़ा बताता है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनियों के लिए निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ आगे चलकर बड़े बाजार तक पहुँचने के रास्ते भी खुल रहे हैं।

किसी कंपनी को पहली बार फंडिंग मिलने से लेकर उसके अधिग्रहण तक पहुँचने में औसतन 11.8 वर्ष का समय लगा। वहीं जिन कंपनियों ने आईपीओ के जरिए सार्वजनिक बाजार में प्रवेश किया, उन्हें पहली फंडिंग से आईपीओ तक पहुँचने में औसतन 16.5 वर्ष लगे। इससे पता चलता है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनियों के विकास और परिपक्व होने में लंबा समय लग सकता है, लेकिन सफल कंपनियों के लिए अधिग्रहण और सार्वजनिक बाजार दोनों महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

कुल मिलाकर भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब केवल सरकारी नीति का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि निजी निवेशकों और वैश्विक कंपनियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। 1.4 अरब डॉलर की कुल इक्विटी फंडिंग और हाल के वर्षों में निवेश की तेज वृद्धि इस बदलाव को स्पष्ट करती है। आने वाले समय में सेमीकॉन इंडिया 2026 जैसे आयोजनों, सरकारी प्रोत्साहन और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव के बीच भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के और तेजी से विस्तार की उम्मीद है। इससे देश के लिए विनिर्माण, तकनीकी नवाचार, रोजगार और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।