ब्रिक्स सम्मेलन में दिखी दोस्ती की गर्माहट (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ब्रिक्स सम्मेलन में दिखी दोस्ती की गर्माहट,मोदी-पुतिन-शी की तस्वीर से लेकर रंगोली तक छाए रहे खास पल

नई द‍िल्‍ली,14 सितंबर (युआईटीवी)- भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित हुआ। दो दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सहयोग, विकास, नवाचार, स्थिरता और बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बार सम्मेलन की केंद्रीय थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ रही। सम्मेलन के औपचारिक सत्रों में जहां सदस्य देशों के बीच साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ, वहीं आयोजन से इतर कई ऐसे अनौपचारिक और आत्मीय पल भी देखने को मिले,जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब केवल देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह समाधान आधारित एक ऐसा इकोसिस्टम बन रहा है, जो वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ा सकता है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि नई दिल्ली घोषणा साझा दृष्टिकोण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने ब्रिक्स के अगले मेजबान चीन को भी शुभकामनाएं दीं।

हालांकि सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण नीतिगत और कूटनीतिक चर्चाएँ हुईं,लेकिन इस दौरान सामने आईं कुछ तस्वीरें और अनौपचारिक मुलाकातें भी खास चर्चा का विषय बनीं। इनमें सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला पल तब देखने को मिला,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक साथ नजर आए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक हाथ से राष्ट्रपति पुतिन का हाथ थामा हुआ था,जबकि दूसरे हाथ से उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हाथ पकड़ रखा था। तीनों नेताओं के चेहरे पर दिखाई दे रही मुस्कान ने इस दृश्य को और खास बना दिया।

यह तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि भारत,रूस और चीन तीनों ही वैश्विक स्तर पर प्रभाव रखने वाले प्रमुख देश हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई तरह के भू-राजनीतिक तनावों और बदलते शक्ति समीकरणों से गुजर रही है,तीनों नेताओं का इस तरह एक साथ दिखाई देना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया। सम्मेलन में तीनों देशों के नेताओं के बीच संवाद और मुलाकातों पर भी पूरी दुनिया की नजर रही। कैमरे में कैद यह आत्मीय क्षण कूटनीतिक गतिविधियों के बीच मानवीय गर्मजोशी की झलक देता नजर आया।

भारत मंडपम के बाहर आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान भी नेताओं के बीच आत्मीयता का एक खास दृश्य देखने को मिला। ब्रिक्स देशों के नेताओं ने सामूहिक रूप से पौधरोपण किया और इसके बाद समूह तस्वीर खिंचवाई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दाईं ओर खड़े रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ थामकर उन्हें अपने करीब खींचा। दोनों नेताओं के बीच दिखाई देने वाली सहजता और मित्रवत व्यवहार ने भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की गर्माहट को सामने रखा।

भारत और रूस के बीच संबंधों को लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी और पारंपरिक मित्रता के रूप में देखा जाता है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग रहा है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच दिखाई देने वाले आत्मीय क्षणों ने इस संबंध की एक अलग तस्वीर पेश की। औपचारिक कूटनीतिक चर्चाओं से अलग इन अनौपचारिक पलों ने दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संवाद और सहज संबंधों की भी झलक दिखाई।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात और तस्वीरें भी सम्मेलन के दौरान चर्चा में रहीं। एक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामे नजर आए। दोनों नेताओं के बीच इस आत्मीयता को भारत और ईरान के पुराने संबंधों के संदर्भ में भी देखा गया। ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। क्षेत्रीय परिस्थितियों और मौजूदा चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच संवाद का अपना विशेष महत्व है।

ब्रिक्स सम्मेलन में सिर्फ द्विपक्षीय मुलाकातें ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहीं,बल्कि भारत मंडपम में प्रदर्शित भारतीय सांस्कृतिक विरासत ने भी वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा। सम्मेलन स्थल को भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलकियों से सजाया गया था। भव्य और रंगीन रंगोली, भारतीय कलाकृतियाँ और सांस्कृतिक प्रतीकों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर विदेशी नेताओं को इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बारे में जानकारी देते और उन्हें भारतीय विरासत की झलक दिखाते नजर आए।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई नेताओं ने भारत की कला और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखा। सम्मेलन स्थल की सजावट में भारतीय संस्कृति के अलग-अलग रंगों को शामिल किया गया था। इससे ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को दुनिया के सामने रखने का अवसर भी बना।

सम्मेलन के दौरान वैश्विक नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत के कई दृश्य भी कैमरे में कैद हुए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई नेताओं को आपस में बातचीत करते, मुस्कुराते और सहज अंदाज में नजर आए। औपचारिक बैठकों से अलग इन पलों ने सम्मेलन के माहौल को अधिक आत्मीय और सहज बनाया।

ब्रिक्स सम्मेलन का एक सबसे महत्वपूर्ण दृश्य सामूहिक पारिवारिक तस्वीर का रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ब्रिक्स सदस्य देशों,साझेदार देशों,आमंत्रित देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख एक साथ नजर आए। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस फोटो सेशन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।

इस सामूहिक तस्वीर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक एंटोनियो गुटेरेस समेत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी मौजूद रहे। तस्वीर ने यह संदेश दिया कि ब्रिक्स का दायरा अब केवल पारंपरिक सदस्य देशों तक सीमित नहीं है,बल्कि वैश्विक दक्षिण,साझेदार देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ व्यापक सहयोग की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

सम्मेलन के समापन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सदस्य देशों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन साझा लक्ष्यों और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने वाला रहा। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को केवल देशों का समूह मानने के बजाय समाधान का इकोसिस्टम बताया। उनका कहना था कि आने वाले समय में संगठन को वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अधिक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली घोषणा को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उम्मीद जताई कि इसमें व्यक्त साझा दृष्टिकोण आने वाले समय में ब्रिक्स की दिशा को मजबूत करेगा। उन्होंने सहयोग,संवाद और सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स के अगले मेजबान के रूप में चीन को शुभकामनाएँ दीं।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन ने जहां वैश्विक मुद्दों पर संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया,वहीं इससे जुड़े अनौपचारिक पलों ने भी सम्मेलन को यादगार बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ पुतिन और शी जिनपिंग की मुस्कुराती तस्वीर, पुतिन के साथ उनका आत्मीय अंदाज, पेजेश्कियन के साथ गर्मजोशी, रंगोली और भारतीय कलाकृतियों के बीच विदेशी नेताओं की मौजूदगी तथा सभी नेताओं की सामूहिक तस्वीर ने सम्मेलन के मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष को सामने रखा।

इन तस्वीरों और मुलाकातों ने यह भी दिखाया कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति केवल औपचारिक बैठकों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं होती। कई बार नेताओं के बीच सहज बातचीत, मुस्कान और आत्मीय व्यवहार भी रिश्तों की गहराई और आपसी विश्वास का संकेत देते हैं। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ऐसे कई क्षण सामने आए,जिन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की मेजबानी, उसकी सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न देशों के साथ उसके संबंधों की अलग-अलग झलक पेश की। सम्मेलन का औपचारिक एजेंडा भले ही समाप्त हो गया हो,लेकिन इन खास पलों की तस्वीरें लंबे समय तक इसकी यादों का हिस्सा बनी रहेंगी।