उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया को देना होगा 44.6 अरब वॉन का मुआवजा (तस्वीर क्रेडिट@Independent)

उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया को देना होगा 44.6 अरब वॉन का मुआवजा,संपर्क कार्यालय गिराने पर अदालत का बड़ा फैसला

सोल,16 सितंबर (युआईटीवी)- दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने बुधवार को उत्तर कोरिया को वर्ष 2020 में अंतर-कोरियाई संपर्क कार्यालय को ध्वस्त करने के मामले में करीब 44.6 अरब वॉन का मुआवजा दक्षिण कोरियाई सरकार को देने का आदेश दिया। यह राशि लगभग 3.25 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का यह फैसला दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच आया है। अदालत ने दक्षिण कोरियाई सरकार की ओर से माँगी गई 44,626,410,722 वॉन की पूरी राशि को मंजूरी दे दी। हालाँकि, फैसले में इस निष्कर्ष के विस्तृत कानूनी कारण तत्काल उपलब्ध नहीं कराए गए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण कोरियाई सरकार ने पहली बार उत्तर कोरिया के खिलाफ सीधे किसी घटना को लेकर मुआवजे का मुकदमा दायर किया था। सरकार ने जून 2023 में संपर्क कार्यालय को गिराए जाने के मामले में उत्तर कोरिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। करीब तीन साल और तीन महीने बाद अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया है। कार्यवाही के दौरान उत्तर कोरिया की ओर से कोई प्रतिनिधि अदालत में मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अदालत ने दक्षिण कोरिया की ओर से प्रस्तुत नुकसान के दावे को स्वीकार करते हुए पूरी मांगी गई राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।

अंतर-कोरियाई संपर्क कार्यालय का निर्माण दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीदों के बीच हुआ था। अप्रैल 2018 में दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के नेताओं के बीच शिखर वार्ता हुई थी। इस वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज हुए। इसी माहौल में सितंबर 2018 में उत्तर कोरिया के सीमावर्ती शहर केसोंग में संयुक्त संपर्क कार्यालय की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखना और आदान-प्रदान तथा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए एक स्थायी माध्यम उपलब्ध कराना था।

संपर्क कार्यालय की स्थापना को उस समय अंतर-कोरियाई संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य और राजनीतिक तनाव के बावजूद इस कार्यालय के जरिए अधिकारियों के बीच संवाद की व्यवस्था बनाई गई थी। हालाँकि,यह पहल लंबे समय तक जारी नहीं रह सकी। कोरोना वायरस महामारी के कारण जनवरी 2020 में कार्यालय का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके कुछ महीने बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया और संपर्क कार्यालय विवाद का केंद्र बन गया।

16 जून 2020 को उत्तर कोरिया ने केसोंग में स्थित संपर्क कार्यालय की इमारत को विस्फोट करके पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई उस समय दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों का स्पष्ट संकेत बन गई थी। उत्तर कोरिया दक्षिण कोरियाई क्षेत्र से उत्तर कोरिया के खिलाफ भेजे जा रहे पर्चों को लेकर नाराज था। उत्तर कोरियाई दलबदलुओं से जुड़े समूहों द्वारा सीमा पार प्योंगयांग विरोधी पर्चे भेजे जाने की गतिविधियों को रोकने में दक्षिण कोरियाई सरकार की कथित विफलता को उत्तर कोरिया ने कार्रवाई की वजह बताया था।

संपर्क कार्यालय को गिराने से दक्षिण कोरिया की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय ने नुकसान का आकलन करते हुए मुख्य संपर्क कार्यालय की इमारत के लिए 10.25 अरब वॉन और उससे जुड़े सहायता केंद्र को हुए नुकसान के लिए 34.45 अरब वॉन का दावा किया था। दोनों रकम को मिलाकर कुल नुकसान 44.7 अरब वॉन के करीब बैठता था। अदालत के सामने सरकार ने इसी आधार पर 44,626,410,722 वॉन के मुआवजे की माँग रखी,जिसे अदालत ने प्रभावी रूप से पूरी तरह स्वीकार कर लिया।

दक्षिण कोरिया की ओर से यह मुकदमा जून 2023 में दायर किया गया था। सरकार ने यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना क्योंकि यह उत्तर कोरिया के खिलाफ दक्षिण कोरियाई सरकार की ओर से सीधे दायर किया गया पहला मुकदमा था। इससे पहले उत्तर कोरिया से जुड़े विवादों में निजी नागरिकों या अन्य पक्षों की ओर से कानूनी कार्रवाई के मामले सामने आए थे,लेकिन सरकार द्वारा सीधे नुकसान की भरपाई के लिए मुकदमा दायर करना अलग तरह का कदम था। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के जरिए सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का दावा सुरक्षित करने की कोशिश की।

हालांकि अदालत का फैसला दक्षिण कोरिया के पक्ष में आया है,लेकिन मुआवजे की वास्तविक वसूली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उत्तर कोरिया ने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया और उसके इस फैसले को मानकर भुगतान करने की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है। दक्षिण कोरिया के पास उत्तर कोरिया को जबरन भुगतान कराने का कोई सीधा और व्यावहारिक तरीका नहीं है। यही कारण है कि अदालत का आदेश कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद इसकी आर्थिक प्रभावशीलता सीमित रह सकती है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के सामने अब यह सवाल रहेगा कि अदालत से मिले फैसले के आधार पर वास्तविक मुआवजा किस तरह हासिल किया जाए।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही है। मंत्रालय ने संकेत दिया कि वह फैसले के बाद जरूरी कदम उठाएगा। साथ ही उसने दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद जताई है। मंत्रालय का कहना है कि लंबित मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए किया जाना चाहिए। यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अंतर-कोरियाई संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच नियमित संवाद की व्यवस्था पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है।

मामले में आगे उत्तर कोरिया की ओर से कानूनी प्रतिक्रिया आने की संभावना कम मानी जा रही है। चूँकि,सुनवाई के दौरान उत्तर कोरिया का कोई प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं था,इसलिए फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अनिश्चित है। दक्षिण कोरियाई अदालत का आदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग को लेकर कई पुराने विवाद अभी भी लंबित हैं। अदालत के फैसले से इन विवादों का तत्काल समाधान होने की संभावना नहीं है,लेकिन यह 2020 में हुई घटना को लेकर दक्षिण कोरिया की कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है।

वर्ष 2020 में संपर्क कार्यालय का ध्वस्त किया जाना अंतर-कोरियाई संबंधों में आए बड़े बदलाव का प्रतीक बन गया था। जिस इमारत की स्थापना कुछ साल पहले संवाद, सहयोग और संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी,उसका विस्फोट के जरिए नष्ट किया जाना दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाता था। अब छह साल बाद दक्षिण कोरियाई अदालत ने उसी घटना से जुड़े नुकसान के लिए उत्तर कोरिया को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि अदालत ने दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा माँगी गई पूरी राशि को स्वीकार किया है। हालाँकि,कानूनी आदेश और उसकी वास्तविक वसूली के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। उत्तर कोरिया के भुगतान न करने की स्थिति में दक्षिण कोरिया के पास सीमित व्यावहारिक विकल्प होंगे। इसके बावजूद सियोल के लिए यह फैसला सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान पर अपनी कानूनी स्थिति दर्ज कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। साथ ही एकीकरण मंत्रालय की ओर से बातचीत की उम्मीद जताए जाने से यह संकेत भी मिलता है कि कानूनी विवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच भविष्य में संवाद की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं माना जा रहा है।

इस तरह संपर्क कार्यालय को लेकर शुरू हुआ विवाद अब अदालत के फैसले तक पहुँच चुका है। एक ओर दक्षिण कोरिया को कानूनी रूप से 44.6 अरब वॉन के मुआवजे का आदेश मिल गया है,वहीं दूसरी ओर इस रकम की वास्तविक वसूली अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में इस मामले का प्रभाव केवल मुआवजे तक सीमित रहता है या दोनों देशों के बीच व्यापक संवाद और पुराने विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया पर भी असर डालता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।