अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

शी जिनपिंग से मुलाकात से पहले ट्रंप पर अमेरिकी सांसदों का दबाव,हिरासत में लिए नागरिकों और एआई चिप्स का मुद्दा गरम

वाशिंगटन,18 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच होने वाली आगामी शीर्ष स्तरीय बैठक से पहले वाशिंगटन में दोनों देशों से जुड़े दो संवेदनशील मुद्दे प्रमुखता से उठने लगे हैं। अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई को प्राथमिकता देने और चीन की अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक तक पहुँच सीमित करने की माँग की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अगले सप्ताह बैठक प्रस्तावित है और दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा तथा रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं।

अमेरिकी सांसदों की ओर से हिरासत में लिए गए नागरिकों का मुद्दा विशेष रूप से उठाया गया है। 17 सितंबर को सीनेट में एडवर्ड मार्की और टेड बड ने एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया। इसमें चीन में अमेरिकी शिक्षाविदों की कथित गलत या मनमानी हिरासत को लेकर चिंता जताई गई और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी को प्राथमिकता देने की मांग की गई। इस प्रस्ताव में जॉन कर्टिस और एडम शिफ भी शामिल हैं। प्रतिनिधि सभा में स्टीफन लिंच और जॉन मूलनार ने भी इसी विषय पर समान प्रस्ताव पेश किया है।

सांसदों ने विशेष रूप से दो अमेरिकी नागरिकों के मामलों का उल्लेख किया है। इनमें मैसाचुसेट्स के भूकंप वैज्ञानिक यूलिन चेन और अमेरिकी नागरिक तथा म्यांमार मामलों के विशेषज्ञ मिन ज़िन शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दोनों को गलत तरीके से हिरासत में लिए गए नागरिकों की श्रेणी में रखा है। हालांकि, चीन इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी कानूनी प्रक्रिया को वैध बताता है। इस अंतर के कारण दोनों मामलों ने अमेरिका और चीन के बीच राजनयिक संबंधों में संवेदनशीलता बढ़ा दी है।

अमेरिकी सांसदों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को शी जिनपिंग के साथ अपनी आगामी बातचीत में इन नागरिकों की रिहाई का मुद्दा सीधे उठाना चाहिए। प्रस्ताव में अमेरिकी विदेश विभाग से भी उपलब्ध सभी राजनयिक साधनों का इस्तेमाल करते हुए हिरासत में लिए गए नागरिकों की रिहाई के लिए बातचीत करने का आग्रह किया गया है। सांसदों ने चीन की यात्रा संबंधी अमेरिकी सलाह को भी अधिक कड़ा करने की माँग की है। उनके प्रस्ताव में गलत तरीके से हिरासत के मामलों को यात्रा चेतावनी में अधिक स्पष्ट रूप से शामिल करने और ऐसे देशों की पहचान के मानकों की समीक्षा करने की बात कही गई है।

यूलिन चेन का मामला इस बहस के केंद्र में है। सांसदों के अनुसार,चेन चीन में चीनी शिक्षाविदों के साथ भूकंपीय अनुसंधान से जुड़े कार्य कर रहे थे। उन्हें नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था और अमेरिकी सांसदों का आरोप है कि वह लंबे समय से बिना मुकदमे के हिरासत में हैं। उनके खिलाफ जासूसी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं,जिन्हें अमेरिकी सांसदों ने निराधार बताया है। चेन की लंबी हिरासत को लेकर उनके परिवार और अमेरिकी सांसद लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

दूसरा मामला मिन ज़िन का है। म्यांमार मामलों पर काम करने वाले इस अमेरिकी नागरिक को जून 2026 में चीन के युन्नान प्रांत में स्थित कुनमिंग अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। वह एक विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चीन पहुँचे थे। अमेरिकी अधिकारियों ने बाद में उनके मामले को गलत तरीके से हिरासत का मामला घोषित किया। उनके परिवार की ओर से भी अमेरिकी प्रशासन से मामले को चीन के साथ उच्चस्तरीय बातचीत में उठाने की अपील की गई है।

इन दोनों मामलों के बीच अमेरिकी सांसदों ने एआई तकनीक और अत्याधुनिक चिप्स का मुद्दा भी ट्रंप प्रशासन के सामने जोरदार तरीके से उठाया है। सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने ट्रंप से चीन को अमेरिका की सबसे उन्नत एआई चिप्स और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों तक पहुँच रोकने की माँग की है। उनका तर्क है कि अत्याधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक का इस्तेमाल चीन की एआई क्षमता को तेजी से बढ़ाने में हो सकता है और इससे अमेरिकी तकनीकी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा हित प्रभावित हो सकते हैं।

शूमर ने कहा है कि अमेरिका को अपनी अत्याधुनिक एआई तकनीक की सुरक्षा के मामले में स्पष्ट सीमा तय करनी चाहिए। उनके अनुसार, चीन को सबसे उन्नत एआई चिप्स और उन्हें बनाने वाले उपकरणों तक पहुँच रोकने के लिए कांग्रेस में द्विदलीय प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने ट्रंप प्रशासन से इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है। यह माँग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच एआई क्षेत्र में तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है।

एआई को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच चिंता केवल चीन को अत्याधुनिक चिप्स देने या न देने तक सीमित नहीं है। एआई के सुरक्षा पहलू को लेकर भी कांग्रेस में बहस तेज हो रही है। सीनेटर रो खन्ना ने 23 सितंबर को एआई सुरक्षा पर सुनवाई आयोजित करने की घोषणा की है। यह सुनवाई ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक से ठीक एक दिन पहले होगी। इसमें इस सवाल पर चर्चा होगी कि अत्यधिक सक्षम एआई प्रणालियों पर इंसानी नियंत्रण कमजोर होने की स्थिति में क्या जोखिम पैदा हो सकते हैं और ऐसी तकनीक के लिए अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानक कैसे तैयार किए जाएँ।

इस सुनवाई में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की योजना है। नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन और अमेरिकी वायु सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जैक शानहान भी गवाहों में शामिल होंगे। खन्ना ने कहा है कि अमेरिका को एआई के क्षेत्र में चीन के साथ बुनियादी सुरक्षा और निगरानी मानकों पर तत्काल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।

खन्ना ने यह भी कहा है कि उन्होंने अमेरिकी एआई कंपनियों से सुनवाई में भाग लेने का अनुरोध किया था,लेकिन उनके अनुसार ओपनएआई और एंथ्रोपिक ने अभी गवाही देने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है। उन्होंने चीन की प्रमुख एआई कंपनियों मूनशॉट एआई, अलीबाबा और डीपसीक से भी संपर्क किया है और अमेरिकी एआई प्रयोगशालाओं के साथ बाध्यकारी सुरक्षा समझौते की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य अत्यधिक शक्तिशाली एआई प्रणालियों के विकास से जुड़े संभावित जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए कुछ साझा मानक तैयार करना है।

अमेरिका-चीन संबंधों में एआई पहले ही एक रणनीतिक मुद्दा बन चुका है। दोनों देश इसे आर्थिक विकास,वैज्ञानिक अनुसंधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तकनीक मानते हैं। अमेरिका ने पिछले कुछ वर्षों में चीन को अत्याधुनिक कंप्यूटिंग चिप्स और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी कुछ तकनीकों के निर्यात पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। दूसरी ओर,चीन अपनी घरेलू चिप निर्माण क्षमता और एआई ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालिया घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रह सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की सक्रियता बढ़ गई है। एक ओर सांसद चाहते हैं कि राष्ट्रपति अमेरिकी नागरिकों की हिरासत के मामलों को चीन के साथ उच्चस्तरीय बातचीत में उठाएँ,वहीं दूसरी ओर एआई चिप्स और अत्याधुनिक तकनीक के निर्यात को लेकर भी स्पष्ट नीति की माँग की जा रही है। इन दोनों मुद्दों का संबंध अलग-अलग क्षेत्रों से है,लेकिन दोनों ही अमेरिका-चीन संबंधों में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाते हैं।

एआई के क्षेत्र में सुरक्षा और तकनीकी बढ़त को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच भी पूरी तरह एक जैसी राय नहीं है। कुछ सांसद चीन को अत्याधुनिक तकनीक तक पहुंच सीमित करने पर जोर दे रहे हैं,जबकि एआई सुरक्षा को लेकर दूसरी बहस में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझा मानकों की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। ऐसे में आगामी बैठकों में तकनीकी नियंत्रण और एआई सुरक्षा के बीच संतुलन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

वहीं,चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों का मामला मानवीय और राजनयिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सांसदों की माँग है कि इन मामलों को केवल कानूनी प्रक्रिया के रूप में न देखा जाए,बल्कि उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत में भी उठाया जाए। चीन की ओर से इन मामलों को लेकर अलग दृष्टिकोण है और वह अमेरिकी पक्ष के आरोपों से सहमत नहीं है। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा किस रूप में आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर,ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक से पहले अमेरिका में दो प्रमुख मुद्दे तेजी से उभरकर सामने आए हैं—चीन में हिरासत में लिए गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई और अत्याधुनिक एआई तकनीक तक चीन की पहुँच। इसके साथ ही एआई सुरक्षा को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में होने वाली सुनवाई दोनों देशों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए पहलू को सामने लाएगी। ऐसे समय में जब अमेरिका और चीन आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बने हुए हैं,आगामी वार्ता में इन मुद्दों पर दोनों पक्षों का रुख भविष्य के संबंधों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।