संयुक्त राष्ट्र,23 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान अमेरिका-जापान गठबंधन को और मजबूत करने तथा आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। मंगलवार को हुई करीब 35 मिनट की बैठक में दोनों नेताओं ने सुरक्षा,अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और आपूर्ति शृंखला से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक ऐसे समय हुई है,जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और ट्रंप की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक भी नजदीक है।
बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची की खुलकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें अपना मित्र बताते हुए कहा कि वह जापान के प्रमुख प्रधानमंत्रियों में शामिल होंगी। ट्रंप ने जापान की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का उद्योग अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिला है। उन्होंने ताकाइची के नेतृत्व की भी सराहना की और कहा कि उनके साथ काम करना सम्मान की बात है। ट्रंप ने जापानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिकारियों की भी प्रशंसा करते हुए उन्हें मजबूत और समझदार बताया।
ताकाइची ने अनुवादक के माध्यम से ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और जापान के बीच गठबंधन को लेकर ट्रंप ने मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि एशिया सहित दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हो रही हैं और ऐसे समय में दोनों देशों के नेताओं की बैठक से गठबंधन की मजबूती का संदेश जाता है। उन्होंने इस बैठक को दुनिया के सामने अमेरिका-जापान संबंधों की एकजुटता प्रदर्शित करने का अवसर बताया।
ताकाइची ने कहा कि एशिया में सुरक्षा वातावरण के कठिन होते जाने के बावजूद जापान-अमेरिका गठबंधन दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। उनके अनुसार, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दोनों नेताओं का एक साथ बैठना इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश सुरक्षा और अन्य रणनीतिक विषयों पर लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल पारंपरिक रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि अब आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है।
बैठक में आर्थिक सुरक्षा को प्रमुख विषय के रूप में सामने रखा गया। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार,दोनों देशों ने तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी अर्थव्यवस्थाओं और आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने के लिए इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और रणनीतिक उद्योगों से जुड़ी आपूर्ति शृंखलाओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर को लेकर अमेरिका और जापान का सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ये दोनों क्षेत्र आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक क्षमता से भी जुड़े हुए हैं। सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, वाहनों,संचार प्रणालियों और रक्षा तकनीक सहित कई क्षेत्रों के लिए आवश्यक हैं। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर दोनों देश तकनीकी विकास और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिज भी बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स,ऊर्जा तकनीक और अन्य औद्योगिक उत्पादों के लिए जरूरी हैं। जापान ने हाल के वर्षों में इन संसाधनों की आपूर्ति शृंखला को अधिक लचीला बनाने पर विशेष जोर दिया है।
ताकाइची ने बैठक के दौरान जापान में हाल में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 18 मंत्रियों वाले उनके मंत्रिमंडल में 10 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश नीति, वित्त, आर्थिक मामलों और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े कई वरिष्ठ मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं। उनका कहना था कि इन महत्वपूर्ण पदों पर निरंतरता रहने से जापान और अमेरिका के संबंधित अधिकारियों के बीच पहले से बने कामकाजी संबंध जारी रहेंगे।
जापानी प्रधानमंत्री ने इस निरंतरता को दोनों देशों के बीच नीतिगत तालमेल के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी और जापानी अधिकारियों के बीच पहले से स्थापित संपर्क और आपसी समझ आगे भी सहयोग को गति देने में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक,दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ते अमेरिका-जापान गठबंधन को और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बैठक के दौरान ताकाइची ने यह भी संकेत दिया कि पत्रकारों के सामने की शुरुआती बातचीत के बाद दोनों नेता कई अन्य मुद्दों पर निजी तौर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और शुल्क से जुड़े समझौते को भी आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, ट्रंप और ताकाइची ने दोनों देशों के बीच हुए शुल्क समझौते को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के महत्व की पुष्टि की। इसके साथ ही दोनों देशों ने अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। मार्च 2026 में दोनों नेताओं की वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद भी आर्थिक सुरक्षा,निवेश और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की घोषणा की गई थी।
बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा भी रहा। जापान और अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को अपनी साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। दोनों नेताओं ने गठबंधन की प्रतिरोधक और जवाबी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई। जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि की नींव के रूप में जापान-अमेरिका गठबंधन की भूमिका को रेखांकित किया।
ट्रंप और ताकाइची ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसमें चीन से जुड़े आर्थिक और सुरक्षा मुद्दे शामिल रहे। दोनों नेताओं की बैठक ऐसे समय हुई,जब ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। जापान और अमेरिका ने चीन से जुड़े मुद्दों पर आपसी समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई। उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल गतिविधियों पर भी दोनों पक्षों ने चर्चा की और इन मुद्दों से निपटने के लिए सहयोग जारी रखने की बात कही।
जापान ने उत्तर कोरिया द्वारा कथित अपहरण किए गए जापानी नागरिकों के मुद्दे को भी अमेरिका के साथ अपने संबंधों में महत्वपूर्ण विषय बनाया है। जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार,ताकाइची को इस मुद्दे के तत्काल समाधान के प्रयासों में ट्रंप का पूरा समर्थन मिला। दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल मुद्दों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता दोहराई।
अमेरिका और जापान के संबंधों की नींव 1960 की पारस्परिक सहयोग और सुरक्षा संधि पर आधारित है। समय के साथ यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर व्यापार,निवेश, तकनीक,ऊर्जा,आपूर्ति शृंखला और क्षेत्रीय कूटनीति तक विस्तृत हुई है। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, जी7, जी20 और एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुले क्षेत्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने में भी दोनों देशों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा है।
जापान की ओर से आर्थिक सुरक्षा पर दिया जा रहा जोर भी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ताकाइची ने आपूर्ति शृंखलाओं, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधनों की उपलब्धता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जापान ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आपूर्ति के विविधीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मामले में भी जापान सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की वकालत करता रहा है।
अमेरिका-जापान संबंधों में आर्थिक सुरक्षा का बढ़ता महत्व दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं में आए बदलाव को भी दिखाता है। पहले जहां गठबंधन का मुख्य केंद्र पारंपरिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग था, वहीं अब सेमीकंडक्टर,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,महत्वपूर्ण खनिज,ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों देश इन क्षेत्रों में सहयोग के जरिए अपनी औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क में हुई बैठक के बाद दोनों पक्षों ने अमेरिका-जापान गठबंधन को और मजबूत करने तथा आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में चीन, उत्तर कोरिया, व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक मुद्दे एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं, अमेरिका और जापान के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
