साहिल वाकोडे की मौत मामले में आईआईटी बॉम्बे का बड़ा कदम,प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला छुट्टी पर भेजे गए (तस्वीर क्रेडिट@imvivekgupta)

साहिल वाकोडे की मौत मामले में आईआईटी बॉम्बे का बड़ा कदम,प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला छुट्टी पर भेजे गए

मुंबई,23 सितंबर (युआईटीवी)- मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की जाँच पूरी होने तक प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। इसके साथ ही संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने छात्र की मौत से जुड़े घटनाक्रम और उससे पहले की परिस्थितियों की पड़ताल के लिए 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब परिसर में छात्रों के विरोध, परिवार के आरोपों और पुलिस की जाँच के बीच मामले को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

साहिल वाकोडे ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के दूसरे वर्ष के छात्र थे। 18 सितंबर की शाम उनका शव पवई स्थित आईआईटी बॉम्बे के छात्रावास के कमरे में मिला था। उनकी मौत से कुछ घंटे पहले वह एक मध्यावधि परीक्षा में शामिल हुए थे। इसी परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन होने की बात सामने आई थी। प्रारंभिक संस्थागत जानकारी में यह भी कहा गया था कि उन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर डालकर उत्तर हासिल करने का प्रयास किया था। हालाँकि,बाद में संस्थान ने अपने शुरुआती बयान पर खेद जताते हुए कहा कि छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जाँच पूरी होने से पहले उचित नहीं था। संस्थान ने संबंधित बयान वापस लेते हुए मामले की परिस्थितियों को जाँच के अधीन बताया।

प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला उसी विभाग से जुड़े हैं और परीक्षा के दौरान निरीक्षक की भूमिका में थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,उन्होंने परीक्षा में मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल की जानकारी संस्थान के अधिकारियों को दी थी। इसके बाद परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और साहिल के छात्रावास लौटने के बीच की परिस्थितियों को पुलिस जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंबई अपराध शाखा मामले की जाँच कर रही है और परीक्षा कक्ष तथा परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज सहित विभिन्न साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। जाँच का उद्देश्य घटनाओं का क्रम स्पष्ट करना और यह समझना है कि साहिल की मौत से पहले वास्तव में क्या-क्या हुआ था।

साहिल के परिवार ने प्रोफेसर डूला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी माँ सोनाली वाकोडे का कहना है कि उनके बेटे ने परिवार को बताया था कि उसे कथित तौर पर उसकी जाति को लेकर अपमान,गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। परिवार का दावा है कि साहिल ने विशेष रूप से प्रोफेसर डूला का नाम लिया था और कथित तौर पर जातिगत अंतर को लेकर की गई टिप्पणियों की शिकायत परिवार से की थी। परिवार के अनुसार,ऐसी परेशानियाँ कई सप्ताह से चल रही थीं। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया है। हालाँकि,आरोप अभी जाँच के दायरे में हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

संस्थान की ओर से पहले कहा गया था कि साहिल की ओर से पिछले कुछ महीनों में अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ या प्रशासन के पास ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। वहीं,परिवार का कहना है कि साहिल ने उन्हें अपनी परेशानियों के बारे में बताया था। इसी विरोधाभासी स्थिति को देखते हुए पुलिस के लिए परिवार के बयानों, संस्थान के रिकॉर्ड, छात्रों और शिक्षकों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करना महत्वपूर्ण हो गया है। जाँच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि परीक्षा के दौरान क्या हुआ, उसके बाद साहिल किन लोगों के संपर्क में थे और उनके अंतिम घंटों की परिस्थितियां क्या थीं।

प्रोफेसर डूला के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद संस्थान ने पहले उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटा दिया था। वह प्रशासनिक मामलों के डीन के पद पर थे। हालाँकि,उस समय उन्हें केवल प्रशासनिक पद से हटाया गया था और उनका शिक्षण दायित्व समाप्त नहीं किया गया था। छात्रों ने इस कदम को पर्याप्त नहीं माना और प्रोफेसर को पूरी तरह निलंबित करने की माँग की थी। इसके बाद अब बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने उन्हें जाँच के दौरान छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है। संस्थान से जुड़े सूत्रों के अनुसार,इस कदम का उद्देश्य जाँच को प्रभावित होने से बचाना और प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना है।

जाँच के लिए बनाई गई 10 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता आईआईटी पलक्कड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश वेंकटेश्वरन करेंगे। समिति में शिक्षक, छात्र प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सतर्कता अधिकारी और मनोचिकित्सक सहित अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े सदस्य शामिल किए गए हैं। समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने छात्रों की ओर से रखी गई कई मांगों पर भी विचार किया है। हालाँकि,इस्तीफे से जुड़ी मांगों को लेकर अलग स्थिति बताई गई है। जाँच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

इस बीच,मुंबई अपराध शाखा भी अपनी जाँच आगे बढ़ा रही है। जाँचकर्ताओं ने साहिल के माता-पिता के बयान दर्ज किए हैं और मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। प्रोफेसर डूला से भी पूछताछ की जानी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनसे घटनाक्रम और परीक्षा के दौरान हुई बातचीत को लेकर सवाल किए जा सकते हैं। जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि परीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन से संबंधित घटना के बाद साहिल के साथ क्या हुआ और क्या इस घटना का उनकी मौत से कोई प्रत्यक्ष संबंध था। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले पुलिस अलग-अलग साक्ष्यों और बयानों की जाँच कर रही है।

मामले को लेकर आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों के बीच भी विरोध देखने को मिला है। छात्रों की मांगों में घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच के साथ-साथ संस्थान में शिकायत निवारण व्यवस्था, छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका विरोध किसी भी तरह की शैक्षणिक अनियमितता के समर्थन में नहीं है,बल्कि वे संस्थागत प्रक्रिया और छात्र सुरक्षा से जुड़े सवालों पर जवाबदेही चाहते हैं। दूसरी ओर,संस्थान के कुछ शिक्षकों ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने परीक्षा के दौरान संस्थागत नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। ऐसे में मामले के दोनों पक्षों से सामने आए दावों की जाँच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

साहिल वाकोडे की मौत ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्र कल्याण,शैक्षणिक दबाव,शिकायतों के निवारण और कथित जातिगत भेदभाव से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालाँकि,इस मामले में अभी पुलिस और संस्थान की अलग-अलग जाँच जारी है। इसलिए परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों, परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और प्रोफेसर डूला की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजने और 10 सदस्यीय समिति गठित करने के फैसले से संस्थान ने जाँच के दौरान आगे की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब समिति की रिपोर्ट और अपराध शाखा की जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 18 सितंबर की घटना से पहले और बाद में वास्तव में क्या परिस्थितियाँ बनी थीं।