श्रीलंका के ईस्टर धमाका मामले में 15 दोषी करार (तस्वीर क्रेडिट@ImThimira07)

श्रीलंका के ईस्टर धमाका मामले में 15 दोषी करार, 200 से 260 साल तक की सजा

कोलंबो,23 सितंबर (युआईटीवी)- श्रीलंका में वर्ष 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमलों से जुड़े बहुचर्चित मामले में करीब पाँच साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोलंबो हाईकोर्ट की स्थायी ट्रायल-एट-बार पीठ ने 24 आरोपियों में से 15 को दोषी करार देते हुए उन्हें 200 से 260 साल तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बाकी नौ आरोपियों को बरी कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दिया। यह फैसला 21 अप्रैल 2019 को हुए उन सिलसिलेवार आत्मघाती हमलों से जुड़े मुख्य मुकदमे में आया है,जिसमें चर्चों और आलीशान होटलों को निशाना बनाया गया था।

अदालत की तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति नवरत्ने मारासिंघे,न्यायमूर्ति रामनाथन कन्नन और न्यायमूर्ति सुजीवा निसांका शामिल थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ कुल 23,270 आरोप पेश किए थे। करीब पाँच वर्ष तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से 2,309 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य और दलीलें पेश की गईं और इसी वर्ष 24 अगस्त को सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हुई थी। इसके बाद अदालत ने फैसले के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की थी।

सजा सुनाते समय अदालत ने दोषियों को अलग-अलग अवधि का कठोर कारावास दिया। उपलब्ध अदालती विवरण के अनुसार, एक दोषी को 260 साल, चार दोषियों को 240-240 साल,पाँच दोषियों को 220-220 साल और पाँच अन्य को 200-200 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा अदालत ने दोषी ठहराए गए लोगों की चल और अचल संपत्तियों को राज्य के पक्ष में जब्त करने का आदेश भी दिया।

यह मामला 21 अप्रैल 2019 को श्रीलंका में हुए समन्वित आत्मघाती बम धमाकों से जुड़ा है। ईस्टर के मौके पर तीन चर्चों और तीन बड़े होटलों को निशाना बनाया गया था। राजधानी कोलंबो के अलावा नेगोंबो और बट्टिकलोआ समेत कई स्थानों पर हमले हुए थे। इन हमलों में 260 से अधिक लोगों की जान गई थी और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल थे,जिनमें भारतीय नागरिक भी थे। इन हमलों ने श्रीलंका को गहरे सदमे में डाल दिया था और देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

जाँच एजेंसियों के अनुसार,हमलों का संबंध स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात और इस्लामिक स्टेट से प्रेरित नेटवर्क से जोड़ा गया था। मुख्य मुकदमे में जिन आरोपियों पर कार्रवाई हुई, उन पर हत्या,हत्या की कोशिश,आतंकी गतिविधियों की साजिश,हमलों में मदद करने और हथियारों तथा विस्फोटकों से जुड़े अपराधों के आरोप लगाए गए थे। ये आरोप आतंकवाद रोकथाम कानून के तहत लगाए गए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर 15 आरोपियों को दोषी माना।

इस मामले में मोहम्मद नौफर मौलवी भी दोषी ठहराए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने उन्हें हमलों की योजना और उससे जुड़े नेटवर्क में प्रमुख भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बताया था। अदालत के सामने यह आरोप भी रखा गया था कि वह उन लोगों को सहायता और समर्थन उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़े थे,जिन्होंने हमलों को अंजाम दिया। नौफर सहित 15 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के साथ इस लंबे समय से चल रहे मुकदमे का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए आरोपों में साजिश रचने और हमलों में सहायता करने के अलावा हथियार तथा विस्फोटक जुटाने से संबंधित अपराध भी शामिल थे। इतने बड़े पैमाने पर आरोप और गवाह होने के कारण यह मुकदमा श्रीलंका की सबसे लंबी और जटिल आपराधिक सुनवाइयों में शामिल रहा। 23,270 आरोपों और 2,309 अभियोजन गवाहों के कारण अदालत के सामने बड़ी मात्रा में साक्ष्य और दस्तावेज रखे गए।

ईस्टर हमलों के बाद श्रीलंका में सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को लेकर भी बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। संसदीय जाँच और अन्य जाँच प्रक्रियाओं में इस बात पर सवाल उठे कि हमलों से पहले संभावित खतरे को लेकर खुफिया चेतावनियाँ मौजूद होने के बावजूद समय रहते पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस मुद्दे को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की सरकार पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ा था। बाद की प्रक्रियाओं में सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों की भूमिका की भी अलग-अलग स्तर पर जाँच हुई।

ईस्टर हमलों से जुड़े व्यापक मामले में केवल आतंकवादी नेटवर्क की भूमिका ही जाँच का विषय नहीं रही,बल्कि हमले से पहले मिली चेतावनियों पर कार्रवाई में कथित चूक भी लंबे समय तक चर्चा में रही। इसी वर्ष जुलाई में पूर्व पुलिस प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर खुफिया चेतावनियों पर समय पर कार्रवाई नहीं करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालाँकि,श्रीलंका में वर्ष 1976 के बाद किसी को फाँसी नहीं दी गई है।

मुख्य आतंकी हमलों से जुड़े मुकदमे में अब 15 दोषियों को लंबी अवधि के कठोर कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है,जबकि नौ आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत के फैसले के साथ 2019 के ईस्टर हमलों से जुड़े इस प्रमुख मुकदमे में न्यायिक प्रक्रिया का एक बड़ा चरण पूरा हुआ है। हालाँकि,उन हमलों से जुड़े सुरक्षा तंत्र की कथित विफलता और व्यापक साजिश को लेकर उठे सवाल अलग-अलग जाँच और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे भी चर्चा में बने रह सकते हैं।