एस जयशंकर और मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@pankajj_das)

जयशंकर और रुबियो की न्यूयॉर्क में मुलाकात, रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर भारत ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र,24 सितंबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पश्चिम एशिया,यूक्रेन और रूस-ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के मुद्दे पर चर्चा हुई। जयशंकर ने अमेरिका के नए प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। वहीं, अमेरिका ने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग जारी रखने की बात कही।

बैठक के बाद मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि न्यूयॉर्क में भारतीय विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं तथा प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और आगामी बहुपक्षीय प्रयासों को लेकर समन्वय कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाने में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया।

जयशंकर ने भी बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिका के नए ‘रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून’ के संबंध में भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार,बैठक में रूस और ईरान के साथ आर्थिक गतिविधियाँ करने वाले देशों पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

यह बैठक ऐसे समय हुई है,जब अमेरिका ने हाल ही में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2026’ को कानून का रूप दिया है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। प्रावधानों के तहत कुछ मामलों में शुल्क 100 प्रतिशत तक पहुँच सकता है। हालाँकि, यह शुल्क अपने आप लागू नहीं होता, बल्कि अमेरिकी प्रशासन को इसके इस्तेमाल का अधिकार दिया गया है। भारत और चीन जैसे रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देश इस प्रावधान के संभावित प्रभाव के दायरे में आ सकते हैं।

रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और नई दिल्ली लगातार यह रुख रखती रही है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप फैसले लेगा। अमेरिकी प्रतिबंध कानून के संभावित प्रभाव को लेकर भारत पहले भी अपनी चिंताएँ जाहिर कर चुका है। जयशंकर और रुबियो की बैठक में इस मुद्दे को सीधे उठाया जाना दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत में इसकी अहमियत को दर्शाता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भारत और अमेरिका के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है। ऐसे में बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को व्यापक रणनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

यूक्रेन का मुद्दा भी बैठक में शामिल रहा। भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को लेकर लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सार्वजनिक बातचीत में भी यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। भारत एक ओर रूस के साथ अपने पुराने संबंध बनाए हुए है,वहीं दूसरी ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में यूक्रेन संघर्ष से जुड़े मुद्दे भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

जयशंकर और रुबियो की बैठक दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग के कई क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी आगे बढ़ रही है,लेकिन व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों पर अभी बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके बावजूद रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है।

भारत और अमेरिका बहुपक्षीय मंच क्वाड के भी सदस्य हैं। इस समूह में जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। चारों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और अन्य रणनीतिक विषयों पर सहयोग करते हैं। मई में नई दिल्ली में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान समुद्री सुरक्षा, बंदरगाह बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था। हिंद-प्रशांत में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच क्वाड दोनों देशों के लिए सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।

न्यूयॉर्क में जयशंकर की रुबियो के साथ मुलाकात उनकी कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान दुनिया के विभिन्न देशों के नेता और शीर्ष राजनयिक न्यूयॉर्क में मौजूद हैं। भारत इस अवसर का इस्तेमाल विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर बातचीत के लिए कर रहा है। जयशंकर शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित करने वाले हैं। उनका संबोधन न्यूयॉर्क के स्थानीय समयानुसार दोपहर 3 बजे शुरू होने वाले सत्र में प्रस्तावित है, जो भारतीय समयानुसार रविवार देर रात 12:30 बजे होगा।

जयशंकर-रुबियो बैठक में एक तरफ दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई,वहीं दूसरी तरफ रूस और ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंध कानून पर भारत की चिंताएँ भी सामने आईं। इससे स्पष्ट है कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ ऊर्जा,व्यापार और प्रतिबंध जैसे आर्थिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इन विषयों पर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है,इस पर नजर रहेगी।