पोर्टाडाउन,28 सितंबर (युआईटीवी)- उत्तरी आयरलैंड के ऐतिहासिक शहर पोर्टाडाउन में रविवार को एक विवादित प्रोटेस्टेंट मार्च को लेकर तनाव काफी बढ़ गया। करीब 28 साल बाद ऑरेंज ऑर्डर को मुख्य रूप से राष्ट्रवादी और कैथोलिक आबादी वाले गरवाघी रोड से मार्च निकालने की अनुमति मिलने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने मार्च का रास्ता रोकने के लिए सड़क पर घेरा बना लिया। पुलिस दोनों पक्षों के बीच मौजूद रही और पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश करती रही। देर रात तक जारी गतिरोध के बाद प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे वहां से हटने लगे।
विवादित मार्च को ड्रमक्री परेड के नाम से जाना जाता है। यह परेड उत्तरी आयरलैंड के सबसे संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे विवादों में शामिल रही है। गरवाघी रोड से ऑरेंज ऑर्डर के मार्च पर 1998 से रोक लगी हुई थी। इस मार्ग के आसपास मुख्य रूप से कैथोलिक और राष्ट्रवादी समुदाय रहता है,जबकि पोर्टाडाउन का व्यापक क्षेत्र प्रोटेस्टेंट और यूनियनिस्ट प्रभाव वाला माना जाता है। यही सामुदायिक विभाजन इस मार्च को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि रहा है।
इस बार विवाद ने उस समय नया रूप लिया जब उत्तरी आयरलैंड की परेड आयोग ने शुक्रवार को कुछ कड़ी शर्तों के साथ मार्च को अनुमति दे दी। आयोग ने ऑरेंज ऑर्डर के अधिकतम 35 सदस्यों को मार्च में शामिल होने की अनुमति दी। मार्च को सुबह आठ बजे तक शुरू करना था और इसे बिना बैंड तथा बिना संगीत के शांतिपूर्ण तरीके से निकालने की शर्त रखी गई थी। इसके अलावा समर्थकों को मार्च के साथ चलने या रास्ते में जमा होने की अनुमति नहीं थी। मार्च को सुबह साढ़े नौ बजे तक समाप्त करने की भी शर्त रखी गई थी।
इस फैसले के खिलाफ गरवाघी रोड के निवासियों की ओर से कानूनी चुनौती दी गई। शनिवार को उच्च न्यायालय की न्यायाधीश पेट्रीसिया स्मिथ ने परेड आयोग के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी। अदालत ने माना कि दशकों से चला आ रहा यह विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह सकता और इससे पूरे उत्तरी आयरलैंड में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है। इसके बाद ऑरेंज ऑर्डर ने अदालत के फैसले को चुनौती दी और मामला अपील अदालत तक पहुँच गया।
रविवार तड़के हुई सुनवाई के बाद अदालत ने परेड आयोग के मूल फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई करीब रात दो बजकर 15 मिनट पर समाप्त हुई। इसके कुछ ही घंटे बाद मार्च शुरू होने का समय निर्धारित था। अदालत के इस फैसले के बाद ऑरेंज ऑर्डर के लिए गरवाघी रोड से मार्च निकालने का रास्ता साफ हो गया। हालाँकि, सुबह होते-होते मार्ग पर बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारी जमा हो चुके थे।
रविवार सुबह गरवाघी रोड पर प्रदर्शनकारियों ने हाथों में हाथ डालकर सड़क को घेर लिया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए उन्हें चेतावनी दी कि सड़क को अवरुद्ध करना और अनधिकृत प्रदर्शन में शामिल होना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए। सड़क पर कई स्थानों पर लोगों के समूह जमा रहे और पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखने की कोशिश की। इस स्थिति के कारण मार्च का रास्ता खुल नहीं सका।
दूसरी ओर, ऑरेंज ऑर्डर के करीब 35 सदस्य ड्रमक्री चर्च के पास मौजूद रहे। वे पुलिस की अनुमति और रास्ता साफ होने का इंतजार करते रहे। हालाँकि,गरवाघी रोड पर प्रदर्शनकारियों के जमावड़े के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका। इस तरह कानूनी अनुमति मिलने के बावजूद वास्तविक स्थिति गतिरोध में बदल गई। रविवार देर रात तक दोनों पक्ष अपने-अपने स्थानों पर बने रहे और पुलिस की मौजूदगी में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन में आयरिश राष्ट्रवादी दल सिन फेन की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड और उत्तरी आयरलैंड की प्रथम मंत्री मिशेल ओ’नील भी पहुँचीं। मैकडोनाल्ड ने मार्च की अनुमति पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरवाघी रोड के लोग अतीत के तनावपूर्ण दौर में वापस नहीं जाना चाहते। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के रुख को शांतिपूर्ण और संगठित बताते हुए कहा कि समुदाय पुराने विवादों को दोबारा नहीं देखना चाहता। ओ’नील ने भी इस घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे उत्तरी आयरलैंड की शांति प्रक्रिया और उससे जुड़े संस्थागत ढाँचे पर सवाल खड़े होते हैं।
वहीं,डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के नेताओं ने इस विरोध को अदालत के फैसले और कानून के प्रति अवहेलना के रूप में देखा। उनका कहना था कि जब अदालत ने मार्च को अनुमति दे दी है,तो उसके रास्ते को रोकना उचित नहीं है। पार्टी के नेताओं ने प्रदर्शन में राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। इस तरह रविवार को पोर्टाडाउन में विवाद केवल मार्च निकालने या रोकने तक सीमित नहीं रहा,बल्कि कानून,अदालत के आदेश और उत्तरी आयरलैंड की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज हो गई।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं को तनाव कम करने की दिशा में काम करना चाहिए। आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने भी स्थिति को शांत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की शांति और मेल-मिलाप की प्रक्रिया के बाद उत्तरी आयरलैंड को पुराने विभाजन और टकराव की ओर लौटने से बचाना जरूरी है।
ड्रमक्री विवाद की जड़ें उत्तरी आयरलैंड के संघर्ष के सबसे तनावपूर्ण दौर तक जाती हैं। 1990 के दशक में ऑरेंज ऑर्डर की ओर से गरवाघी रोड से मार्च निकालने की कोशिश को लेकर स्थानीय निवासियों और मार्च समर्थकों के बीच लगातार टकराव होता रहा था। कई मौकों पर विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया और पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। इस विवाद ने उत्तरी आयरलैंड में पहले से मौजूद कैथोलिक-राष्ट्रवादी और प्रोटेस्टेंट-यूनियनिस्ट विभाजन को और गहरा किया था।
1998 में परेड आयोग की व्यवस्था लागू होने के बाद विवादित मार्चों को नियंत्रित करने के लिए एक औपचारिक नियामकीय प्रक्रिया बनाई गई। इसके बाद गरवाघी रोड से ड्रमक्री मार्च को लगातार अनुमति नहीं मिली। लगभग तीन दशकों तक यह स्थिति बनी रही। इसी कारण 2026 में आयोग की ओर से सीमित रूप में मार्च को अनुमति दिए जाने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया। हालाँकि,आयोग ने स्पष्ट किया था कि उसका फैसला किसी एक पक्ष की जीत या दूसरे पक्ष की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए,बल्कि यह उपलब्ध तथ्यों और कानूनी ढाँचे के आधार पर लिया गया निर्णय है।
इस पूरे घटनाक्रम में अदालतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पहले उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, फिर अपील अदालत में सुनवाई हुई और अंततः मार्च को आगे बढ़ने की अनुमति बरकरार रही। अंतिम सुनवाई असामान्य परिस्थितियों में आधी रात के बाद हुई, जबकि मार्च शुरू होने में कुछ ही घंटे बाकी थे। अदालत ने परेड आयोग के निर्णय में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि अदालत से मिली अनुमति और जमीन पर मौजूद विरोध के बीच कानून-व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाए।
रविवार की रात तक मार्च आगे नहीं बढ़ सका और दोनों पक्षों के बीच बना गतिरोध लंबा खिंचता गया। बाद में गरवाघी रोड पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को एक नई बातचीत और प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी गई,जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां से हटने लगे। इस घटनाक्रम ने फिलहाल सड़क पर बने टकराव को कम किया,लेकिन ड्रमक्री मार्च को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
पोर्टाडाउन की ताजा स्थिति यह दिखाती है कि उत्तरी आयरलैंड में दशकों पुराने सामुदायिक और राजनीतिक विवाद कितने संवेदनशील बने हुए हैं। एक सीमित मार्च को कानूनी अनुमति मिलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उसका विरोध सामने आया और मामला फिर अदालत,पुलिस तथा राजनीतिक नेतृत्व के बीच चर्चा का विषय बन गया। अब आगे की बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि गरवाघी रोड से ड्रमक्री मार्च के भविष्य को लेकर क्या व्यवस्था बनती है। फिलहाल पुलिस,स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व का जोर तनाव कम रखने तथा स्थिति को दोबारा हिंसक टकराव में बदलने से रोकने पर है।
