न्यूयॉर्क,28 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच सात दिन की प्रस्तावित योजना को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से रखे गए उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है,जिसमें तेहरान ने कुछ शर्तें पूरी होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ाने की बात कही थी। अमेरिका के इस रुख के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सवाल उठाया है कि आखिर वॉशिंगटन ने इस प्रस्ताव को क्यों ठुकराया। उन्होंने कहा कि ईरान वास्तविक और गंभीर कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी सैन्य हमले की स्थिति में वह मजबूती से जवाब देने के लिए भी तैयार रहेगा।
अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और वह न्यूयॉर्क युद्ध की चर्चा करने नहीं आए हैं,बल्कि शांति का रास्ता तलाशने के लिए यहां हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीति की इच्छा का मतलब यह नहीं है कि ईरान किसी हमले के सामने पीछे हट जाएगा। उनके मुताबिक,तेहरान बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहता है,लेकिन यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाती है,तो वह उसका सामना करने के लिए भी तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी राजदूत की ओर से प्रस्ताव को खारिज किए जाने के कारणों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सात दिन की योजना क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने का रास्ता खोल सकती थी। उनका कहना था कि यदि यह प्रस्ताव होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है,तो अमेरिका इसे स्वीकार करने से क्यों इनकार कर रहा है,इसका जवाब उसे देना चाहिए।
अराघची ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज सात दिन की योजना पर टिप्पणी कर रहे हैं,जबकि उनके अनुसार उन्होंने प्रस्ताव को देखा तक नहीं है। अराघची ने कहा कि संभव है कि अमेरिकी राजदूत को प्रस्ताव की प्रति ही उपलब्ध नहीं कराई गई हो। इस बयान के जरिए उन्होंने अमेरिका के उस दावे पर सवाल उठाया,जिसमें ईरान की पेशकश को अमेरिकी हितों के लिहाज से अस्वीकार्य बताया गया है।
ईरान की ओर से पेश की गई योजना का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और फारस की खाड़ी से तेल तथा अन्य ऊर्जा उत्पादों के परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। ईरान ने पहले ही संकेत दिया था कि अमेरिकी सैन्य दबाव और उसके बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत मिलने की स्थिति में वह एक सप्ताह के भीतर जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार है। ईरानी अधिकारियों ने यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया था।
अराघची के अनुसार,ईरान की योजना स्पष्ट है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका कुछ जरूरी कदम उठाता है तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए तैयार है। ईरान जिन शर्तों की बात कर रहा है,उनमें युद्ध समाप्त करना,ईरानी संपत्तियों को जारी करना और ईरान को अपना तेल बेचने की अनुमति देना शामिल है। तेहरान इन मांगों को अपने अधिकारों से जोड़ता है और उसका कहना है कि इन्हें किसी नई या अचानक सामने आई माँग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि सबसे पहले युद्ध को समाप्त करने की जरूरत है। तेहरान इस संघर्ष को आक्रामक युद्ध मानता है। अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने इस उम्मीद के साथ युद्ध शुरू किया था कि वह कुछ ही दिनों में इसे समाप्त कर देगा,लेकिन संघर्ष लंबा खिंच गया। उन्होंने कहा कि ईरान अब युद्ध को खत्म करना चाहता है और इसी वजह से बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है।
ईरान की दूसरी प्रमुख माँग देश की उन संपत्तियों और धनराशि से जुड़ी है,जिन्हें उसने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अवरुद्ध बताया है। अराघची ने कहा कि तेहरान चाहता है कि उसकी जमी हुई संपत्तियाँ जारी की जाएँ। इसके साथ ही ईरान अपने तेल की बिक्री को फिर से सामान्य तरीके से करने की अनुमति चाहता है। उनका कहना है कि इन मांगों को ईरान अपने अधिकारों के रूप में देखता है और इनमें से कुछ मुद्दों को लेकर पहले हुए समझौतों में भी प्रतिबद्धताएं जताई गई थीं।
दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष ने ईरानी प्रस्ताव को अलग नजरिए से देखा है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के मुताबिक,ईरान प्रस्ताव में पहले ही प्रतिबंधों से राहत और अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों तक पहुँच चाहता था और उसके बाद बातचीत की बात कर रहा था। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि तेहरान की ओर से माँगी गई रियायतें बातचीत शुरू होने से पहले ही देने की माँग की जा रही थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से ईरानी प्रस्ताव को खारिज किया है। हालाँकि,इसके बाद उन्होंने यह संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार,ट्रंप ने कहा है कि आने वाले सप्ताह में दोनों देशों के बीच वार्ता की संभावना है,जबकि तेहरान अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए अपनी शर्तों पर कायम है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रस्ताव खारिज होने के बावजूद कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
ईरान का कहना है कि उसे मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अराघची के अनुसार,सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बावजूद मध्यस्थों ने अभी तक तेहरान को अंतिम आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि औपचारिक जवाब मिलने के बाद ही वह आगे की रणनीति पर निर्णय करेगा।
सात दिन की योजना में समय-सीमा भी महत्वपूर्ण है। ईरान के अनुसार,अमेरिका अपनी ओर से जरूरी कदम शुरुआती चार या पाँच दिनों में उठा सकता है। इसके बाद छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सातवें दिन व्यापक समझौते को लेकर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस तरह तेहरान ने कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय-सारणी सामने रखी है।
इस पूरे विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ किसी भी तरह की लंबे समय तक बाधा का असर क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। हाल के दिनों में इस जलमार्ग को लेकर अनिश्चितता ने तेल आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की चिंताओं को बढ़ाया है। इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच किसी संभावित समझौते में जलडमरूमध्य को सामान्य करना एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। ईरान सात दिन की योजना को तनाव कम करने और बातचीत शुरू करने का रास्ता बता रहा है,जबकि अमेरिका इसे स्वीकार करने से पहले ईरान की ओर से माँगी गई शर्तों पर आपत्ति जता रहा है। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क की संभावना बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देशों के बीच प्रस्तावित कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है और क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई व्यावहारिक समझौता बन पाता है।
