एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने मलेशिया को 5-1 से रौंदकर जीता गोल्ड (तस्वीर क्रेडिट@PardeepMoun)

एशियन गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन,85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा देश,पीएम मोदी ने खिलाड़ियों को बधाई दी

नई दिल्ली,5 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 85 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक अपने नाम किए। कुल पदकों की संख्या के लिहाज से यह एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन रहा। जापान में आयोजित इस महाद्वीपीय खेल प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेलों में दमदार प्रदर्शन किया और कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम कीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल के प्रदर्शन की सराहना करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प, जुनून और शानदार खेल भावना की तारीफ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पूरे देश को खुशी दी है और उनकी उपलब्धियाँ आने वाले वर्षों में बड़ी सफलताओं के लिए प्रेरणा बनेंगी। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि इन उपलब्धियों का असर जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में दिखाई देगा और नई पीढ़ी खेलों की ओर प्रेरित होगी।

भारत के लिए एशियन गेम्स 2026 में एथलेटिक्स सबसे ज्यादा पदक दिलाने वाला खेल रहा। भारतीय एथलीटों ने इस स्पर्धा में कुल 24 पदक जीते। इसके बाद निशानेबाजी का स्थान रहा,जिसमें भारत ने 15 पदक हासिल किए। वहीं,स्वर्ण पदकों की संख्या के लिहाज से तीरंदाजी भारतीय दल का सबसे सफल खेल रहा,जहाँ खिलाड़ियों ने कुल पाँच स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों ने एक बार फिर अलग-अलग खेलों में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सामने रखा।

जापान में भारतीय दल के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि कई टीमों ने अपने पिछले एशियन गेम्स के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किए। दोनों टीमों ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि भारतीय क्रिकेट की मजबूत स्थिति महाद्वीपीय स्तर पर भी कायम है। कबड्डी में भी भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी बादशाहत बरकरार रखी।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी अपने खिताब का सफल बचाव किया। फाइनल मुकाबले में भारत ने मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल एशियन गेम्स में अपना दबदबा कायम रखा,बल्कि आगामी ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की की। दूसरी ओर, भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर भारतीय महिला टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक के 44 साल के इंतजार को खत्म कर दिया। इससे पहले भारत ने महिला हॉकी में आखिरी बार 1982 में स्वर्ण पदक जीता था।

एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए कई व्यक्तिगत प्रदर्शन भी यादगार रहे। गोल्फ में प्रणवी उर्स ने इतिहास रचते हुए एशियन गेम्स में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय महिला गोल्फ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। भारतीय खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए उन खेलों में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जहां भारत की पदक उम्मीदें पहले अपेक्षाकृत सीमित रही हैं।

तीरंदाजी में 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर एशियन गेम्स में इस वर्ग का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय तीरंदाजी में महिला खिलाड़ियों की बढ़ती ताकत को रेखांकित किया। तीरंदाजी में भारत के पांच स्वर्ण पदक इस पूरे अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहे।

मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ने भी भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर एक खास उपलब्धि हासिल की। वह मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। लवलीना के प्रदर्शन ने भारतीय महिला मुक्केबाजी की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी निरंतरता को भी दिखाया।

भारतीय दल की सफलता केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं रही। कई खिलाड़ियों ने अपने-अपने खेलों में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया,जबकि कई टीमों ने लंबे समय के बाद बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। अलग-अलग खेलों में भारत के प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि देश का खेल आधार अब केवल कुछ पारंपरिक स्पर्धाओं तक सीमित नहीं रह गया है। एथलेटिक्स और निशानेबाजी से बड़ी संख्या में पदक मिलने के साथ तीरंदाजी, हॉकी, कबड्डी, क्रिकेट, मुक्केबाजी और गोल्फ जैसे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने मजबूत प्रदर्शन किया।

कुल 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना भारत के एशियन गेम्स अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाता है। 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदकों ने भारतीय दल के प्रदर्शन को संतुलित स्वरूप दिया। खास बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने टीम स्पर्धाओं के साथ-साथ व्यक्तिगत मुकाबलों में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खिलाड़ियों को दी गई बधाई के बाद भारतीय खेल जगत में इन उपलब्धियों को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है। जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तैयार करने, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत आधार उपलब्ध कराने की दिशा में ऐसी उपलब्धियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा। ऐतिहासिक व्यक्तिगत पदकों से लेकर टीमों के सफल खिताब बचाव तक, भारतीय दल ने अलग-अलग मोर्चों पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। 85 पदकों के साथ चौथा स्थान और कुल पदकों के लिहाज से भारत का दूसरा सबसे बड़ा एशियन गेम्स प्रदर्शन इस अभियान की खास उपलब्धि बन गया। अब इन सफलताओं से मिली ऊर्जा के साथ भारतीय खेल जगत की नजरें आने वाली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर होंगी, जहां खिलाड़ी इस प्रदर्शन को और आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।