मस्क के स्टारलिंक बयान के बीच रिलायंस के शेयरों में गिरावट (तस्वीर क्रेडिट@SONELALRAWAT87)

मस्क के स्टारलिंक बयान के बीच रिलायंस के शेयरों में गिरावट,मुकेश अंबानी की संपत्ति को 2 अरब डॉलर से ज्यादा का झटका

मुंबई,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों की कमजोरी का सबसे अधिक असर पड़ा। कंपनी के शेयर में करीब 2.5 प्रतिशत की गिरावट आने से उसके बाजार पूँजीकरण में बड़ी कमी दर्ज की गई। शुरुआती बाजार अनुमानों के अनुसार, इस गिरावट के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की व्यक्तिगत संपत्ति में भी 2 अरब डॉलर से अधिक की कमी आई। बाजार में यह दबाव ऐसे समय देखने को मिला, जब दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की संभावित एंट्री में कथित बाधाओं को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर टिप्पणी की।

निफ्टी-50 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का भार लगभग 9 प्रतिशत है। इस वजह से कंपनी के शेयरों में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रमुख सूचकांक पर सीधा और उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है। गुरुवार को शेयर में आई गिरावट ने बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित किया। रिलायंस के साथ-साथ कुछ अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, रिलायंस के शेयरों में गिरावट और मस्क की टिप्पणियों के बीच संबंध को लेकर बाजार में चर्चा जरूर हुई, लेकिन केवल इन घटनाओं के एक ही समय पर होने से यह साबित नहीं होता कि शेयर की पूरी गिरावट का कारण मस्क का बयान ही था।

एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात प्रभावशाली और धनाढ्य कारोबारी भारत में स्टारलिंक की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। ऐसे कारोबारियों के लिए ‘ओलिगार्क’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। मस्क की टिप्पणी के बाद बाजार में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हुई कि उनका इशारा भारत के दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों की ओर हो सकता है। हालाँकि,इस टिप्पणी में किसी कंपनी का स्पष्ट नाम नहीं लिया गया था।

स्टारलिंक की भारतीय बाजार में संभावित मौजूदगी को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी पहले से बनी हुई है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की यह सेवा उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है। पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं के मुकाबले सैटेलाइट इंटरनेट का एक प्रमुख संभावित लाभ उन दूरदराज के इलाकों तक पहुँच बनाना है,जहाँ फाइबर नेटवर्क या अन्य संचार ढाँचे का विस्तार करना मुश्किल और महँगा हो सकता है।

यदि स्टारलिंक भारतीय बाजार में बड़े स्तर पर अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराती है,तो इससे इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट का विस्तार भारत की मौजूदा दूरसंचार कंपनियों की कारोबारी रणनीतियों और भविष्य की कमाई को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार रणनीति में जियो की अहम भूमिका है। कंपनी ने मोबाइल सेवाओं, ब्रॉडबैंड, डिजिटल मंचों और अन्य तकनीकी सेवाओं के जरिए देश के बड़े उपभोक्ता बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत की है। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की संभावित प्रतिस्पर्धा को निवेशक जियो के दीर्घकालिक विकास के संदर्भ में देख रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार,ग्रामीण ब्रॉडबैंड, उद्यमों के लिए कनेक्टिविटी समाधान और सैटेलाइट संचार ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आने वाले वर्षों में नई तकनीकों के कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जियो की मौजूदा दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं के साथ-साथ भविष्य में विस्तार की संभावनाओं का मूल्यांकन करते समय निवेशक इन बदलावों को भी ध्यान में रख सकते हैं।

हालांकि, सैटेलाइट इंटरनेट और पारंपरिक दूरसंचार सेवाएँ पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं। दोनों की तकनीक, लागत, उपलब्धता और उपयोग के तरीके अलग हो सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में वे एक-दूसरे के विकल्प बन सकती हैं,जबकि अन्य मामलों में उनकी सेवाएं एक-दूसरे की पूरक भी हो सकती हैं। इसलिए स्टारलिंक की संभावित एंट्री का जियो पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सेवा किस तरह की शर्तों पर उपलब्ध होती है,उसकी कीमत क्या रहती है और भारतीय उपभोक्ताओं तथा कारोबारों के बीच उसकी मांग कितनी बढ़ती है।

इसके बावजूद मस्क की टिप्पणी ने निवेशकों का ध्यान इस ओर खींचा है कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों की भारत में विस्तार योजनाएँ भविष्य में दूरसंचार उद्योग के कारोबारी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब कंपनी की दूरसंचार इकाई जियो की प्रस्तावित सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर बाजार में उत्सुकता बनी हुई है। जियो का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित संभावित निर्गमों में गिना जा रहा है। इस लिस्टिंग के जरिए निवेशकों को कंपनी के कारोबार में सीधे हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल सकता है।

जियो के संभावित आईपीओ के मूल्यांकन को लेकर भी चर्चा जारी है। ब्लूमबर्ग की पूर्व रिपोर्ट के मुताबिक,आईपीओ के लिए कंपनी के संभावित मूल्यांकन की उम्मीद लगभग 140 अरब डॉलर से घटाकर करीब 114 अरब डॉलर किए जाने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि बैंकर निवेशकों की रुचि बढ़ाने के प्रयास में मूल्यांकन को लेकर नए सिरे से विचार कर रहे थे।

किसी कंपनी के आईपीओ का मूल्यांकन तय करते समय उसके मौजूदा कारोबार, भविष्य की कमाई, बाजार में प्रतिस्पर्धा, विकास की संभावनाओं और निवेशकों की मांग जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं में संभावित प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका भी निवेशकों के आकलन को प्रभावित कर सकती है। हालाँकि, स्टारलिंक को लेकर मस्क की हालिया टिप्पणी के कारण जियो के मूल्यांकन में कोई नया बदलाव हुआ है,इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

जियो के प्रस्तावित आईपीओ पर निवेशकों की नजर इसलिए भी बनी हुई है,क्योंकि इसका आकार और संभावित मूल्यांकन भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लिस्टिंग से पहले कंपनी की विकास योजनाओं, कारोबारी प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़े प्रत्येक घटनाक्रम पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

गुरुवार को दूरसंचार क्षेत्र की दूसरी प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल के शेयर भी दबाव में रहे। सुनील मित्तल के नेतृत्व वाली इस कंपनी के शेयर करीब 2.1 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुए। एयरटेल की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में भी मौजूदगी है और वह वनवेब के माध्यम से इस बाजार से जुड़ी हुई है।

एयरटेल के शेयरों में गिरावट से संकेत मिला कि उस दिन दूरसंचार क्षेत्र में व्यापक दबाव देखने को मिला। हालाँकि,अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं और प्रत्येक कंपनी पर किसी एक टिप्पणी का प्रभाव समान होना जरूरी नहीं है। रिलायंस और एयरटेल दोनों की कारोबारी संरचना, सेवाओं और विकास योजनाओं में अंतर है,इसलिए सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी प्रतिस्पर्धा का असर भी अलग-अलग हो सकता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के अलावा निफ्टी-50 में गिरावट में योगदान देने वाले प्रमुख शेयरों में आईटीसी और इंडिगो भी शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने सूचकांक पर अतिरिक्त दबाव डाला।

रिलायंस के शेयरों में आई गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि बड़े भार वाले शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख बाजार सूचकांकों की दिशा को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही, तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक कंपनियों की विस्तार योजनाओं और संभावित प्रतिस्पर्धा पर निवेशकों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

आने वाले समय में निवेशकों की नजर स्टारलिंक की भारत में सेवाएँ शुरू करने से जुड़े घटनाक्रम,जियो की कारोबारी रणनीति और प्रस्तावित आईपीओ की तैयारियों पर रह सकती है। इसके अलावा रिलायंस और भारती एयरटेल के वित्तीय प्रदर्शन, ग्राहक वृद्धि, नेटवर्क विस्तार और डिजिटल सेवाओं से होने वाली कमाई भी बाजार के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फिलहाल, गुरुवार की गिरावट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो की भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर चर्चा को तेज कर दिया है। हालाँकि,कंपनी के शेयरों में आगे की चाल केवल स्टारलिंक से जुड़ी खबरों पर निर्भर नहीं करेगी। व्यापक बाजार की स्थिति, कंपनी के वित्तीय नतीजे, निवेशकों की धारणा और दूरसंचार उद्योग में वास्तविक प्रतिस्पर्धी बदलाव भी शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करेंगे।