भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार (तस्वीर क्रेडिट@epanchjanya)

फ्लाईदुबई विमान में 172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान,अमेरिका भी करेगा सम्मानित

नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान जानलेवा हमले का सामना करने के बावजूद 170 से अधिक यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इजरायल ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म’ से सम्मानित करने की घोषणा की है। वहीं,अमेरिका में भी उनके साहस और सूझबूझ को प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। विमान में हुए इस घटनाक्रम के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हार नहीं मानी और यात्रियों की जान बचाने के लिए अपनी सुरक्षा को दांव पर लगा दिया।

इस घटना ने विमानन सुरक्षा और आपात परिस्थितियों में पायलटों की जिम्मेदारी को लेकर भी ध्यान आकर्षित किया है। कैप्टन मच्छार के साहस को इजरायल और अमेरिका की ओर से मिलने वाला सम्मान इस बात का संकेत है कि उनकी भूमिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विमान में सवार लोगों की जिंदगी खतरे में होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह से परिस्थितियों का सामना किया, उसे असाधारण बहादुरी का उदाहरण बताया जा रहा है।

भारत में इजरायल के दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर कैप्टन स्मित मच्छार को सम्मानित किए जाने की जानकारी दी। पोस्ट के अनुसार, इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने उनके साहस और बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह सम्मान उन्हें स्वस्थ होने के बाद प्रदान किया जाएगा।

इजरायली दूतावास की पोस्ट में कहा गया कि कैप्टन मच्छार की बहादुरी और साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। दूतावास ने उनके जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनके योगदान के लिए आभार भी व्यक्त किया। संदेश में कहा गया कि इजरायल उनकी बहादुरी को सलाम करता है।

यह पुरस्कार ऐसे व्यक्ति के असाधारण साहस को मान्यता देने के लिए दिया जाएगा, जिसने गंभीर खतरे के बीच दूसरों की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैप्टन मच्छार के मामले में उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा भी खतरे में थी,लेकिन इसके बावजूद उन्होंने विमान में मौजूद लोगों की रक्षा को प्राथमिकता दी। इसी कारण उनके प्रयासों को नागरिक वीरता के उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

इजरायल के सम्मान की घोषणा से पहले भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी कैप्टन मच्छार की बहादुरी को मान्यता देने की पहल की। उन्होंने घोषणा की कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड, यानी ‘कांग्रेसनल रिकॉर्ड’, में कैप्टन के साहस और उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए एक बयान दर्ज कराएँगे।

कृष्णमूर्ति ने अपने साथी सांसदों से भी अपील की कि वे इस घटना में कैप्टन मच्छार की भूमिका को सम्मान दें। उनके अनुसार,यह केवल एक पायलट की बहादुरी का मामला नहीं है, बल्कि उन सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा से जुड़ा घटनाक्रम है, जिनकी जिंदगी उस समय गंभीर खतरे में पड़ गई थी।

अमेरिकी सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि कैप्टन मच्छार ने बेहद कठिन परिस्थिति में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय साहस दिखाया। उनके प्रयासों ने विमान में मौजूद अन्य लोगों को हमलावर को रोकने और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए कार्रवाई करने का अवसर दिया। अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में बयान दर्ज होना उनके योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने का एक तरीका होगा।

यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या एफजेड 1073 में हुई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार,उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस अचानक हुए घटनाक्रम से विमान में सवार लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया।

अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक,घटना के दौरान विमान महज 30 सेकंड में लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया था। इतनी कम अवधि में विमान की ऊँचाई में आई इस बड़ी गिरावट ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया। उस समय विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के सामने यह सवाल था कि हालात को कैसे सँभाला जाए और विमान को किसी बड़े हादसे से कैसे बचाया जाए।

हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुँचने का प्रयास किया और उसे खोलने में सफल रहे। उनके इस कदम ने विमान में मौजूद अन्य लोगों को कॉकपिट के भीतर पहुँचने और कथित हमलावर को काबू करने का मौका दिया। यदि वह गंभीर चोटों के बावजूद यह कदम उठाने में सफल नहीं होते,तो स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती थी।

कॉकपिट तक पहुँच बनाने और हमलावर को नियंत्रित करने की कोशिश के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने उड़ान की कमान सँभाली। उन्होंने परिस्थितियों का आकलन करते हुए विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा। इस तरह विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को संभावित बड़ी दुर्घटना से बचाया जा सका।

राजा कृष्णमूर्ति के बयान के अनुसार, विमान में कुल 172 यात्री सवार थे। इनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे। इतने लोगों की सुरक्षा एक ऐसी परिस्थिति में दांव पर लगी थी,जब कॉकपिट के भीतर हमला हुआ और विमान की ऊँचाई तेजी से घट गई। ऐसे समय में कैप्टन मच्छार के साहसिक कदम और रिजर्व पायलटों की कार्रवाई ने स्थिति को सँभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि विमान में मौजूद प्रशिक्षित चालक दल के सदस्यों और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का कितना महत्व है। कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट तक पहुँचकर जिस तरह अन्य लोगों के हस्तक्षेप का रास्ता बनाया, उससे हमलावर को रोकने और उड़ान का नियंत्रण सुरक्षित हाथों में सौंपने का अवसर मिला।

भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छार को विमान संचालन का 17 वर्षों का अनुभव है। इसमें 11 वर्ष कप्तान के रूप में उनकी सेवा शामिल है। लंबे अनुभव के कारण वह उड़ान संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों और आपात स्थितियों में लिए जाने वाले फैसलों से परिचित हैं। हालाँकि,फ्लाइट एफजेड 1073 में उन्हें जिस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ा,वह सामान्य विमान संचालन से बिल्कुल अलग और बेहद गंभीर थी।

राजा कृष्णमूर्ति ने अपने बयान में कहा कि जानलेवा हमले का सामना करने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने विमान में मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। जब वह खुद अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे,तब भी उन्हें इस बात का अहसास था कि उनके अगले कदम का असर विमान में सवार सभी लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है।

सांसद के मुताबिक, गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार ने स्थिति की गंभीरता को समझा और कॉकपिट के दरवाजे तक पहुँचने का साहसिक फैसला किया। उनकी सूझबूझ, दृढ़ निश्चय और बहादुरी ने यात्रियों तथा चालक दल के अन्य सदस्यों को हमले को रोकने के लिए कार्रवाई करने का अवसर दिया। यह निर्णय उस समय बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ,जब विमान का नियंत्रण और उसमें मौजूद लोगों की सुरक्षा खतरे में थी।

राजा कृष्णमूर्ति ने इस घटना के मानवीय पक्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि फ्लाइट एफजेड 1073 में मौजूद हर व्यक्ति के पीछे एक परिवार है। विमान में सवार लोगों की सुरक्षित वापसी का अर्थ था कि उनके परिजनों को उस असहनीय दुख का सामना नहीं करना पड़ा,जो किसी बड़े हादसे की स्थिति में पैदा हो सकता था।

उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छार ने हार नहीं मानी और उनके साहस की वजह से यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों को अपने प्रियजनों के पास सुरक्षित लौटने का अवसर मिला। इस बयान में पायलट की व्यक्तिगत बहादुरी के साथ-साथ उस व्यापक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया गया,जो विमान संचालन के दौरान यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है।

इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान देने की घोषणा और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में कैप्टन मच्छार की प्रशंसा दर्ज कराने की पहल उनके योगदान को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाएगी। फिलहाल उनके स्वास्थ्य में सुधार और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। फ्लाईदुबई की इस उड़ान में सामने आई गंभीर परिस्थिति के बीच कैप्टन मच्छार ने जिस साहस और दृढ़ता का परिचय दिया,उसने उन्हें उन लोगों में शामिल कर दिया है,जिनके फैसले संकट के क्षण में कई जिंदगियों की रक्षा करने में निर्णायक साबित होते हैं।