नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कोटे डी आइवर की यात्रा पूरी करने के बाद इथियोपिया पहुँच गए हैं। इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर इथियोपिया के शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा पहुँचने के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने इथियोपिया पहुंचने पर प्रसन्नता जताई और गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए देश के राज्य मंत्री बेरहनु त्सेगये का आभार व्यक्त किया। विदेश मंत्री ने कहा कि वह सार्थक बातचीत के जरिए भारत और इथियोपिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। उनके संदेश से संकेत मिलता है कि भारत इस अफ्रीकी देश के साथ अपने संबंधों को नई दिशा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर अपने प्रवास के दौरान इथियोपिया के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, क्षेत्रीय परिस्थितियों और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। भारत और इथियोपिया के बीच पहले से जारी सहयोग को अधिक व्यापक बनाने तथा नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करने के अवसरों पर भी चर्चा की जाएगी।
जयशंकर अपने इथियोपियाई समकक्ष गेदियोन टिमोथेवोस हेसेबोन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। विदेश मंत्रालय ने पहले जारी बयान में कहा था कि इस बैठक में दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों और सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्राथमिकताओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत का प्रयास है कि अफ्रीकी देशों के साथ उसके संबंध केवल कूटनीतिक संपर्क तक सीमित न रहें,बल्कि आर्थिक सहयोग और साझा हितों के आधार पर भी मजबूत हों।
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम अदीस अबाबा में क्षेत्रीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता करना भी है। इस बैठक के जरिए विदेश मंत्री अफ्रीकी क्षेत्र में भारत के राजनयिक मिशनों के कामकाज, प्राथमिकताओं और सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। अफ्रीकी देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्कों को देखते हुए इस तरह के सम्मेलन को क्षेत्र में भारतीय कूटनीतिक प्रयासों के समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने जयशंकर की यात्रा को अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी को गहरा करने की प्रतिबद्धता से जोड़ा है। मंत्रालय के अनुसार,यह दौरा वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की एकजुटता को भी मजबूत करेगा। विकासशील देशों के साझा हित, आर्थिक सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आपसी समन्वय भारत की विदेश नीति के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं। ऐसे में इथियोपिया के साथ उच्चस्तरीय बातचीत दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।
जयशंकर ने इथियोपिया पहुँचने से पहले गुरुवार को गेदियोन टिमोथेवोस हेसेबोन को विदेश मंत्री के रूप में दोबारा नियुक्त किए जाने पर बधाई दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में कहा था कि वह उनसे जल्द मुलाकात करने और भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली बैठक इसी कूटनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हेसेबोन की दोबारा नियुक्ति इथियोपिया में नई संघीय सरकार के गठन के बाद हुई है। प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने नई कैबिनेट का गठन किया है और देश की प्रतिनिधि सभा ने सोमवार को नई सरकार को मंजूरी दी थी। सत्तारूढ़ प्रॉस्पेरिटी पार्टी ने अबी अहमद अली को लगातार दूसरे पाँच वर्षीय कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। नई सरकार के गठन के बाद भारत के विदेश मंत्री की यात्रा दोनों देशों के नेतृत्व के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर भी है।
भारत और इथियोपिया के संबंधों में राजनीतिक संवाद के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। जयशंकर की यात्रा के दौरान मौजूदा साझेदारी की समीक्षा के साथ भविष्य के सहयोग के नए रास्तों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा,व्यापक अफ्रीकी क्षेत्र के साथ भारत की भागीदारी को मजबूत बनाने के विषय भी बातचीत का हिस्सा रहेंगे।
कुल मिलाकर,विदेश मंत्री एस. जयशंकर का इथियोपिया दौरा भारत की अफ्रीका-केंद्रित कूटनीति का अहम हिस्सा है। उच्चस्तरीय बैठकों,द्विपक्षीय वार्ता और क्षेत्रीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन के जरिए भारत दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। यात्रा के दौरान होने वाली चर्चाओं से यह तय करने में मदद मिलेगी कि भारत और इथियोपिया अपनी रणनीतिक साझेदारी को किन नए क्षेत्रों में विस्तार दे सकते हैं।
