ओएचसीएचआर (तस्वीर क्रेडिट@NeerajShandily1)

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, पीओजेके में मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जाँच की माँग

संयुक्‍त राष्‍ट्र,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। मानवाधिकार उच्चायुक्त के साथ आयोजित संवाद के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के चयनात्मक रवैये और कथित दोहरे मानदंडों पर चिंता जताई। भारत की ओर से प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने कहा कि मानवाधिकारों के मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच के लिए एक रिपोर्ट जारी करने की माँग भी रखी।

भारत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों की रक्षा करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस विषय पर किसी भी तरह का भेदभाव अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। भारतीय प्रतिनिधि ने मानवाधिकार परिषद में भारत की रचनात्मक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालाँकि,उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को सभी देशों और क्षेत्रों से जुड़े मामलों पर समान मानकों के आधार पर ध्यान देना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान आयोजित संवाद में भारत ने मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएँ सामने रखीं। अनुज स्वरूप ने कहा कि चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देना और अलग-अलग मामलों में अलग मानदंड अपनाना बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों के विश्वास को कमजोर कर सकता है।

भारत का कहना है कि मानवाधिकारों के मुद्दों पर किसी भी तरह की कार्रवाई निष्पक्ष तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए। किसी देश या क्षेत्र में कथित उल्लंघनों को नजरअंदाज करना,जबकि दूसरे मामलों पर विशेष ध्यान देना,अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।

भारतीय प्रतिनिधि ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत मानवाधिकारों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। हालाँकि,सहयोग का अर्थ यह नहीं है कि इन संस्थाओं के कामकाज पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। भारत ने अपनी आपत्तियों के माध्यम से मानवाधिकारों के मामलों में समान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करने की माँग की। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, इस रिपोर्ट में क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर लगाए गए आरोपों, हिरासत में रखे गए नेताओं के अधिकारों और इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान लोगों की मौत के मामलों की निष्पक्ष जाँच कराने की जरूरत बताई। इसके साथ ही हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की माँग भी की। इंटरनेट तक पहुँच आज सूचना प्राप्त करने,विचार व्यक्त करने और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियों का मुद्दा मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक सवालों के अंतर्गत आता है।

भारत ने पाकिस्तान से अपने यहां मानवाधिकारों की स्थिति पर आत्ममंथन करने को कहा। भारतीय प्रतिनिधि ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों का उल्लेख किया,जिन्हें भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके मानता है। भारत का तर्क है कि मानवाधिकारों के मामलों में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सभी क्षेत्रों की परिस्थितियों पर समान गंभीरता से विचार करना चाहिए।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कहा कि मानवाधिकारों का सम्मान और उनकी रक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक देश का दायित्व है। इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए निष्पक्षता,पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक हैं।

मानवाधिकारों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर दुनिया भर में चर्चा होती रही है। ऐसे में भारत ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी देशों के मामलों पर समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मानवाधिकार परिषद में अपनी रचनात्मक भागीदारी का उल्लेख करते हुए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की ओर से उठाए गए मुद्दों का केंद्र पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कथित उल्लंघनों की जाँच और मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के कामकाज में समान मानकों की माँग रहा। इस मामले में पाकिस्तान की ओर से संबंधित आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है,इसकी विस्तृत जानकारी सामने आने पर दोनों पक्षों के रुख को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

मानवाधिकारों के मुद्दे पर भारत के बयान से पहले संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भी पाकिस्तान को आतंकवाद के विषय पर स्पष्ट संदेश दिया गया था। वहाँ भारत के स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने कहा था कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी के सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी हमले का जवाब दिया जाएगा।

बेदी ने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा। उनके बयान में यह संदेश दिया गया कि परमाणु धमकियों के जरिए भारत की आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने पिछले वर्ष पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। यह अभियान पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। उस हमले में 26 नागरिकों की हत्या हुई थी। भारत ने इसके लिए पाकिस्तानी आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया था।

भारतीय प्रतिनिधि ने ऑपरेशन सिंदूर को आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया। उनके अनुसार,अभियान को संतुलित और सटीक तरीके से अंजाम दिया गया था,ताकि आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए संघर्ष को और बढ़ने से रोका जा सके। भारत ने इस कार्रवाई के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा और निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत के बयानों से स्पष्ट है कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है। भारत ने एक ओर मानवाधिकार संस्थाओं से निष्पक्षता और पारदर्शिता की अपेक्षा जताई,वहीं दूसरी ओर आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा नीति का बचाव किया।

भारत की माँग है कि मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों की जाँच निष्पक्ष तरीके से हो और संबंधित क्षेत्रों में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही,उसने आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के अपने अधिकार पर जोर दिया है।

इन बयानों के बाद अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों,आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। हालाँकि,इन मांगों और आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है,यह संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और पक्षों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।