आईडीबीआई बैंक

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री को कैबिनेट की मंजूरी, 52,878 करोड़ रुपये में खरीदेगी फेयरफैक्स

नई दिल्ली,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को बैंक में हिस्सेदारी बिक्री के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस सौदे के तहत कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की प्रवर्तक कंपनी से जुड़ी इकाई 52,878 करोड़ रुपये में आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। इस प्रस्तावित लेनदेन में केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। मंजूरी के बाद यह सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस प्रक्रिया को केवल रणनीतिक विनिवेश कहने के बजाय रणनीतिक पुनर्गठन बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौदे के बाद भी केंद्र सरकार और एलआईसी की बैंक में हिस्सेदारी बनी रहेगी। प्रस्तावित लेनदेन पूरा होने पर सरकार की हिस्सेदारी घटकर 15 प्रतिशत रह जाएगी,जबकि एलआईसी के पास लगभग 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी। इस तरह बैंक के स्वामित्व में बड़ा बदलाव आएगा,लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े दोनों मौजूदा हिस्सेदार पूरी तरह बाहर नहीं होंगे।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली के माध्यम से पूरी की गई। इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर प्रस्ताव की जाँच और मूल्यांकन किया गया। इसमें अंतर-मंत्रालयी समूह,विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह और कैबिनेट मंत्रियों का अधिकार प्राप्त समूह शामिल रहे।

सरकार ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में संस्थागत समीक्षा और सामूहिक निर्णय प्रणाली का पालन किया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि हिस्सेदारी बिक्री से संबंधित फैसला निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और बैंक के मूल्यांकन के आधार पर उचित प्रस्ताव का चयन किया जाए।

इस तरह के बड़े लेनदेन में बोली की प्रक्रिया, कंपनी के मूल्यांकन और संभावित खरीदार की पात्रता की जाँच महत्वपूर्ण होती है। आईडीबीआई बैंक के मामले में भी सरकार ने स्वतंत्र मूल्यांकन और प्रतिस्पर्धी बोलियों के आधार पर सफल प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, बैंक के उचित मूल्य का आकलन करने के लिए दो पेशेवर मूल्यांकन एजेंसियों की सेवाएँ ली गई थीं। दोनों एजेंसियों के मूल्यांकन का औसत 75.99 रुपये प्रति शेयर निकला। इस राशि को योग्य बोलियों के मूल्यांकन के लिए आधार कीमत के रूप में इस्तेमाल किया गया।

फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की ओर से 81 रुपये प्रति शेयर की सबसे अच्छी सफल बोली दी गई। यह कीमत निर्धारित बेंचमार्क और दोनों स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों के उचित मूल्य अनुमानों से अधिक थी। इसी आधार पर सरकार ने बोली को उचित मानते हुए मंजूरी दी।

बोली की कीमत और स्वतंत्र मूल्यांकन के बीच अंतर इस सौदे का महत्वपूर्ण पहलू है। सरकार के अनुसार,सफल प्रस्ताव निर्धारित आधार कीमत से ऊपर था और इसलिए उसे स्वीकार किया गया। हालाँकि,अंतिम लेनदेन पूरा होने के लिए नियामकीय आवश्यकताओं और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करना भी जरूरी होगा।

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सफल बोली लगाने वाली कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक के सामने अपनी पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। बोली प्रक्रिया के शुरुआती चरण में किए गए उपयुक्तता आकलन के अनुरूप खरीदार को यह प्रमाणित करना होगा कि वह बैंक में प्रस्तावित हिस्सेदारी हासिल करने के लिए निर्धारित नियामकीय मानकों को पूरा करता है।

इसके अलावा,खरीदार को नियामकीय शर्तों के अनुपालन के लिए एक रोडमैप भी प्रस्तुत करना होगा। इस प्रक्रिया में बैंकिंग क्षेत्र के नियमों,स्वामित्व संबंधी आवश्यकताओं और अन्य लागू प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण होगा। इसलिए कैबिनेट की मंजूरी को सौदे की दिशा में एक प्रमुख कदम माना जा सकता है,लेकिन इसे सभी नियामकीय औपचारिकताएँ पूरी होने के बराबर नहीं समझा जाना चाहिए।

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में किसी बड़े बैंक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए केवल वित्तीय क्षमता पर्याप्त नहीं होती। संबंधित निवेशक को नियामक की निर्धारित पात्रता और उपयुक्तता संबंधी शर्तों को भी पूरा करना होता है। आईडीबीआई बैंक के मामले में भी अंतिम प्रक्रिया इसी ढाँचे के तहत आगे बढ़ेगी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार,नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह लेनदेन भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बन सकता है। 52,878 करोड़ रुपये के इस प्रस्तावित सौदे से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश की संभावनाओं और बड़े वित्तीय संस्थानों के स्वामित्व में बदलाव को लेकर चर्चा तेज होने की उम्मीद है।

आईडीबीआई बैंक लंबे समय से सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी के कारण चर्चा में रहा है। प्रस्तावित सौदे के बाद बैंक की हिस्सेदारी संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। केंद्र सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी कम होगी,जबकि फेयरफैक्स से जुड़ी कंपनी सबसे बड़ी हिस्सेदार बनेगी।

रणनीतिक पुनर्गठन के तहत सरकार का कहना है कि उसकी और एलआईसी की हिस्सेदारी बनी रहेगी। ऐसे में यह सौदा पूरी तरह बाहर निकलने के बजाय स्वामित्व के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का प्रभाव केवल स्वामित्व में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में निवेशक की रणनीति,बैंक के संचालन,पूँजी प्रबंधन और विकास योजनाओं पर भी ध्यान रहेगा। हालाँकि,इन क्षेत्रों में क्या बदलाव होंगे, यह सौदा पूरा होने और संबंधित योजनाओं के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल,कैबिनेट की मंजूरी ने लेनदेन को आगे बढ़ाने का रास्ता खोल दिया है। स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर सफल बोली का चयन और भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय प्रक्रिया इसके अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे। सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद ही सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।

कुल मिलाकर,आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 52,878 करोड़ रुपये का प्रस्तावित सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा घटनाक्रम है। इससे बैंक के स्वामित्व में महत्वपूर्ण बदलाव होगा और विदेशी निवेश के क्षेत्र में भी नया रिकॉर्ड बनने की संभावना है। अब बाजार और बैंकिंग क्षेत्र की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नियामकीय मंजूरी और अन्य प्रक्रियाएँ कब पूरी होती हैं तथा सौदा किस समय अंतिम रूप लेता है।