अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की माँग को लेकर दिल्ली में रातभर धरने पर बैठे माता-पिता हिरासत में लिए गए (तस्वीर क्रेडिट@qazinizamuddin)

अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की माँग को लेकर दिल्ली में रातभर धरने पर बैठे माता-पिता हिरासत में लिए गए, रिहाई के बाद भूख हड़ताल की चेतावनी

नई दिल्ली,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की माँग एक बार फिर तेज हो गई है। अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े कथित वीआईपी विवाद की जाँच की माँग को लेकर दिल्ली पहुँचे अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर रातभर प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। हालाँकि,कुछ समय बाद सुबह करीब पाँच बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद अंकिता की माँ ने स्पष्ट किया कि परिवार अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई,तो वे अपने घर पर ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।

अंकिता के परिजनों की प्रमुख माँग है कि मामले की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से जाँच पूरी होने तक भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति रद्द की जाए। परिवार का कहना है कि हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी विवाद की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और जाँच के सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए। दूसरी ओर,दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत मामले में घसीटा जा रहा है।

अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की माँग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी पहुँचे थे। उन्होंने इंडिया गेट पर रातभर धरना देकर मामले से जुड़े सवालों को फिर से उठाया। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ समय बाद दोनों को छोड़ दिया गया। परिजनों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आने के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।

रिहाई के बाद अंकिता की माँ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि परिवार न्याय की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने सरकार से दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द करने की माँग दोहराई। उनका कहना था कि यदि सरकार ने उनकी माँग पर ध्यान नहीं दिया,तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

अंकिता की माँ ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें सड़कों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करने से रोका गया,तो वे घर पर ही भूख हड़ताल शुरू कर देंगी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा। उनके मुताबिक,यदि मांगें पूरी नहीं हुईं,तो देशभर में लोगों के सड़कों पर उतरने की स्थिति बन सकती है और इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी।

परिवार का मुख्य जोर कथित वीआईपी विवाद की स्वतंत्र जाँच पर है। परिजन चाहते हैं कि मामले से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए और किसी भी पहलू को बिना जाँच के नजरअंदाज न किया जाए। हालाँकि,किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाए जाने और अदालत में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर है। दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया है।

केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के बाद अंकिता के परिजनों ने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी विवाद में दुष्यंत गौतम का नाम चर्चा में आने के बावजूद उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त किया गया।

परिवार का कहना है कि जब तक मामले से जुड़े सभी सवालों की जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए। परिजन इस माँग को न्याय की लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं। उनका तर्क है कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और इनका निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए।

हालाँकि,दुष्यंत कुमार गौतम ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि पुलिस की जाँच,दाखिल आरोपपत्र और अदालत में चले मुकदमे में उनका नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक द्वेष के कारण उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

इस मामले में गौतम पहले ही देहरादून के डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज करा चुके हैं। इसमें उन्होंने पूर्व विधायक सुरेश राठौर,अभिनेत्री उर्मिला सनावर और अन्य लोगों पर कथित तौर पर आपराधिक साजिश रचने तथा उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था। इस तरह मामले को लेकर एक ओर अंकिता के परिजन कथित वीआईपी विवाद की जाँच की माँग कर रहे हैं,वहीं गौतम अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को साजिश बता रहे हैं।

अंकिता के माता-पिता के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की और उनके प्रति एकजुटता जताई। इस मुलाकात के बाद मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज हो गईं।

कांग्रेस ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अपनी बेटी के लिए वर्षों से न्याय की माँग कर रहे माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उन्हें सुबह के समय हिरासत में लिया गया।

कांग्रेस ने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि अंकिता हत्याकांड से जुड़े विवादों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। हालाँकि,कांग्रेस के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। नियुक्ति तथा कथित वीआईपी विवाद को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। लोगों ने दोषियों को कड़ी सजा देने और मामले की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की थी।

इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य,अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को अदालत ने मई 2025 में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों दोषी फिलहाल जेल में सजा काट रहे हैं। अदालत के फैसले के बाद हत्या के मामले में दोषियों को सजा मिल चुकी है,लेकिन कथित वीआईपी विवाद को लेकर अंकिता के परिजनों के सवाल अब भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

परिवार की मौजूदा माँग का केंद्र यही विवाद है। परिजन चाहते हैं कि इस पहलू की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो से कराई जाए और जब तक जाँच पूरी नहीं होती,तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रद्द की जाए। दूसरी ओर, गौतम का कहना है कि जाँच और न्यायिक कार्यवाही में उनके खिलाफ कोई आरोप स्थापित नहीं हुआ है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले कह चुके हैं कि राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जाँच दल यानी एसआईटी ने मामले की निष्पक्ष जाँच की थी। उनके अनुसार, एसआईटी की जाँच को निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहराया गया है।

एसआईटी के पूर्व सदस्य शेखर सुयाल भी पहले बयान दे चुके हैं कि रिजॉर्ट में आने-जाने वाले लोगों की गहन जाँच की गई थी। उनके मुताबिक,जाँच के दौरान किसी कथित वीआईपी की संलिप्तता का साक्ष्य नहीं मिला था। यह बयान राज्य की जाँच प्रक्रिया के पक्ष में दिया गया था,जबकि अंकिता के परिजन इस मामले के कथित वीआईपी पहलू की जाँच की माँग लगातार कर रहे हैं।

ऐसे में इस प्रकरण में दो महत्वपूर्ण पहलू सामने हैं। एक ओर हत्या के मामले में तीन दोषियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है और राज्य सरकार एसआईटी की जाँच को निष्पक्ष बता रही है। दूसरी ओर,अंकिता के माता-पिता कथित वीआईपी विवाद को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और स्वतंत्र जाँच की माँग पर अड़े हुए हैं।

दिल्ली में हिरासत और रिहाई के बाद परिवार की भूख हड़ताल की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि अंकिता के माता-पिता अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखना चाहते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं और कथित वीआईपी विवाद से जुड़े सवालों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। परिवार के लिए यह केवल एक कानूनी मामला नहीं,बल्कि अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लंबी लड़ाई है।