न्यूयॉर्क,15 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के इलिनॉय राज्य में एक हिंदू मंदिर पर गोलीबारी करने की कथित साजिश को पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया। इस मामले में 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया है,जिस पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने मंदिर में गोलीबारी करने की कोशिश की थी,लेकिन उसकी राइफल जाम हो जाने के कारण वह अपने इरादे में सफल नहीं हो सका। इसके बाद वह घटनास्थल से भाग गया। मामले का खुलासा तब हुआ,जब आरोपी ने कथित तौर पर अपने एक सहकर्मी को घटना के बारे में बताया। सहकर्मी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जाँच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
इस घटना ने अमेरिका में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और नस्लीय घृणा से प्रेरित हिंसा के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के मुताबिक,आरोपी ने खुद को श्वेत श्रेष्ठतावादी नव-नाजी विचारधारा से जुड़ा बताया था। जाँच के दौरान उसके घर से हथियार, गोला-बारूद और सुरक्षा उपकरण बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री और आरोपी की ओर से कथित तौर पर भेजे गए दस्तावेजों की जाँच की जा रही है, ताकि हमले की योजना और उसकी मंशा से जुड़े सभी पहलुओं को समझा जा सके।
अधिकारियों के अनुसार,आरोपी एलेक्जेंड्रोस पैपोरेकिस ने अपने साथ फास्ट-फूड रेस्तरां में काम करने वाले एक सहकर्मी को बताया था कि वह शनिवार को ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर गया था। ऑरोरा शिकागो से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। आरोप है कि मंदिर पहुँचने के बाद उसने गोलीबारी करने की कोशिश की,लेकिन ट्रिगर दबाने पर उसकी राइफल नहीं चली। हथियार जाम होने के कारण वह गोली नहीं चला पाया और इसके बाद वहाँ से भाग गया।
ऑरोरा में तीन हिंदू मंदिर हैं। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने इलाके के मंदिरों को संभावित खतरे के बारे में सूचित कर दिया। अधिकारियों ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की जरूरत पर जोर दिया है।
जाँच एजेंसियों के मुताबिक,आरोपी ने घटना के बाद रविवार को अपने सहकर्मी को संदेश भेजकर फोन करने के लिए कहा था। फोन पर बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर मंदिर में सामूहिक गोलीबारी की कोशिश करने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि राइफल जाम हो जाने के कारण वह गोली नहीं चला पाया और वहाँ से निकल गया। आरोपी के इस कथित खुलासे के बाद उसके सहकर्मी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस को सूचना दी।
इस मामले में आरोपी के सहकर्मी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। उसने सबसे पहले माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस को घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद यह सूचना पैलेटाइन पुलिस तक पहुँचाई गई। पुलिस ने मिली जानकारी के आधार पर जाँच शुरू की और आरोपी की तलाश की।
अधिकारियों के अनुसार,आरोपी को रविवार को शिकागो से लगभग 60 किलोमीटर दूर पैलेटाइन स्थित उसके घर के बाहर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके आवास की तलाशी ली। पैलेटाइन के पुलिस प्रमुख विलियम नॉर्ड ने बताया कि तलाशी के दौरान एक राइफल, भरी हुई मैगजीन, सैकड़ों कारतूस और शरीर की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला विशेष कवच बरामद किया गया।
पुलिस के मुताबिक,बरामद सुरक्षा कवच पर श्वेत श्रेष्ठतावादी चरमपंथ से जुड़े प्रतीक और डिजाइन बने हुए थे। जाँचकर्ताओं के लिए यह बरामदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे आरोपी की कथित विचारधारा और हमले की योजना के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल की जा सकती है। हालाँकि,मामले में लगाए गए आरोपों और बरामद सामग्री से जुड़े निष्कर्षों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
पुलिस प्रमुख नॉर्ड ने कथित खतरे की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे किसी भी स्थिति में कम करके नहीं आंका जा सकता। अधिकारियों के मुताबिक,मामले की जांच में आरोपी के कथित बयानों, उसके पास से मिले सामान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को ध्यान में रखा जा रहा है।
जाँच के दौरान आरोपी की ओर से भेजे गए संदेशों और दस्तावेजों का भी पता चला। अभियोजकों के अनुसार,आरोपी ने अपने सहकर्मी को एक तस्वीर भेजी थी,जिसमें वह विशेष सुरक्षा उपकरणों वाला सामरिक जैकेट पहने नजर आ रहा था। इसके साथ उसने आठ पन्नों का एक दस्तावेज भी साझा किया था,जिसे कथित घोषणापत्र बताया गया है।
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक,इस लेख में भारतीय मूल के लोगों और हिंदू मंदिरों के खिलाफ नस्लभेदी तथा घृणा से भरी टिप्पणियाँ शामिल थीं। अभियोजकों का आरोप है कि आरोपी ने लिखित रूप से अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा था कि वह अधिक से अधिक अल्पसंख्यकों की हत्या करने के बाद खुद भी मरना चाहता है। यदि जाँच में ये आरोप साबित होते हैं,तो यह मामला धार्मिक और नस्लीय घृणा से प्रेरित हिंसा की गंभीर प्रकृति को उजागर करेगा।
अदालत में पेश दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से हमले की योजना बना रहा था। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने कथित तौर पर योजना तैयार करने के दौरान किन गतिविधियों को अंजाम दिया, हथियार कैसे हासिल किए और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी।
ऐसे मामलों में किसी संभावित हमले की समय रहते जानकारी मिलना महत्वपूर्ण होता है। इस घटना में सहकर्मी की ओर से पुलिस को दी गई सूचना के बाद कार्रवाई संभव हो सकी। अधिकारियों के लिए अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आरोपी की कथित योजना,उसकी तैयारी और संभावित लक्ष्यों से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जाँच की जाए।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रोलिंग मीडोज की काउंटी अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे 30 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसी दिन मामले में उसकी अगली पेशी निर्धारित की गई है। आरोपी पर आतंकवादी धमकी देने और अवैध रूप से हथियार रखने के आरोप लगाए गए हैं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन पक्ष को आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे और अदालत मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय करेगी।
पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से सामने आए विवरणों के अनुसार, इस मामले में कथित हथियारों की बरामदगी,सहकर्मी को भेजे गए संदेश,सामरिक जैकेट की तस्वीर और आठ पन्नों का दस्तावेज जाँच के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन साक्ष्यों की पड़ताल से हमले की कथित योजना और आरोपी की मंशा को समझने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका में भारतीय समुदाय और हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर इस घटना के बाद चिंता सामने आई है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि उसे ऑरोरा में एक पूजा स्थल को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश से जुड़ी खबरों की जानकारी है। दूतावास ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समय रहते की गई कार्रवाई की सराहना की और बताया कि वह भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है। साथ ही,स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
दूतावास की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है,जब पुलिस मामले की जाँच आगे बढ़ा रही है और स्थानीय धार्मिक स्थलों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जा चुकी है। भारतीय समुदाय के लिए मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं,बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के भी महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे स्थानों को निशाना बनाने की कथित कोशिश से लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
फिलहाल,आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामले की जाँच जारी है। पुलिस की कार्रवाई से संभावित गोलीबारी को समय रहते रोकने में मदद मिली,लेकिन जाँच एजेंसियों के सामने अब आरोपी की कथित योजना के सभी पहलुओं का पता लगाने की चुनौती है। आने वाले दिनों में अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे कि हमले की तैयारी किस स्तर तक पहुँच चुकी थी और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को किस हद तक साबित किया जा सकता है।
