भरुच,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- गुजरात के भरूच जिले में एक फार्मास्युटिकल कंपनी में हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिले के सायखा औद्योगिक क्षेत्र स्थित सिंजिल फार्माकेम में रिएक्टर फटने से पांच कर्मचारियों की मौत हो गई,जबकि छह अन्य घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसा शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि के दौरान हुआ,जब कंपनी में हाइड्रोजनेशन की प्रक्रिया चल रही थी। धमाका इतना जोरदार था कि रिएक्टर का मलबा कंपनी परिसर से बाहर तक जा गिरा और आसपास के इलाके में भी इसकी आवाज सुनाई दी।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस,प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुँच गईं। राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हुए मृतकों के शवों को सिविल अस्पताल पहुँचाया गया,जबकि घायलों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक,रिएक्टर में विस्फोट के बाद मिथिलीन डाइक्लोराइड (एमडीसी) गैस का रिसाव भी हुआ,जिससे घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गईं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जाँच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार,भरूच जिले के वागरा तालुका स्थित सायखा गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) क्षेत्र में सिंजिल फार्माकेम की इकाई में उत्पादन संबंधी गतिविधियाँ चल रही थीं। इसी दौरान हाइड्रोजनेशन प्रक्रिया के समय करीब 15 किलोलीटर क्षमता वाला रिएक्टर अचानक फट गया। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि रिएक्टर के कुछ हिस्से और मलबा कंपनी परिसर की सीमा पार करके बाहर तक जा पहुंचे।
धमाके के बाद परिसर में धूल का गुबार फैल गया। इसी दौरान मिथिलीन डाइक्लोराइड गैस के रिसाव की भी जानकारी सामने आई। विस्फोट और उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों ने वहाँ काम कर रहे कर्मचारियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। हादसे में पाँच लोगों की जान चली गई,जबकि छह कर्मचारी घायल हो गए।
विस्फोट की आवाज आसपास के करीब 15 किलोमीटर के दायरे में सुनाई देने की जानकारी सामने आई है। धमाके की तीव्रता के कारण औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आसपास की इकाइयों में काम करने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों के बीच भी घटना को लेकर चिंता फैल गई।
हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि रिएक्टर में विस्फोट किस वजह से हुआ। तकनीकी खराबी,प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों या सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित किसी पहलू की भूमिका थी या नहीं,इसका पता जाँच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। राहत एवं बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्र में कार्रवाई शुरू की और घायलों को अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था की। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया।
घायलों को नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है,जहाँ उनका उपचार किया जा रहा है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में कंपनी के नियमित कर्मचारी और ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल बताए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि दुर्घटना ने उत्पादन प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग श्रेणियों के श्रमिकों को प्रभावित किया।
विस्फोट के बाद गैस रिसाव की जानकारी सामने आने के कारण घटनास्थल की सुरक्षा और संभावित रासायनिक प्रभावों की जाँच भी महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे मामलों में प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करना,रिसाव की स्थिति का आकलन करना और कर्मचारियों तथा आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।
प्रशासन की ओर से घटना के कारणों की जाँच की जा रही है। जाँच में रिएक्टर की तकनीकी स्थिति,उत्पादन प्रक्रिया,सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्था जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। हालाँकि,इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
सायखा जीआईडीसी में स्थित इस कंपनी के संचालन को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। जानकारी के अनुसार,कंपनी ने 53 कर्मचारियों के साथ अपना काम शुरू किया था। इतने कम समय में इस तरह का गंभीर हादसा होने से औद्योगिक क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
घटना के बाद पूरे सायखा औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय स्तर पर पुलिस के साथ गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी जाँच शुरू कर दी है। इन विभागों की भूमिका हादसे के कारणों का पता लगाने और यह समझने में महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित इकाई में औद्योगिक सुरक्षा तथा पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन किस तरह किया जा रहा था।
रासायनिक और फार्मास्युटिकल इकाइयों में रिएक्टर का इस्तेमाल विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है। हाइड्रोजनेशन जैसी प्रक्रिया के दौरान तापमान,दबाव और अन्य परिचालन स्थितियों पर नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी प्रक्रिया में असामान्य स्थिति उत्पन्न होती है,तो उसका असर संयंत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है। हालाँकि, सिंजिल फार्माकेम में हुई दुर्घटना के मामले में किसी विशेष तकनीकी कारण की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जाँच के दौरान यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि दुर्घटना के समय निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा था या नहीं और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था कितनी प्रभावी रही। हादसे में नियमित और ठेका कर्मचारियों दोनों की मौत होने के कारण श्रमिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना महत्वपूर्ण है।
गुजरात की इस घटना से पहले 30 सितंबर को कर्नाटक के मंगलुरु स्थित मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड में भी जोरदार धमाके के बाद आग लग गई थी। उस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घायलों में राजेश बैपटिस्ट भी शामिल थे, जो हादसे के समय संयंत्र के अंदर मौजूद थे। उनके शरीर का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था।
इस घटना में पास के एक कार्यालय में मौजूद छह अन्य लोगों को मामूली चोटें आई थीं। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में स्थित घरों में कंपन महसूस किया गया। कुछ नजदीकी मकानों की खिड़कियों और दरवाजों के शीशे भी टूट गए थे। इससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई थी।
मंगलुरु की घटना और भरूच के हादसे की परिस्थितियाँ अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन दोनों घटनाएँ औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों के महत्व को सामने लाती हैं। रासायनिक संयंत्रों और रिफाइनरियों में किसी भी गंभीर दुर्घटना का प्रभाव केवल संयंत्र के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता,बल्कि आसपास के क्षेत्रों तक भी पहुँच सकता है।
भरूच में रिएक्टर विस्फोट के बाद औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर उन संयंत्रों में,जहाँ रसायनों और दबावयुक्त उपकरणों का इस्तेमाल होता है,वहाँ नियमित तकनीकी जाँच,उपकरणों का रखरखाव, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और आपातकालीन योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
फिलहाल,सिंजिल फार्माकेम हादसे की जाँच जारी है और दुर्घटना के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाया जाना बाकी है। जाँच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।
इस हादसे में पाँच कर्मचारियों की मौत और छह लोगों के घायल होने से प्रभावित परिवारों पर गहरा संकट आया है। अब प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने दुर्घटना की निष्पक्ष जाँच करने,जिम्मेदारी तय करने और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ी कमियों की पहचान करने की चुनौती है। जाँच के निष्कर्ष न केवल इस घटना की वजह समझने में मदद करेंगे, बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम तय करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
